गीत बनाकर हर गम को मैं गा लूँगा

गीत बनाकर हर गम को मैं गा लूँगा तार-तार दिल में भी मैं स्वर सजा लूँगा। तू नफरत भी ना कर पावेगा मुझसे प्यार के हर बोल से तुझे रिझा लूँगा। राह पर इन बिखरे सारे पत्थरों को चूम चूमकर मैं अब खुदा बना लूँगा। आँसुओं से भिंगोकर हरेक काँटे को बाग में खिलते फूलों-सा बना लूँगा। मंदिर से बाहर तू क्यूँकर भटकेगा आ दिल में मेरे मैं अपना बना लूँगा।                भूपेन्द्र कुमार दवे 00000

जिन्दगी और मौत

जिन्दगी और मौत मौत से पूछ तो लो कि कब कहाँ ले जावेगी इस अपाहिज जिन्दगी को कैसे ले जायेगी। एक बार तो वाह जरूर इस तरफ आवेगी बटोरकर पुरानी यादें नई दे जावेगी। इन पलकों ने लरजते अश्क रखें है जनम से नमालूम कब तक ये इन्हें यूँ सहलायेगी। न जाने कहाँ ये तूफॉन उड़ा ले जावेगा और कौन सी लहर उस किनारे ले जायेगी। जीवन कब बिगड़ जावेगा, कब सँवर जावेगा नमालूम ये मौत यहाँ कब क्या कर जायेगी। जिन्दगी! अब तू इस मौत के खौफ की ना सोच सहेली है यह तेरी प्यार से ले जायेगी। …. Continue reading जिन्दगी और मौत