ज़िन्दगी

ज़िन्दगी

बे-परवाह जब ये ज़िन्दगी हुई,
क़ीमत अश्क़ की तब मालूम हुई,
*
हँसी के तराने गुम हुए खुद-ब-खुद,
दोस्तों की जब से कमी हो गई,
*
रास नहीं आयी उसे मेरी ये हँसी,
शायद….
मेरा ये ग़म जब किसी की ख़ुशी हो गई….
*
*
# विराज़

About "विराज़"

"Poet"

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