ग़ज़ल- बयां करता हूँ

ग़ज़ल- बयां करता हूँ

मैं मेरी ग़जल अपने सल्तनत के नाम बयां करता हूँ
मैं इस चमन,देश से बेइंतिहा मोहब्बत करता हूँ
मिला मुझको आंगन खुद को ख़ुशनसीब समझता हूं
मेरा हर पल,हर कतरा इस देश के नाम बयां करता हूँ
देखी नही मैने आजादी,खुदको मैने आजाद पाया
गांधी,नेहरू,भगत,सुभाष, की भूमि को सलाम करता हूँ
पूछते हैं मुझे मेरे यार कोनसा जहां है तेरे दिल में
सीने को तान अपने नाम हिंदुस्तान बतलाता हूँ
कभी न थामा इन हाथों ने कोई और पताका
अरे हिंदुस्तान वासी हूं हर वक्त तिरंगा लहराता हूं
टेके फिरंगियों ने घुटने इन पर्वत रूपी शीशो के आगे
अमिट, अभेद्य,रहे वतन यही गीत मैं गाता हूं
हिंदी,हिंदुस्तान की भाषा हर पल मैं बतलाता हुं
मैं मेरी ग़ज़ल सल्तनत के नाम बयां करता हुँ

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