माँ दिलावो वो प्यारी-सी गोदी तुम्हारी

माँ दिलावो वो प्यारी-सी गोदी तुम्हारी माँ दिलावो वो प्यारी-सी गोदी तुम्हारी जिसमें लेटा मैं सुनता था प्यारी कहानी   कहानी में होता था इक नन्हा-सा गुड्डा जिसे कहती थी तू अपना प्यारा सा मुन्ना मुन्ने की दुनिया थी इसी गोदी-सी सुन्दर जहाँ सोता था मैं तेरे आँचल में छिपकर   यहीं सोती थी नाजुक-सी निंदिया हमारी माँ दिलावो वो प्यारी-सी गोदी तुम्हारी   ममता के गहने थे तेरे बढ़िया पुराने झिलमिलाते थे जिसमें कई सपने सुहाने सपनों में तू मुझमें ही कान्हा देखती थी यshoदा-सी मुस्काती तू मुझे चूमती थी अब कहाँ है माँ वो बातें पुरानी सुहानी माँ Continue reading माँ दिलावो वो प्यारी-सी गोदी तुम्हारी

अन्धविश्वास

अन्धविश्वास की आड़ में फंस चुका इंसान l ढोंगी पंडित मजे ले रहा, देख रहा भगवान ll सुबह सुबह मंदिर में जाते माथे तिलक लगाते है l फिर पूरे दिन एक दूजे की, चुगली करके आते है ll गणपति को दूध पिलाने जन सैलाब उमड़ आया l दूध वालो की चाँदी हो गयी बह के दूध बाहर आया ll घर में सुख शांति के लिए पंडित जी से हवन कराते है l राहु और केतु का वास्ता देकर डोंगी पंडित ठग ले जाते है ll एक सज्जन ने पंडित से पूछा पैसा मेरे पास कैसे आएगा l पंडित जी बोले Continue reading अन्धविश्वास

काँपते हैं गीत मेरे

  काँपते हैं गीत मेरे काँपते हैं गीत मेरे सुर पतझर बन गए शब्द अपनी धुन में रहे स्वर नश्वर बन गए दूर नभ में फैलती थी लय कोकिल कंठ की वीरान में चीत्कार है किसी रिक्त कंठ की वेदना से गीत के थे बोल भंवर बन गए काँपते हैं गीत मेरे सुर पतझर बन गए विष से भरा अमृत कलश मन को वो दे गए बन जाय अभिशाप क्षण में वर ऐसा दे गए है मन मंदिर उन्हीं का जो पत्थर बन गए काँपते हैं गीत मेरे सुर पतझर बन गए कल्पना की आरती के शब्द दीप हैं सभी तेरा Continue reading काँपते हैं गीत मेरे

गुस्से की आग

गुस्से की आग गुस्सा इंसान को खाये जा रहा है l नफरत का घूट पिलाये जा रहा है ll होठों पर एक बनावटी सी मुस्कान लेकर वो अपने ग़मों को छुपाए जा रहा है ll किसी के घर जब खुशी आती है l दूसरे की सहन करने की शक्ति ख़त्म हो जाती है ll सुनकर वो अपने होठों पर बनावटी हँसी लाता है l और बिना मन के बधाई देकर चला आता है ll अंदर ही अंदर कुढ़ता है की मुझको सफलता क्यों नहीं मिल पाई l मैंने क्या कसूर किया था जो यह सफलता मेरे हाथ न आई ll Continue reading गुस्से की आग

दोहे

दोहे मन की सुन्दर, सुन्दरता तन का रूप छलावा l रंग रूप के, वश में हुए तो होगा फिर पछतावा ll रे भैया ……………. होगा फिर पछतावा ll अपना-अपना सब कहें अपना हुआ न कोयl पाप की दौलत जोड़ के सुख से रहा ना कोय ll रे भैया ……………. सुख से रहा ना कोय ll दोस्त बहुत मिल जायेंगे साथ कौन चल पायेगा l दुःख के पलो में जो संग रहे सच्चा दोस्त कहलायेगा ll रे भैया ……………. सच्चा दोस्त कहलायेगा ll पल दो पल की जिंदगी साथ कुछ ना जायेगा l अंहकार की बेड़ी तोड़ दे जीवन ये तर Continue reading दोहे

सुखी रहने की कला

सुखी रहने की कला आज हर कोई दुखी है l कोई दूसरों के सुख से दुखी है l कोई सुख की कमी से दुखी है ll कोई अपनों से परेशान है l कोई दूसरों को देख हैरान है ll जहाँ तू कम वेतन का रोना रोता रहता है l वहीं भिखारी दो पैसे मिलने पर भी बहुत खुश रहता है ll जहाँ तू दोस्तों के ना होने पर दुखी हो जाता है l वहीं प्यार से तो जानवर भी दोस्त बन जाता है ll जहाँ कुछ दूरी पैदल चलने पर तू परेशान हो जाता है l वहीं कोई बैशाखी का Continue reading सुखी रहने की कला

लड़का-लड़की एक समान

लड़का-लड़की एक समान लड़का-लड़की दो अनमोल रतन है l तो भेदभाव किस बात का एक फूल की कली है भैया दूजा फूल गुलाब का ll दूजा फूल ……….. फिर लड़की के पैदा होने पर उदासी क्यों छा जाती है l वही लड़का पैदा हो तो खुशी मनाई जाती है ll लड़की का है क्या कसूर जो दुनिया देख न पाई l एक लड़के की चाह में कन्या भूण हत्या करवाई ll अलग ऱूप है अलग रंग है जान सभी में एक जैसी है l फिर क्यों हमनें भेदभाव की खींची लकीर ऐसी है ll लड़की करती है माँ बाप की Continue reading लड़का-लड़की एक समान

मुश्किल है

मुश्किल है सिसकती हुई आवाज़ को सुनकर, अब तक तुम सोऐ रहे, तो ‘नारी’का इस समाज में, कल्याण हो पाना मुश्किल है…. इस शोर-लालच की दुनिया में, जो बहरे युहीं बने रहे, तो अमन-शान्ति फैलाते हुऐ, जीवन जी पाना मुश्किल है…. युं बेटा पाने की चाह में, बेटी को युहीं मारते रहे, तो बराबरी के इस जहान में, अकेला जी पाना मुश्किल है…. दिन-रात होती घटनाओं को, जो देखकर भी तुम चुप रहे, तो नए समाज की कल्पना का, निर्माण हो पाना मुश्किल है…. ‘विराज’

जन्मदिन की शुभकामनाएँ

 जन्मदिन की शुभकामनाएँ खुशियों से भर जाये झोली तेरी l हो सारी पूरी मुरादे तेरी ll लग जाये तुमको उम्र भी मेरी l हो सारी पूरी मुरादे तेरी ll लगे न किसी की नज़र भी तुझे l पलकों की छाँव में बिठा लू तुझे ll मुश्किले तुझे कभी छू न पाये l आगे ही आगे तू बढ़ता जाये ll माँ बाप की आँखों का तू तारा l उनकी उम्मीदों का तू सहारा ll खुशियों से भर जाये झोली तेरी l हो सारी पूरी मुरादे तेरी ll लग जाये तुमको उम्र भी मेरी l हो सारी पूरी मुरादे तेरी ll हम Continue reading जन्मदिन की शुभकामनाएँ

चिट्ठी और मोबाइल

चिट्ठी और मोबाइल वो दिन भी क्या दिन थे, जब चिट्ठी लिखी जाती थी l प्यार की झलक उसमे साफ़ नज़र आती थी ll इंतजार रहता था उस चिट्ठी का l जिसके आते ही पढ़ने की होड सी लग जाती थी ll उसमे लिखे शुरू के शब्द, आज भी बहुत याद आते है l की हम सब यहाँ कुशल-पूर्वक है और आपकी कुशलता भगवान से नेक चाहते है ll समय के साथ लोगो की सोच में बदलाब आया है l अब हर तरफ मोबाइल ही मोबाइल छाया है ll आज व्हाट्सप्प और फेसबुक का ज़माना है l क्योंकि आज पल Continue reading चिट्ठी और मोबाइल

अर्धांगिनी

जीवन में मुश्किलें साथ थी l बस एक उम्मीद की आस थी ll फिर भी सोच कर घबरा रहा था l क्या होगा सोचता चला जा रहा था ll चिंता दिल और दिमाग पर छा गई l तभी वो मेरे सामने आ गयी ll उन पलों में उसने ही साथ निभाया l मेरे कदम के साथ कदम मिलाया ll उसने ही मुझमें विश्वास जगाया l हर बुराई से मुझे लड़ना सिखाया ll जब ये दुनिया साथ नहीं निभाती है l तब वो ही मेरा सहारा बन जाती है ll उसने ही हालातो से लड़ना सिखाया l उसने ही छिपे डर Continue reading अर्धांगिनी

शिक्षा में असमानता

शिक्षा में असमानता शिक्षा नहीं देखती गरीबी अमीरी, शिक्षा पर है समानता का अधिकार l आज इंसान ने अपने चंद फायदे, के लिए बनाया है इसे व्यापार ll बचपन में सुना था की शिक्षा पर सबका बराबर हक़ है l बच्चे को स्कूल में दाखिला दिलाने गया तो, पता चला की शिक्षा देने में भी बड़ा फर्क है ll प्राइवेट स्कूल के नाम पर शिक्षा बेचीं जा रही है l खुलेआम डोनेशन से मोटी रक़म उगाई जा रही है ll जब शिक्षा पर सबका समानता का हक़ है, फिर पढ़ाई जा रही इन किताबों में क्यों फर्क है ll सरकारी Continue reading शिक्षा में असमानता

तुम्हारी यादे

तुम्हारी यादे कल फिर अतीत को मैने टटोला तुम्हारी यादो के संदूक को खोला, हर याद मे एक हि समानता पाई, हर जगह तू ही तू नज़र आई फिर एक निरर्थक प्रयास किया, तुम्हारी यादो का मूल्य ग्यात किया, गणना के सभी सूत्र बेकार हो गये, तेरी यादो के मूल्य खरबो पार हो गये, फिर सोचा ये तो अनमोल हे, इन यादो का न कोई मोल हे इन यादो का न कोई मोल हे….. राज़ीव कुमार

ये समय न रुकता है

ये समय न रुकता है , ये समय न रुकेगा हर ज़ख़्म को ये भर देगा,घबराना कैसा 1 विश्वास यदि रखोगे, घबराना कैसा 11 हार-जीत जीवन में,आते और जाते है हार यदि तुम जाओ,घबराना कैसा 1 मेहनत से काम करोगे,घबराना कैसा 11 हर कोई पढ़ाई में प्रथम नहीं आता है कोई खेल में नाम कमाएं,घबराना कैसा 1 उसके हुनर को पहचानों, घबराना कैसा11 जो दुनिया में आता है,वो एक दिन जायेगा फिर अंत समय आने पर,घबराना कैसा 1 जिस दिन ये जान लोगें, घबराना कैसा 11 ईश्वर को याद करके,दुःख दूर हो जाते है फिर भी चिंता कोई सताये,घबराना कैसा Continue reading ये समय न रुकता है

पत्थर से मोम

ऐ दोस्त, तुमने ये क्या कर दिया, इस पत्थर में, प्राणों का संचार कर दिया, कभी जो, इंद्रियों पर काबू न था, आज वही स्वभाव उसने, मेरा शीतल कर दिया, हंसने की सहमति, बन्द थी मुझको जैसे, उसने खुशी का, उजाला कर दिया, जो राह में, किसी को समझता न था, आज उसी को, रास्ते का राही कर दिया, उसने ही मेरे, सूर्य के तेज को, शांत कर, चंद्रमा कर दिया, जिसमें बदलाव, कोई कर ना सका, तेरे दो बोलो ने, वो काम कर दिया, हां तुने ही, मेरे स्वभाव को, पत्थर से मोम कर दिया, तेरी दोस्ती के, स्पर्श Continue reading पत्थर से मोम