हम कहा जा रहे है

हम कहा जा रहे है

364 दिन महिलाओं पर ज़ुल्म करने वाले लोग
आज 1 दिन फेसबुक व्हाट्सएप्प पर चिल्ला चिल्ला कर  महिला दिवस मना रहे है,
ना जाने हम क़हा जा रहे है,

बेटियो को मार रहे कोख में
और बेटो के पैदा होने पर जश्न मना रहे है,
ना जाने हम कहा जा रहे है,

जहा एक तरफ साक्षी, सिंधु, साइना, सानिया की जीत का जश्न मना रहे है,
पर अपनी बहू – बेटी के घर से बाहर निकलने में भी ऐतराज़ जता रहे है,
ना जाने हम कहा जा रहे है,

अपनी बहन को कोई आँख उठा कर देख भी ले तो खून खोल उठता है,
और दूसरों की माँ – बहनों को एसिड से जला रहे है,
ना जाने हम कहा जा रहे है,

अपने बेटों को इंच भर तकलीफ भी हो तो दर्द होता है,
पर अपनी ही बहुओ को दिन भर ताने सुना रहे है,
ना जाने हम कहा जा रहे है,

लड़के आधी रात में भी सड़कों पर लड़की छेड़ आये तो भी शरीफ़ है,
पर लड़की के थोड़े से छोटे कपड़े देख कर उसका कैरेक्टर ढीला बता रहे है,
ना जाने हम कहा जा रहे है,

घरों में सुख समृद्धि खुशियाँ लाती है औरतें
पर चंद रुपयों के लिए उन्हें भी जिन्दा जला रहे है,
ना जाने हम कहा जा रहे है,

एक पल में झाँसी की रानी तो अगले ही पल में सटी सावित्री है औरत,
अगर मौका मिले तो प्रतिभा पाटिल बन पूरा देश चला सकती है औरत,
ये सब कुछ जान कर भी जो अंजान बने जा रहे है,
ना जाने हम कहा जा रहे है, ना जाने हम…..

किर्तिश श्रोत्रिय

http://kirtishshrotriya.blogspot.com

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