“अनसुनी यादें”

सुनो आज कुछ सुना देता हूं मैं, तू साथ है मेरे तो गुनगुना लेता हूं मैं. -> वक्त ना जाया कर, वो तो एहसानफरामोश है. मेरे गीत लबों पे हैं, तब तू क्यों खामोश है. संजीदा है तू, या ये खयाल हैं मेरे. बेबाक है जिंदगी, पर तू क्यों मदहोश है. खोकर तुम्हे फिर से अपना बना लेता हूं मैं. सुनो आज ………… -> वो याद आता है मुझे, मां का बेटा कहना. रुला जाता है मुझे, पिता का बेटा कहना. बहना कहती है, तू तो मेरा प्यारा भाई है, सब कुछ यूं ही बदले “मगरिब”, पर तू अच्छा बेटा Continue reading “अनसुनी यादें”

प्रेम गाथा

चाँद-तारों की बातों में प्रेम जताने चांदनी का जिक्र आता खिले फूलों की मादकता समझाने भंवरें-तितलियों की गाथा किसी नशे के हालात पर सुरा संग शाकी का जिक्र आता हाव-भाव से यह रहस्य सुलझा रही दुनिया कहकर प्रेम गाथा हंसी,खुशी या ग़म,बाल अवस्था से यौवन या वार्धक्य जब आता उन जीवन धारा को सरस बनाने दिखे अलग-अलग सी प्रेम गाथा ममता का रूप,खिलती तरूणाई,कर्तव्य में प्रेम का जिक्र आता प्रिय-प्रियतमा की गरिमा होती अलबेली जब बन जाती प्रेम गाथा हृदय की धड़कन,मन का चैन, उपमाओं में प्रेम का जिक्र आता अजब अदा बन गई, विरह या मिलन हर पहलू पर Continue reading प्रेम गाथा

वक्त

वक्त से सीखा की वक्त किसी के लिये रूकता नहीं वक्त ने ही जताया, वक्त सब का एक सा चलता नहीं बदलते वक्त के साथ जो बदल गये,उन्हें परेशानी नहीं जो बदल नहीं पाये,उनकी निशानी वक्त ने छोड़ी नहीं वक्त से पहचान,वक्त के आगे किसी की चली नहीं जब वक्त आये, पतन का कारण,अभिमानी जाने नहीं अहम अपने ग़रूर का,वहम से असर को माने नहीं वक्त बनाता,वक्त ही मिटाता,यह बात अनजानी नहीं   सजन

“आंसू”

आंसू आज तक नहीं पोंछे अपनी आँखों के, कहीं ये तेरे हाथ खाली न रह जाए। अब तो मिलना भी बंद कर दिया है लोगों से, जिस से तेरी निगाह सवाली ना रह जाए। जानता हूँ मेरा तुम पर अधिकार नहीं, सोचता हूँ फिर क्यों तेरा इनकार नहीं। जब राह में तन्हा मुसाफिर तू ही है, फिर क्यों दिल में तेरे मेरी ही पुकार नहीं। इसलिए अब तुझे याद करके नहीं पीता क्या पता यह दिल शराबी ना रह जाए। आंसू ……… इस दिल को मयस्सर कुछ भी नहीं, तुम बिन मेरा मुकद्दर कुछ भी नहीं। करोगी याद तो याद Continue reading “आंसू”

आंखं मिचौली

फटे हाल गरीब को देख अमीर के माथे पे शिकन वैरागी मठवासी की उपेक्षा मध्यम वर्गीयों के मिश्रित परिणाम अपनी श्रेणी में हिस्सेदारी की जलन वह असहाय चिल्लाया वाह रे ईश्वर ! तुम जगत के सृष्टि कारक तुम भी आम आदमी की तरह बहुत उपर से जब देखते हो तुम्हे भी क्या जमीं पे पड़े हुए यह शरीर दिखाई नहीं देते या इनका वजूद अपनी कमियों के लिये तुम्हारे दृष्टिपात में नहीं आते या इन्हें ध्यान आकर्षित करने के लिये तथाकथित तुम्हारे माध्यम से तुम्हे भी भेंट पंहुचना होगा बिना शर्त, की प्रतिफल में कुछ मिलेगा या नहीं अभी के Continue reading आंखं मिचौली

सवाल

प्रभु ने जताया सहज प्यार कलियुग में नाम गान से पार कोई कमायें इस से धन अपार कोई फिर भी भूखा मरे लाचार भाग्य फल अगर हम इसका आधार नाम गान की बात कपट प्रचार अगर यह कर्म फल से हो बिचार ढोंगी करते कोन सा कर्म का आचार कहा वेद पुराणों में शत बार भक्त के अधीन प्रभु का संसार जिसे मिले वह तब भक्त अपार जिसे नहीं, कैसे हो बेड़ा पार दया-करुणा का क्या होता आधार अजीब विड़म्वना है, कैसे हो बिचार पक्षपात का स्वरूप कहे पुकार धर्म चला रहे धर्म के कुछ ठेकेदार आश्वासित किया था प्रभु Continue reading सवाल