ग़ज़ल (एक ख्याल)

गफलत में था कि तू, फ़क़त मेरी दुलारी है,
किस्मत पलटी उसकी, जिसकी तू दुलारी है।

महताब खोया-खोया सा, रहता है आजकल,
उसकी आँखों ने तस्वीर, तेरी जो उतारी है।

गुजरे हैं कई पल, अपनी ही साँसों के बगैर,
याद आती नहीं कोई रात, बिन तेरे गुजारी है।

खेला था जुआ कभी, तुझे हासिल कैसे करूँ,
तुझसे ज़्यादा कौन जाने, ये दिल तो जुवारी है।

तारों की बारात निकली, कहकशां के रास्ते,
चांदनी की चादर लपेटे, रात अभी कुंवारी है।

बहकते हैं कदम, गुजरता हूँ जब तेरी गली से,
नशा शराब का नहीं, तेरी आखों की खुमारी है।

तू बेशक भूल जाए, भूलती नहीं ये तन्हाईयाँ,
तेरी यादें जो दिल ने, आज फिर से उभारी हैं।

बहारों ने लिखी है, आसमां में ग़ज़ल  ‘एकांत’ ,
रोशनाई तो मेरे खून की, मगर जुबां तुम्हारी है।

(किशन नेगी ‘एकांत’)

About Kishan Negi

मुझे बचपन से ही कविता लिखने का शौक रहा है, लेकिन ये उस समय पूरा नहीं हो सका. चौदह वर्ष की आयु में प्रेमचंद, शिवानी पंत व शेक्सपिअर को पढ़ने का एक अनोखा अवसर मिला, जिनसे मैं बहुत ही परसाभावित हुआ | मेरा येर शौक अचानक ही नहीं बना, अपितु परमात्मा की असीम कृपा से मन में अनेकोनेक विचार कविता गढ़ने के लिए आते रहते हैं |

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