घमंड

घमंड पैसो से सब खरीद लोगो तुम l क्या अपनी सांसे खरीद पाओंगे ? फिर क्यों है घमंड इन पैसो का ? जब सब कुछ यही छोड़ जाओंगे ll क्यों करते हो इस रूप पर घमंड ? ये रूप एक दिन यू ही ढल जाएगा l सवारना है तो अपने मन को सवारों l सच्चा मन ही तुम्हे सुंदर बनाएगा ll क्यों करते हो अपनी भक्ति पर घमंड ? दिया जलाने से सब भक्त नहीं बन जाते l ईश्वर तो स्वयं उसके भक्त बन जाते है l जो निरस्वार्थ दूसरों की सेवा करते जाते ll मत कर अपनी किस्मत पर Continue reading घमंड

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सच से रूबरू

सच से रूबरू हो जाता हू l जब में अस्पताल जाता हू l अपने दर्द को भूल जाता हू l जब दूसरों को दुःखी पाता हू ll सच से रूबरू हो जाता हू l जब में शमशान जाता हू l चिता की जलती हुई अग्नि में l अहम को जलता हुआ पाता हू ll सच से रूबरू हो जाता हू l जब किसी वृद्ध को सामने पाता हू l रूप पर गुरुर करना भूल जाता हू l जब उसके चेहरे में अपना चेहरा पाता हू ll सच से रूबरू हो जाता हू l जब मौत को करीब देख पाता हू Continue reading सच से रूबरू

विवाहित की पहचान (व्यंग)

हम पर ही क्यों इतनी बंदिश लगाई जाती है l माँग में सिन्दूर और चुटकी पहनाई जाती है ll हम तो दूर से ही शादीशुदा नज़र आते है l पुरुष शादीशुदा होकर भी कुंवारा बताते है ll कोर्ट ने महिलाओ के फरमान पर किया ऐलान l शादीशुदा पुरुषों पर लगेगा “सूरज” का निशान ll जिससे ये निशान पुरुषों में दूर से नज़र आएगा l और पुरुष अपने को कुंवारा नहीं बता पाएगा ll एक पुरुष के दिमाग में खुरापाती ख्याल आया l उसने माथे से “सूरज” के निशान को मिटाया ll पराई नारी को बिना किसी डर के छेड़ने लगा Continue reading विवाहित की पहचान (व्यंग)

मेरा नाम आया..

◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆ बेताब था बहुत लेकिन मुझे आराम आया, गुनाहों के खुनी पन्नों पे जब मेरा नाम आया, ◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆ वक़्त की रेत थी जो हाथों से अब जा चुकी थी, मोहलत अब क्या मांगू जब नया फरमान आया, ◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆ बदलती राह अब तब्दील हुई गलियों के बीच, उस ख़ौफ़ में भी वो तो सर-ए-आम आया, ◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆ इंसान भी नहीं बाकि रहा इस खेल में अब, मंजर मौत का था ना कोई निशान आया, ◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆ रुपहले चेहरे अब और धुंधले से हो चुके थे, तन भी थक चूका था ना कोई आराम आया, ◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆ काल भी जैसे अब मुझको है लगता भूल Continue reading मेरा नाम आया..

मेरा प्यार हो तुम

मेरा  प्यार हो तुम पगली मेरा प्यार हो तुम, सच पगली मै कैसे बताऊ.. मन के मेरे आस हो तुम ।।   जुड़ी तुमसे मेरी सब यादे है रिस्ता मेरी जान हो तुम …   भूल कोई ना दोष तुम्हारा .. कब तुमने मुझको चाहा था॥ मुझसे तो था बस मन बहलाना मैंने ही अरमान सजाया था   वो भी अच्छा, तुम भी अच्छी मै ही तो एक पागल था॥ मेरा दोष यही पगली तुझको अपना मैंने माना था ॥   सच कहती हो रिस्ता क्या है ? भूल गयी जब वादे तुम ..पर तुमसे जुड़ी मेरी सब यादे है Continue reading मेरा प्यार हो तुम

गंगा

निर्मल है,पावन है,स्वच्छ है गंगा l चीख-चीख के कह रही ये गंगा l पापों को तुम्हारे मैं हर लूंगी l पर मत करो मुझे और गन्दा ll इसी जल के स्नान से पवित्र होते l फिर क्यों इसमें तुम कपड़े धोते l पूजा-सामग्री क्यों इसमें बहाते l धर्म की आड़ में गन्दगी फैलाते ll स्वच्छ मैं रहूंगी तो स्वच्छ रख पाऊँगी l निर्मल जल से गंगा कहलाउँगी l गंदगी से यू मेरा अस्तित्व ना रहेगा l मैं ना रही तो, तू भी ना रहेगा ll करुँ मैं विनती तुमसे बन्दे l हर हर गंगे जय माँ अम्बे l मिलकर गंगा Continue reading गंगा