सर्द सुबह

सर्द सुबह कहीं धूँध में लिपटकर, खोई हुई सी हैं सुबह, धुँधलाए कोहरों में कहीं, सर्द से सिमटी हुई सी है सुबह, सिमटकर चादरों में कहीं, अलसाई हुई सी है सुबह, फिर क्युँ न मूँद लूँ, कुछ देर मैं भी अपनी आँखें? आ न जाए आँखों में, कुछ ओस की बूंदें! ओस में भींगकर भी, सोई हुई सी है सुबह, कँपकपाती ठंढ में कोहरों में डूबी, खोई हुई सी है सुबह, खिड़कियों से झांकती, उन आँखों में खोई है सुबह, फिर क्युँ न इस पल में, खुद को मैं भी खो दूँ? जी लूँ डूब कर, कुछ देर और इस Continue reading सर्द सुबह

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एक और इंतजार

एक और इंतजार रहा इस जनम भी, एक और अंतहीन इंतजार….! बस इंतजार, इंतजार और सदियों का अनथक इंतजार! इंतजार करते ही रहे हम सदियों तुम्हारा, कब जाने धमनियों के रक्त सूख गए, पलकें जो खुली थी अंतिम साँसों तक मेरी, जाने कब अधखुले ही मूँद गए, इंतहा इंतजार की है ये अब, तुमसे मिलने को पाया हमने ये जन्म दोबारा… रहा इस जनम भी लेकिन एक और अंतहीन इंतजार…! गिन न सके अनंत इंतजार की घड़ियों को हम, चुन न सके वो चंद खुशियाँ उन राहों से हम, दामन में आई मेरी बस इक तन्हाई, और मिला मुझको मरुभूमि Continue reading एक और इंतजार

पत्थर दिल

पत्थर दिल न जाने कब पत्थर हुआ, मासूम सा ये दिल मेरा….. हैरान हूँ मैं, न जाने कहां खोई है मेरी संवेदना? आहत ये दिल जग की वेदनाओं से अब क्यूँ न होता? देखकर व्यथा किसी कि अब ये बेजार क्यूँ न रोता? व्यथित खुद भी कभी अपने दुखों से अब न होता! बन चुका है ये दिल, अब पत्थर का शायद! न तो रोता ही है ये अब, न ही ये है अब धड़कता! न जाने कब पत्थर हुआ, मासूम सा ये दिल मेरा….. हैरान हूँ मै, न जाने कहां खोई दिल की मासूमियत? महसूस क्यूँ न अब ये Continue reading पत्थर दिल

माँ

माँ माँ ! तुम क्यों मेरी कविता में रह रहकर आती हो। क्यूँ अपने आँसू की गंगा इसमें भर जाती हो। मैं तो अपनी कलम लिये यूँ ही सोचा करता हूँ पर कागज पर तुम क्यूँकर माँ अच्छा लिख जाती हो। मैं तो जगता रहा हूँ रातभर सो भी न सका हूँ पर जाने कब तुम भावों में रस कण भर जाती हो। माँ ! तुम क्यों मेरी कविता में रह रहकर आती हो। सुबह कुनमुनाती किरणें अपनी झोली में ले, माँ तुम ही आकर थपकियाँ दे मुझको सजग बनाती हो। माँ, मेरी कविता तो तेरे आँगन की तुलसी ही Continue reading माँ

26 जनवरी

ग़ज़ल (जनवरी के मास की) 2122 2122 2122 212 जनवरी के मास की छब्बीस तारिख आज है, आज दिन भारत बना गणतन्त्र सबको नाज़ है। ईशवीं उन्नीस सौ पंचास की थी शुभ घड़ी, तब से गूँजी देश में गणतन्त्र की आवाज़ है। आज के दिन देश का लागू हुआ था संविधान, है टिका जनतन्त्र इस पे ये हमारी लाज है। हक़ सभी को प्राप्त हैं संपत्ति रखने के यहाँ, सब रहें आज़ाद हो ये एकता का राज़ है। राजपथ पर आज के दिन फ़ौज़ की छोटी झलक, दुश्मनों की छातियाँ दहलाए ऐसी गाज़ है। संविधान_इस देश की अस्मत, सुरक्षा का Continue reading 26 जनवरी

दिल मेरा यूं ही गुनगुनाता रहे…

दिल मेरा यूं ही गुनगुनाता रहे… तू हर कदम बस मेरा साथ निभाता रहे… सारे जमाने को भूल जाऊंगा मैं… बस तेरे लिए मेरा दिल गाता रहे… दिल मेरा यूँ ही गुनगुनाता रहे… तनहा मैं ना रहूं… तू याद आता रहे… जिंदगी को ये नया राग देता रहे… चांद तारों को भी तेरी बातें सुनाता रहे… इस जहां में अपना भी मुकाम बनाता रहे… दिल मेरा यूं ही गुनगुनाता रहे… ख्वाहिश है इसकी इतनी तुझे बस ये पाता रहे… तू जहा भी हो ये दिल भी वहीं गीत गाता रहे… सुरज के धुप से तुझे ये बचाता रहे… चाँदनी रातों Continue reading दिल मेरा यूं ही गुनगुनाता रहे…

बस इतनी सी कहानी है मेरी

बस इतनी सी कहानी है मेरी सम्मान की जिंदगी को तरसता मैं, समाज में अनाथ कहलाता हूँ। बस इतनी सी कहानी है मेरी, मैं कूड़े से उठा था आज कूड़ा उठाता हूँ।।1।। मुझे पिता का प्यार नही मिला, ना मैं माँ की ममता को जानता हूँ। समाज की नफरत मैं पला हूँ मैं, रिश्ता नफरत का जानता हूँ।।2।। भूख और लाचारी मजबूर कर देती है मुझे, मैं रास्ता चोरी और बेईमानी का अपना लेता हूँ। कब तक बेवजह मार सहता रहूँ मैं, एक रोज किसी को मार देता हूं।।3।। ज़िन्दगी यहीं आकार बदल जाती है मेरी, न्याय की अदालत में Continue reading बस इतनी सी कहानी है मेरी

दिल मेरा यूं ही गुनगुनाता रहे…

दिल मेरा यूं ही गुनगुनाता रहे… तू हर कदम बस मेरा साथ निभाता रहे… सारे जमाने को भूल जाऊंगा मैं… बस तेरे लिए मेरा दिल गाता रहे… दिल मेरा यूँ ही गुनगुनाता रहे… तनहा मैं ना रहूं… तू याद आता रहे… जिंदगी को ये नया राग देता रहे… चांद तारों को भी तेरी बातें सुनाता रहे… इस जहां में अपना भी मुकाम बनाता रहे… दिल मेरा यूं ही गुनगुनाता रहे… ख्वाहिश है इसकी इतनी तुझे बस ये पाता रहे… तू जहा भी हो ये दिल भी वहीं गीत गाता रहे… सुरज के धुप से तुझे ये बचाता रहे… चाँदनी रातों Continue reading दिल मेरा यूं ही गुनगुनाता रहे…

श्रीनिवास रामानुजन् अयँगर (तमिल ஸ்ரீனிவாஸ ராமானுஜன் ஐயங்கார்) – “ईश्वरीय रुप की गणितीय संगणना”

कुछ लोग तस्वीर में कहानी ब्यान कर सकते हैं,  कुछ कविता से तस्वीर पैदा कर सकते हैं,  कुछ ऐसे हैं जो अपनी तरंगो से,  खूंखार जानवरो को शांत कर सकते हैं  परंतु  एक भारतीय को  जन्मजात ऐसा उपहार मिला था  जो अपूर्व था….  अनन्त काल से, अनन्त प्राणी…..  अनन्त की खोज में लगे हैं……  परन्तु कोई नहीं जान पाया  कि,  ये अनन्त आखिरकार है क्या?  सिवाय,  नामक्कल की नामागिरी माता प्रसाद-पुत्र एक अनन्त प्रतिभा युक्त श्रीनिवास रामानुजन के…… ऐसा महानतम गणितज्ञ, जिसने ये स्वीकार किया की,  उसकी जो भी खोज है  वो उसे उसकी कुलदेवी ने स्वप्न में स्वयं प्रदान की है  “श्रीनिवास रामानुजन Continue reading श्रीनिवास रामानुजन् अयँगर (तमिल ஸ்ரீனிவாஸ ராமானுஜன் ஐயங்கார்) – “ईश्वरीय रुप की गणितीय संगणना”

इंसान की कीमत

इंसान की कीमत यहाँ  इंसान को  नहीं, पैसे को पूजा जाता है l पैसों से  ही यहाँ  इंसान  को  आक़ा जाता है ll बिन पैसों के इंसान की कीमत कुछ भी नहीं l जीता है जिंदगी पर घुट – घुट के ज़ी पाता हैll यहाँ इंसान को  नहीं पत्थर  को पूजा जाता है l भूखे को नहीं पत्थर को भोग लगाया जाता है ll जहाँ गरीब की  शादी  में देने में हाथ खिंचते है l वही पत्थर पर पैसे और जेवर चढ़ाया जाता है ll यहाँ पालतू कुत्ते को ज्यादा प्यार किया जाता है l इंसान से  ज्यादा कुत्ते  से Continue reading इंसान की कीमत

परिश्रम -सफलता की कुँजी

परिश्रम -सफलता की कुँजी सपने  तभी  पूरे हो पाते है l जब परिश्रम किये जाते है ll बिन परिश्रम कोई भी इंसा l सफल कभी नहीं हो पाते हैll एक   नन्ही  सी  चींटी  कैसे l दाना – दाना  करके  लाती  हैll थक  जाये  पर  हार  ना  माने l परिश्रम हमें करना सिखाती है ll ची – ची  करती  चिड़िया रानी l तिनके जोड़ खोसला बनाती है ll हवा में तिनके बिखर भी जाये l फिर कोशिश करना सिखाती है ll आलस  से  ना  हो  पूरे  सपने l सपने ,  सपने  ही  रह जायेंगे ll परिश्रम है सफलता की कुंजी Continue reading परिश्रम -सफलता की कुँजी

मैं सत्यम हूँ।

मैं सत्यम हूँ। मैं विश्व में सम्पूर्ण हूँ। मैं हर मनुष्य का आधार हूँ। मैं खुद में ही विस्तार हूँ। मैं निराकार हूँ। मैं सत्यम हूँ। मैं हर समस्या का समाधान हूँ। मैं असत्य का विनाश हूँ। मैं सब में सम्मानित हूँ। मैं हर देव का पहचान हूँ। मैं सत्यम हूँ। मैं हर सुख का अनुभव हूँ। मैं रवि के हर किरण में हूँ। मैं चन्द्रमा के भी साथ हूँ। और मैं ही अग्नि के तपन में भी हूँ। मैं सत्यम हूँ।

पहली नज़र

मैं बहक़ रहा हु संभालो जरा, मुझ पर ये कैसा असर हो रहा है। तुझे एक नज़र देखा भर है अभी तो, अभी से किसी पुरानी शराब सा नशा हो रहा है।।1।। आईने में देखा मैंने सूरत मेरी जाने कहाँ घूम है? चेहरा जो नज़र आया सामने उसमे तेरा ही नूर है। अभी खुमार मैं हु तुम्हे ऐतबार न होगा मेरी बातों पर, लेकिन सच कहता हूं मुझ पर तेरा ही सुरूर है।।2।। ***नि-3कलाल***

रिश्तों के मायने

रिश्तों के मायने यही है आज के बदलते युग और स्मार्ट फ़ोन की सच्चाई जिंदगी बदल सी गयी है आज, रिश्तों के मायने भी बदल रहे हैं, उँगलियों पर रिश्ते यहाँ कुछ इस तरह से निभाए जा रहे हैं, अपनों से दूर परायों को अपना बनाते जा रहे हैं, कुछ छिपा कर तो कुछ रिश्ते खुले आम निभाए जा रहे हैं, कोई दगा अपनों को दे रहा परदे में रह कर, बेपर्दगी की इन्तहां कुछ इस कदर बढ़ रही है, छिपाना था जिससे उससे ही बेपर्दा हुए जा रहे हैं, संग दिल अज़ीज़ के बैठ परायों की बातों पे मुस्कुरा Continue reading रिश्तों के मायने

नव वर्ष

नव वर्ष जीवन में सबके सुख-समृद्धि का वास हो नव वर्ष सच में सबके लिए खास हों। जन-जन के मन से अहंकार-बुराई का नाश हो, प्रेम बढ़े, द्वेष मिटे जीवन में शुभ्र प्रकाश हो। मधुमय जीवन हो सबका प्रेम से सुरभित श्वाँस हों, मिटे दूरियाँ आपस की मनुज-मनुज में विश्वास हों भयमुक्त जीवन हो सबका कोई भी न पाश हो, है प्रार्थना ईश से पूरी सबकी आस हो। डॉ. विवेक कुमार (c) सर्वाधिकार सुरक्षित।