बूढ़ी माँ

बूढ़ी माँ वो आँखे किसी का दीदार करने के लिए तरस रही थी।उस बूढ़ी औरत के चेहरे पर बनी झुर्रियां इस बात का संकेत कर रही थी कि उस पर बुढ़ापा हावी होते जा रहा था।अचानक एक घंटी बजती हैं और वो इस बात का संकेत कर रही थी की किसीने दरवाजे पे बहुत दिनों बाद दस्तक दी थी ।वह बूढी औरत भगवान् का नाम स्मरण करते हुए’हाय राम’ कौन हैं?कहते हुए दरवाजे की तरफ अपने दबे पैरों से बढ़ती हैं और कोमल डाली जैसे हाथों से दरवाज़े की कुंठी खोलने का प्रयास करती हैं।जैसे ही वह दरवाजा खोलती हैं Continue reading बूढ़ी माँ

ओ मेरे पुज्य पिताजी

ओ मेरे पुज्य पिताजी [दिनांक 30 अप्रैल 2017 को मेरे पूजनीय पिता जी श्री ठाकुर ईश्वर सिंह इस भू लोक को त्याग कर चले गये… जीवन में उनकी कठिन तपस्या से ही आज हम सुखद जीवन जी पा रहे हैं….] “हे ईश्वर मेरे पूजनीय पिता जी को….अपने पावन चरणों में स्थान देना….” ओ मेरे पूज्य पिता जी, कल तक मैं खुद को दुनिया का सब से बड़ा आदमी समझता था क्यों कि मेरे सिर पर तुम्हारा हाथ था…. हम नहीं जानते हम कौन हैं, पर तुम भिष्म थे, जिन्होंने हमारे घर रूपी हस्तिनापुर को चारों ओर से सुर्क्षित कर के Continue reading ओ मेरे पुज्य पिताजी

किन्नर

किन्नर वहीं चेहरा वहीं चाल-ढाल, वहीं रंग-रूप वहीं वाणी में राग। इंसान ही है हम दिखते भी इंसान, फिर क्यों हमारे संग ये परायेपन का स्वांग? ना समाज बेटी मानता हमे, ना ईश्वर ने माँ बनने का हक़ दिया। नर-नारी की इस दुनिया ने, हमेशा इस किन्नर का तिरस्कार किया।। दुआओं से मेरी उनके घर सजते है, उन घरो में खुशियो के रंग भरते है। बस उन घरो से थोडा अपनापन ही तो माँगा है हमने, क्यों हम अपनी ही पहचान को तरसते है? ना पत्नी होने का अधिकार मिला, ना किसी से सास-ससुर का प्यार मिला। नर-नारी की इस Continue reading किन्नर

जीवन हाला

जीवन हाला यों ही एक प्रयास:- टुटे हुवे प्यालो में जीवन- हाला बेबस पीने कोे बैठ गया मधुशाला बुदं बुंद तड़पाये पीने की ज्वाला अद्दाओं से भरमाये साकीवाला किस डगर जाऊं,भरूं मद प्याला बंद होने आई जीवन- मधुशाला कोई जतन बतायें,कोई मतवाला रिस रहा मधु-रस टुटा है प्याला राम नाम का रस पीले मतवाला दर दर क्यों भटके लेकर ज्वाला  

घर की याद आती है

घर की याद आती है परदेश में ऐ मेरे वतन मुझे घर की याद आती है, तीज त्योहारों पर जब काम से थका हारा आता हूँ, होली के रंगो और दीवाली के दीपों की याद सताती है। परदेश में ऐ मेरे वतन मुझे घर की याद आती है।। गलतियां जब भी होती है, डांट सुनकर खामोश रह जाता हूँ, ना भी हो गलती फिर भी जाने कितना सह जाता हूँ। सोचता हूँ मेरा मुल्क होता तो सबक सिखाता, और कुछ नही तो सलिखे से मैं भी दो बातें सुनाता।। परायेपन के एहसास में आँख भर आती है, परदेश में ऐ Continue reading घर की याद आती है

मेरा देश

मेरा देश लगता हैं मेरा देश अब शांत स्वर में बैठा हैं, कुछ न कर सकता मुहँ पर उंगली लगाये बैठा हैं, पिघल रहा हैं कश्मीर आज बारूदों के ताप से, फिर भी मेरा देश आज शीत माहौल चाहता हैं, जहाँ हर वक़्त रहती थी केशर की महक , वहाँ आज हर पल हैं बारूदों की महक, अब कश्मीर में जीना दुस्वार हो गया हैं, ये धड़कन हैं भारत की जिस पर दिल न्यौछावर हो गया हैं, जिनके ख़ातिर शहीद हुए इस देश के रक्षक, वे लोग ही बन बैठे हैं इस चमन के भक्षक, जिसका नहीं ये चमन वो Continue reading मेरा देश

पीने की आदत

पीने की आदत बेवजह रूसवाई सहने की आदत हो गई मुझ को तो यों दर्द छुपाने की आदत हो गई लोग न समझे बेवफ़ाई के दर्द की खराबी मुझे तो अब इल्जाम सुनने की आदत हो गई दिन- रात जब बेचैन होने की आदत हो गई तभी तो मयखाने में जाने की आदत हो गई लोग कहते पागल या कोई जानते शराबी ग़म को भुलाने ज़ाम छलकाने की आदत हो गई मुझे तो यों बदनाम होने की आदत हो गई कैसे कहे सजन को पीने की आदत हो गई सजन

दिल की बात

दिल की बात दिल की बात कहने को अभी न दिल ही चाहता मतलबी दिलों को दर्द सुनाना नहीं चाहता या खुदा ये दुनिया में अपना ही मुँह चुप रखें मुश्किल जो है दुसरों को देना नहीं चाहता परेशानी खुद की उन्हे कितनी उलझा रखे उन को आवाजे दे पछताना नहीं चाहता बदलते जमाने के साथ अब बदलना होगा न कोई पूछता, ना ढूँढे और नहीं चाहता ग़म बटोर संवारने लगा गया अब अकेला जज्बात बज़ार में मज़ाक बने नहीं चाहता लिख-लिख कर ‘कलम’ खूद आंसुओं से धो लेता हालात पे कुछ लिखने का बहाना ही चाहता कलम उठाइ मैंने Continue reading दिल की बात

बेवफ़ाई

बेवफ़ाई कुछ ग़म-ए-अब्र का हिसाब आए बेवफ़ाई में दर्द गज़ब आए जलते जख़्म में तड़पन भर आए तन्हा हुवे जाम- ए-शराब आए रगो मे तेज़ाब सा दौड़ जाए नशे में ग़म के माहताब आए तिरी बेवफ़ाई के अब्र छाए गोया हर सितम से रिसाव आए के तभी होश-व-हवास गंवाए साक़ी ज़ाम में आफ़ताब आए क़हर-ए-बेवफ़ा से घाव पाये सामने दस्तुर बेनक़ाब आए मन में उम्मीदों के अब्र छाए या अल्लाह हाँ में जवाब आए मेहेर- ओ- वफ़ा को तरस जाए तु सजन को याद बेहिसाब आए सजन

जज़्बात

जज़्बात उदासी में दिल को आँसु से राहत कहाँ मिले जुगनुओं से रोशन रात को रौशनी ना मिले आंखों से बरस पीड़ा का सैलाब उमड़ पड़े जज़्बातों को मिटा दे वो हमदर्द कहाँ मिले रखता दिल में महफूज़ अपने अरमान सारे कोई हमसफ़र या हमदर्द जब मुझे ना मिले हर वक़्त सभी बदगुमानी दिल पे भारी पड़े अब दर्द नहीं होता मुझे जब खूशी ना मिले आँसू को कितना समझाया बेवक्त ना झरे सजन सभी एहसासों का कभी जवाब ना मिले सजन

प्यार का मसौदा

प्यार का मसौदा तेरी चाल में बिजली की अदा है तेरी लटों का लहराना जुदा है नज़र के नशीले तीर जो चलाये गुलाबी लब पर ये दिल भी फ़िदा है देखा जो तो देखते ही रह गये चेहरा कमल फूल सा संजीदा है मुस्कुरा के तुम बर्क़ गिराते गये दिल मीठे सा दर्द से ग़मजदा है ख़ुशबू बिखेर यों आँचल फहराये चलने में किया मस्त मस्त अदा है नभ में बर्क़ जैसे चमकती जाये आशिकी में हर दिल तुम पे फिदा है हुस्न की मार ने मारा सजन तुझे ज्यों शोला भड़कता वो मसौदा है सजन

जुस्तज़ू

जुस्तज़ू प्यार से महकाए ज़िंदगी ये जुस्तजू सदा रहे दुआ करे हर दिल अज़ीज़ हो पाए इरादा रहे दिल में ये तमन्ना रहे हर किसी से प्यार मिले दर्द का समंदर पी मुस्कुराए ऐसा वादा रहे इन्सान बने जैसे इन्सानियत का नतीज़ा मिले ज़रूरी है जो कमी रही मिटाने संजीदा रहे जुस्तजू है तनहाई की क़ैद से रिहाई मिले भरना है हर दिल का जख़्म कोई न ग़मजदा रहे मुमकिन कर के सारे रिश्तों को भी रोशन कर ले बच्चों से प्यार करे और बड़ों को सजदा रहे दुनिया की भीड़ में अकसर चेहरे गुम होते मिले रखनी अगर पहचान Continue reading जुस्तज़ू

बचपन

बचपन बचपन की वह शरारत वह जमाना याद आता है खूब वारिश में भिगना नाहना याद आता है दौड़ा भागी खेल कुद और कितनी कितनी यादें काग़ज की कस्ती बनाकर बहाना याद आता है बचपन की वह बाहदुरी ना जाने कहाँ खो गई कभी छत की मुंडेर पर पांव चलाना याद आता है बचपन की वह दिलेरी ना जाने अब कहाँ खो गई टिफिन बक्स से दोस्त को खिलाना याद आता है बचपन की वह बात सारी न जाने कहाँ खो गई मित्र के दुख में आंसु निकल जाना याद आता है न जाने क्यों सजन को अब बचपन बहुत Continue reading बचपन

एहसास प्यार का

एहसास प्यार का बहार छाई तेरे इकरार में हसीन लगते नज़ारे प्यार में भूला गए लाखों गम संसार के तेरे ही प्यार के इज़हार में सपने देखते रहते मिलन के वक्त नागवार है इन्तजार में गुज़ारे जिंदगी यों हँस खेल के टुटे न अपना रिश्ता मझधार में ख्वाब है छोटी सी ज़िन्दगी के ना जा पाये ग़म के अधिकार में हक़ीकत पाए सपने बिश्वास के समय ना बीते किसी तक़रार में साथ जीए मरे सभी को जता के सजन सदा ही इतराय प्यार में सजन