ग़ज़ल

रिश्तों के टूटे हुए धागों को जोड़ने की कोई बात करें दर्पण के बिखरे टुकड़ों को जोड़ने की कोई बात करें जिन जंजीरों में होकर क़ैद तड़पे थे दो दिल कभी उन जंग लगी जंजीरों को तोड़ने की कोई बात करें सागर की तूफानी लहरों ने डुबाई थी कश्ती हमारी आज उन लहरों के रुख को मोड़ने की कोई बात करें माँ के जिस आँचल का साया रहा सदा सर पर हमारे आओ उस पवित्र आँचल को ओढ़ने की कोई बात करें भीड़ में जिन यारों ने छोड़ा था साथ हमारा ‘एकांत’ ऐसे मतलबी भेड़ियों को छोड़ने की कोई बात Continue reading ग़ज़ल

ख्वाब जो टूट कर बिखर गए

तुझसे मिलने के बाद मेरे दिल की धड़कनों में सपनों के नन्हे बीज अंकुरित होने लगे हर क्षण इन हसीन सपनों में कुछ नए सपने जन्म लेने लगे, इन सपनों को सदा अपने दिल से लगाए रखता सपने खिलने लगे, कोपलें आने लगी मैं उनकी खिलने की छटपटाहट महसूस करता उन सपनों में मुझे बस तेरी ही तस्वीर दिखती जैसे हर सपना तेरे ही दिल की धड़कन हो जब कोई सपना रोता, जैसे तू रो रही हो जब कोई सपना मुस्कुराता, जैसे तू मुस्कुरा रही हो जब कोई सपना सिसकता, जैसे तू सिसक रही हो जब कोई सपना अंगड़ाई लेता, Continue reading ख्वाब जो टूट कर बिखर गए

मजाक एक हद तक

हम दूजे का मजाक तो पलभर में बना देते है l किंतु स्वयं वो मजाक सहन नहीं कर पाते है ll मजाक करने से पहले सहने की आदत डाले l मजाक ऐसा हो जो दिल में ना चुभोये भाले ll बाणो से लगे घाव तो कुछ दिन में भर जाते है l किंतु कहे कड़वे शब्द दिल को छलनी कर जाते है ll खुश रहने के लिए थोड़ा बहुत मजाक अच्छा है l किंतु मजाक, मजाक ही रहे बस यही अच्छा है ll मजाक करते समय अपनी जुबान पर लगाम रखे l मजाक में हमेशा दूजे की भावना का ध्यान Continue reading मजाक एक हद तक

म्हारो प्यारो राजस्थान

म्हारो प्यारो राजस्थान ***************** लागे हिवड़ा सूं भी प्यारो ओ रेतां के धोरा वालो ओ उंटा के डेरा वालो रंग रंगीलो राजस्थान घणो रसिलो राजस्थान गोडावण का जोड़ा वालो चिंकारा का जोड़ा वालो जान सूं प्यारो राजस्थान लागे रूपालों राजस्थान ऊंचा ऊंचा परबत वालो डूंगर लागे प्यारो प्यारो यो रजपूता रो राजस्थान यो घूमर वालो राजस्थान खेजड़ली की छाया वालो चम्बल नद के बीहड़ वालो ओ म्हारो न्यारो राजस्थान ओ रंग रंगीलो राजस्थान राणा प्रताप की जय वालो चेतक की यो गाथा वालो चंदन के बलिदान वालो पन्ना की स्वामिभक्ति वालो म्हारो प्यारो राजस्थान ओ रंग रंगीलो राजस्थान तीज और Continue reading म्हारो प्यारो राजस्थान

विकसित हिंदुस्तान

विकसित हिंदुस्तान **************** आओ विकसित देश बनाएँ विज़न दो हज़ार बीस अपनाएं सुंदर प्रकृति को हम बचाएं गीत खुशी के मिलकर गाएँ मरुस्थल के हम शूल हटाएँ श्रम कर हम अन्न उपजाएँ हरियाली चहुँ ओर फैलाएं रंग बिरंगे सुमन खिलाएँ सागर को भी लांघ जाएं प्रगति पथ पर बढ़ते जाएं अपना हुनर भी दिखाएं विकसित हिंदुस्तान बनाएं देश में प्रोधोगिकी बढ़ाएं और प्रक्षेपण यान बनाएँ तकनीकी हम ज्ञान सिखाएं मन से अंधविश्वास मिटाएँ निष्काम कर्म नित करते जाएँ अर्जुन सा एक लक्ष्य बनाएँ अवसादों से कभीे न घबराएं आशाओं के फूल खिलाएं देश हित मिल कदम बढ़ाएं वन्दे मातरम गान Continue reading विकसित हिंदुस्तान

कुछ बात तो है तेरी हर बात में।

सहमा-सहमा ये नीला आसमां, सिसकती है क्यों ये मासूम जमीं। घिर आती है जब श्यामल घटा, उतरती है क्यों तेरी आँखों में नमीं। देख मासूमियत तेरे चेहरे की, हिमालय भी हुआ जाता घायल। बहकती है जब मादक पुरवाई, झनकती क्यों नहीं तेरी पायल। सावन की मधुशाला से झरता जब, नाजुक यौवन बन कर बूँद-बूँद। मदहोशी में बेक़रार कुदरत भी, करती रसपान आंखें मूँद-मूँद। ठिठुरता है बावला सन्नाटा भी, थिरकती जब तू चांदनी रात में। गति थम जाती है चाँद-सूरज की, कुछ बात तो है तेरी हर बात में। (किशन नेगी)

ख्वाब का एक टुकड़ा

ख्वाब एक देखा मैंने बनकर जब एक ख्वाब मेरे ख्वाबों में आई तुम चुराकर गुलाबी निंदिया मोरी उड़ चली ख्वाबों के नीले आसमां में दफनाकर अधूरे ख्वाबों को संवेदन-शून्य निंदिया के सिरहाने मैं भी उड़ चला करके अनुसरण तेरी धुंधली परछाई का देखा मैंने कि तुम थी सवार ख्वाबों के चांदनी रथ पर सजाकर सुनहले पंख अपनी बाहों में और उड़ रही थी उन्मुक्त गगन में संग तेरे खवाबों की बारात थी कुछ ख्वाब गुलाबी, कुछ नीले कुछ असमानी, कुछ बैंगनी अचानक टुकड़ा एक ख्वाब का गिरा जमीं पर टकराकर मुझसे और खुल गई मेरी व्याकुल आंखें टूट गई थी Continue reading ख्वाब का एक टुकड़ा

क्यों उजाड़ी ख्वाबों की दुनियां

ख्वाबों में जब तुम आई गोरी बिजली चमक कर गिर पड़ी ख्वाब सारे दफ़न हुए जल कर बरसने लगी अंगारों की झड़ी कुछ ख्वाब जो जिन्दा थे अभी टूट गई उनकी नाजुक कड़ी जलकर ख़ाक हुए अरमान सभी ख्वाबों ने देखी वह अशुभ घड़ी दहकी थी ज्वाला तेरे हुस्न की तुम मुस्कुरा रही थी वहीं खड़ी यौवन के गुमान में भटकी थी थामे हाथ में अहंकार की छड़ी जिन ख्वाबों ने था तराशा तुझे उन्हीं ख्वाबों से क्यों तू लड़ी हुस्न की आग में जलाया उनको जिन ख्वाबों संग तू पली बड़ी उतरेगी जब यौवन की ख़ुमारी याद करोगी तब Continue reading क्यों उजाड़ी ख्वाबों की दुनियां

क्या नाम दूँ में उस ख्वाब को

मेरे ख्वाबों में ख्वाब बनकर क्यों ख्वाब मुझे दिखाती हो फिर टूटे ख्वाबों को जोड़कर एक नया ख्वाब रचाती हो रंगीन ख्वाबों की दुनियां से कुछ ख्वाब चुन कर लाती हो आँचल में समेट इन ख्वाबों को फिर गीत कोई नया गाती हो असमानी ख्वाबों के झुरमुट से अजनबी ख्वाब बन शरमाती हो फिर दिखाकर कोई नया ख्वाब मासूम ख़्वाबों को भरमाती हो बटोरकर तिनके टूटे ख़्वाबों के ख्वाब बन कर कहाँ उड़ जाती हो देख बेचैनी इन कोमल खवाबों की फिर टूटे ख़्वाबों से जुड़ जाती हो कभी ख़्वाबों के नाजुक दिलों की धड़कन बन कर बहकती हो कभी Continue reading क्या नाम दूँ में उस ख्वाब को

मुसाफिर! ख्वाब कोई नया चुन

जिन्दगी के लम्बे सफर में मुसाफिर, फिर से ख्वाब कोई रुपहला चुन। संवार कर अपने ख्वाबों के टूटे तार, रच ले ख्वाबों की कोई सुरीली धुन। मंडराए जब अँधेरा तेरे कर्मपथ पर, रुक कर मासूम ख्वाबों की भी सुन। जोड़ कर टूटे धागे बिखरे ख्वाबों के, रेशमी धागों से ख्वाब कोई नया बुन। दुर्गम डगर में ललकारे जब शत्रु तुझे, कर्मों के अग्निकुंड में तू उसको भुन। दीमक बन जो करे धीमी तेरी चाल, उमंग के पसीने से मिटादे सारे घुन। मुसाफिर! मंज़िल तेरी राह ताकती, ख्वाबों में से कोई ख्वाब दिव्य चुन। (किशन नेगी ‘एकांत’)

नववर्ष! तेरा अभिनंदन

🙈🙉🙊 2018 की हार्दिक शुभकामनाएं… . कल पुराना साल डूबा था, कल किसी का मन ऊबा था, कल रुदन-सा चेहरा था। धूप से मौसम जला क्या? कष्ट जो भी था टला क्या? आज हँसकर चाँद चला क्या? बदली में विलुप्त क्रंदन नववर्ष! तेरा अभिनंदन . रंग-बिरंगी दुनिया लिखें, आप भी सीखो हम भी सीखें, जीने के कुछ तौर-तरीकें। खट्टी-मिठी यादें लेकर, हाथों में कुछ प्यादें लेकर, झूठे-सच्चे वादें लेकर। सपने बुन रहे हैं नूतन नववर्ष! तेरा अभिनंदन 👏👏👏👏👏… @सत्येन्द्र गोविन्द :-8051804177

एक अजनबी मुसाफिर

ख्वाब एक अजनबी चलता है कभी-कभी मेरी परछाई संग मगर देखा नहीं उसे आज तक ना ही छुवा है उसे कभी मगर अहसास अक्सर होता है जैसे मेरे आस-पास ही है ना कोई आकार उसका ना कोई स्वरुप उसका उसका कोमल स्पर्श अक्सर गुदगुदाता है कभी मेरे दिल की धड़कनों को कभी मेरी गर्म साँसों को अनजान होते हुए भी ये अजनबी ख्वाब जैसे ढूंढ रहा अपने अतीत की यादों को मेरे बावले मन केअल्हड़पन में कभी थाम लेता हाथ मेरा कभी चूम लेता माथा मेरा फिर चुपके से भाप बनकर छुप जाता है नील गगन के आँचल में कभी Continue reading एक अजनबी मुसाफिर

नववर्ष 2018 की शुभकामनाये

गया दिसंबर आई जनवरी l लेकर फिर एक नया साल ll खुशियों से भर जाये झोली l ना रहे कोई भी फटे-हाल ll ना सोये कभी कोई भूखा l ना किसी को दुःख सताये ll आने वाला ये नया साल l चेहरों पर मुस्कान लाये ll सपने हो जाये सभी के पूरे l मंजिल सभी को मिल जाये ll भूल जाये सब नफ़रत करना l चहुँ और प्यार ही प्यार छायेll ईश्वर करे जीवन में तुम्हारे l आशा की किरण जगमगाये ll आपको व आपके परिवार को l नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाये ll —————-

सत्य का ज्ञान

सत्य का ज्ञान सिर्फ दो ही जग़ह हो पाता है l जब इंसान अस्पताल या श्मशान जाता है ll किसी इंसान का दर्द वो तभी समझ पाता है l जब उसे या उसके अपने को दर्द सताता है ll अपनी बीमारी देख, हम परेशान से हो जाते है l अपने आगे दूजे का दुःख, समझ नहीं पाते है ll किन्तु एक बार जब हम अस्पताल पहुंच जाते है l सभी को दुखी देख, अपना दुःख ही भूल जाते है ll श्मशान घाट जाते ही हमारी सोच बदल जाती है l सुलगती हुए चिता के आगे सच्चाई नज़र आती हैll सोचते Continue reading सत्य का ज्ञान

सिर्फ हादसा?

सिर्फ हादसा…? हँसती खेलती एक ज़िन्दगी, शाम ढलते ऑफिस से निकलकर, है दिल्ली की सड़क पर …,, ओवरटाइम से… सुनहरे सपने को जोड़ती, घरपर मोबाइल से कहेती, बस, मम्मी अभी आयी… आज टेक्षीयाँ भी भरी हुई, और…खाली है उसे रुकना नहीं, अपनी फिक्र में दौड़ता शहर, चकाचौंध रौशनी…!! तेजी से एक शैतानी कार थोड़ी रुकी, …और खींचकर उड़ा ले गयी कँवारी हसरतें..मासूमियत… वो जीने की तमन्ना, पीछे सड़क पर पड़ा मोबाइल,पर्स कराहता रहा… चीखे हॉर्न से टकराकर बिखरती रही… सड़क के मोड़ पर ज़िन्दगी को ध्वस्त करके फेंक दिया… थोड़ी ज़ुकी आँखों की भिड़ ने एक ज़िंदा लाश को घर Continue reading सिर्फ हादसा?