ग़ज़ल – मेरे दिल ने भी कभी

ग़ज़ल –  मेरे दिल ने भी कभी

मेरे दिल ने भी कभी
दुआ कि थी उनके लिए।
जिसने छोड़ दिया मुझे
जमाने के लिए।।
नशा अभी उतरा भी नहीं
उसके प्यार का ।
कि पीना पड़ा जाम
उसे भूलाने के लिए।।
शाम पड़े याद आ जाती हैं
वो हँसी उसकी।
मचलने लग जाता है दिल
उसको पाने के लिए।।
तभी याद आता है
उसका वो जालिम चेहरा।
जिसने बर्बाद किया था मुझे
किसी और को पाने के लिए
:- अनमोल तिवारी “कान्हा”

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