हमारे भाग्यबिधाता

मेरे हालात ऐसे है की कुछ भी कर नही सकता

नेताओ सामने कुछ बोल नहीं सकता

जो बीत रहा है वह बयान कर नहीं सकता

उनके बाहुबलिओ से मुक़ाबला कर नहीं सकता

और तो और रो भी नहीं सकता

महंगाई का रोना रो नहीं सकता

बिजली क्यों नहीं मिलती है पूछ नहीं सकता

ओपनियन पोल वालो से बचता फिरता

कँही फोटो न उत्तर जाये डरता रहता

चुनाव क्या आ जाता मातम छा जाता

सब कुछ जान कर भी वोट उन्हें देना पड़ता

यह कैसा प्रजातंत्र है में नहीं जानता

घर की लड़कीओ को स्कूल भेज नहीं सकता

राशन मिले या न मिले, मिलता है बोलना पड़ता

जुबान पर काबू रखना पड़ता

सड़के जैसी थी, वैसी ही है, बोल नहीं सकता

हॉस्पिटल में डॉक्टर नहीं मिलते कँह नहीं सकता

जान बचाने के खातिर उनकी बड़ाई करते फिरता

कम से कम बुरा नहीं होगा यह तो में भी जानता

नेताजी के चमचो के सामने क्या कहता

सब कुछ सहन करता रहता

डर के मारे उनके चिन्ह पर बॉटम दबाना पड़ता

उनके जीतने पर खुशी मनाता फिरता

क्योकी वह है हमारे भाग्यबिधाता

कौन करे उनसे बैरता, सब को डर जो लगता।

————-प्रेमचंद मुरारका 

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