हाँ मैं वो बदनामी हूँ

हाँ मैं वो बदनामी हूँ

जिसे कभी तू समझ ना पायी, हां मैं वो कहानी हूँ।
जो कभी ना मिले किसी को, हां मैं वो निशानी हूँ।
वक़्त गुजारा करते थे,पर अब वक़्त ही तो नहीं यहाँ
कभी यादो के तरह गुजरी रातो की, हां मैं वो बेमानी हूँ।
ठुकरा दिया था दिल ने भी, इसमें तेरी कोई वजह नहीं,
कभी जिससे नफरत थी तुझको, हां मैं वो वीरानी हूँ।
झुक गया था सजदे में, कबूल कर जाने को दुआ तेरी,
दुआ की तूने,मुझे मिटाने की, हां मैं वो नादानी हूँ।
दिल में जगह दी फिर भी, मुआवजा लेना भूल गए,
पत्थर दिल की नाजुक सी तेरे, हां मैं वो मेहरबानी हूँ।
खयाल को तेरे तो अब तक, समझ ना सके हम जाना यूं,
हर हाल में तुझे दिल में लाने को, हां मैं वो मेजबानी हूँ।
फिर से पांसे फेकू या कोई, नया जाल बुन दू बता,
तुझको हर हाल में पाने की, हां मैं वो परेशानी हूँ।
प्यार की कोई वजह नहीं,”मैकश” इज़्ज़त ही जरूरी है,
तेरे हर गम को सहने वाली, हां मैं वो बदनामी हूँ।

“मैकश”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.