हमारी गुस्ताखियों को हमें भी तो बताओ आखिर

हमारी गुस्ताखियों को हमें भी तो बताओ आखिर,
यूँ ही ना पीठ पीछे हमें अक्सर बदनाम किया करो |

आसान नहीं किसी की फितरत जाहिरा समझ पाना,
शक्ल देखकर किसी को अज़ीम ना बना दिया करो |

बहुत बुलंद तामीरों की सिर्फ खूबसूरती पर मत जाओ,
कसीदे पढ़ने से पहले नीव की गहराई जान लिया करो |

कोई कितना ही अज़ीज़ क्यों ना हो किसी का यहाँ,
ग़म-ए ज़िन्दगी का जिक्र यूँ हर किसी से ना किया करो |

बड़े नाज़ुक हो चुके हैं त-अल्लुक़ भी अब समाज में,
रिश्ते संजोने को सिलसिले माफ़ी के बना लिया करो |

मुफ़लिसी और बुलंदी कब देर तक किसी के हिस्से रही?
बदलना फितरत वक्त की सोंच के मुस्कुरा दिया करो |

बुरा वक्त कब इत्तिला करके आता है किसी का यहाँ ?
रहमत अता है उसकी ये जिंदगी जी भरके जिया करो |

मेरी शायरी से –

About ओम हरी त्रिवेदी

आत्मा के सौंदर्य का शब्द रूप है काव्य , मानव होना भाग्य है तो कवि होना सौभाग्य . . . नाम- ओम हरी त्रिवेदी शिक्षा - स्नातक +तकनीकी डिप्लोमा जन्म स्थान - बैसवारा लालगंज , रायबरेली (उत्तर प्रदेश) व्यवसाय - शिक्षक

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.