आलोचना

मज़ा आता है, दूजे की बुराई में l ये दिल बाग़-बाग़ हो जाता है ll औरो के लिए समय हो न हो l इसके लिए समय निकल जाता है ll बेशक लाख कमियाँ हो अपने में l वो कभी किसी को नज़र नहीं आती ll दूजे की एक कमी को पाकर l बार-बार उंगलियों पर गिनी जाती ll जितना समय लगाते है बुराई में l यदि वो समय अच्छाई में लगाये ll इससे अपनी कमियाँ भी दूर होंगी l1 और शायद दूजे को अपनापन दे पाये ll समय किसी के रोके नहीं रूकता l फिर बुराई में क्यों समय गवाना Continue reading आलोचना

मान-सम्मान

पैसा हो तो अनपढ़ भी, बन जाता समझदार l बिन पैसो के पढ़ा-लिखा भी,कहलाता गवार ll पैसो वालो के आगे-पीछे, भागे-भागे दौड़े l गरीब सामने आ जाये तो, अपनी नज़रे मोड़े ll मुँह देखकर होते है टीके, पूछ उन्ही की होती है l जिनके पास पैसा होता है, उनकी वाह-वाह होती है ll पैसो वालो की गलती पर, पर्दा डाला जाता l गरीब करे तो उसी बात को, खूब उछाला जाता ll जानते है कोई किसी को, कुछ नहीं दे जाता l फिर क्यों पैसे की चमक में,ये इंसा खो जाता ll सबकी है अपनी एक इज्जत, सबका अपना ईमान Continue reading मान-सम्मान

माँ

शुरूआत तुम्हीं से अन्त मेरा है तुमसे ही मां हर स्वप्न. मेरा है मन का उजाला मां तुमसे ही रात अन्धेरी तुमसे ही है। तुमने मुझको दिया है जीवन माँ तुमने चलना सिखलाया है दी तुमने मां मुझे पेरणा सच्चाई रहने की आगे हरदम बढते रहना और कर्मठ बनने की। याद आता है बहुत मां रुठ कर मनवाना, ,रुठ कर फिर मां तुम्हारे हाथों से ही खाना । शुरूआत तुम्हीं से अन्त मेरा है मां तुमसे जीवन मिला है। मै ये ऋण ना चुका पाउगां पर तुममें देखे है जो सपने मै उनको साकार बनाउगा । शुरूआत तुम्हीं से अन्त Continue reading माँ

ना मै भूलुगा ना तुम

वादा है मेरा पर तुम भी निभाना ।। ना मै भूलुगा ना तुम भूल जाना । फासलें भी बहुत होगें और प्यार भी.. अपने नाजुक से रिस्ते मे ये बिछड़ने का रिवाज भी । गम ना करना पगली तुम सदा मुस्कुराना.. मेरी तकदीर ही ऐसी है। अब इसपर क्या पछताना ।। वादा है मेरा पर तुम भी निभाना । ना मै भूलुगा ना तुम भूल जाना ।।

फूल बरसे, शबनम या मोती सब एक सा लगता है

फूल बरसे, शबनम या मोती  सब एक सा लगता है   फूल बरसे, शबनम या मोती सब एक-सा लगता है इस दिल पे जो भी बरसता है पत्थर-सा लगता है।   गम सावन है न भादों है, मौसम है न आबोहवा जब भी बरसे है तो बेमौसम बारिश-सा लगता है।   इक गम की कतरनें हों तो जोड़कर समझ लेते यहाँ कई गम की कतरनों का अंबार-सा लगता है।   गम के साये में फुदक-फुदककर चलके आये हैं अब यूँ जीना भी बच्चों के खेल-सा लगता है।   गम तो खरीदा, न ही कभी बेचा जा सकता है पर इनका Continue reading फूल बरसे, शबनम या मोती सब एक सा लगता है

मेरी जिन्दगी, मेरी नहीं, तेरी जिन्दगी का हिस्सा तो है

मेरी जिन्दगी, मेरी नहीं, तेरी जिन्दगी का हिस्सा तो है मेरी जिन्दगी, मेरी नहीं, तेरी जिन्दगी का हिस्सा तो है तेरी नमपलकों में दुबका अश्क का इक कतरा तो है। माना कि हजार जुगनुओं से उजाला नहीं होता पर हर याद की कतरन में छिपा कुछ उजाला तो है। पतझर की कहानियाँ पढ़ते पढ़ते सोचता हूँ हर किस्से में दिल मेरा खड़ाखड़ाता तो है। वह कहता नहीं, गूंगा भी नहीं है दिल मगर आँखों से ही बहुत बातें बेचारा करता तो है। इस राह पर बिछे काँटे अंगारे न हटावो इन्हीं की बदौलत दिल इसे पहचानता तो है। —- भूपेन्द्र Continue reading मेरी जिन्दगी, मेरी नहीं, तेरी जिन्दगी का हिस्सा तो है

नव वर्ष 2016 की शुभकामना

नई उम्मीद,नया सवेरा लाया l देखो नया साल 2016 आया ll खुशियो की सौगात ये लाया l देखो नया साल 2016 आया ll कैलेंडर बदले, तारीख बदली बदल गया फिर ये साल l ईश्वर से है हमारी यही प्रार्थना ना रहे कोई भूखा,ना रहे फटेहाल ll पाप,द्वेष,घृणा को मन से मिटाओ l भेदभाव की दीवार गिराकर प्रेम से सबको गले लगाओ ll आओ सब मिलकर आज प्रतिज्ञा उठाए l भ्रष्टाचार को हम सब जड़ से मिटाये ll हमारी ये कोशिश ही नया सवेरा लाएगी l तभी रोते चेहरों पर मुस्कुराहट आएगी ll बीते हुए साल को देते है हम विदाई Continue reading नव वर्ष 2016 की शुभकामना

बड़े बुज़ूर्ग जब आएं

खुद ही खुद की नज़र में जब बड़ा हो जाना तो बीच दरियां में जाकर खड़ा हो जाना ======================== तुम्हे जब ये लगे दुनिया तुम्हारी इज्जत करती है किसी चुनाव में बस एक बार खड़ा हो जाना ========================= बड़े बुज़ूर्ग जब आएं तो कुर्सी पकड़ के मत बैठो तुम्हारी अदब होनी चाहिए खड़ा हो जाना ========================= ये जवानी का लिबास उतार कर फेंक दो कहीं तज़ूर्बे के लिए जरुरी है बूढ़ा हो जाना ========================== आफ़त है गरीबी उस पर ये मँहंगाई लाज़िमी है उसका चिड़चिड़ा हो जाना ========================== क्यों पूछती हो,माँ से इतनी लगाव क्यों है,मत पूछो ये सवाल तब Continue reading बड़े बुज़ूर्ग जब आएं

मैं तुमको याद किया करता हूँ

मैं तुमको याद किया करता हूँ।।   जब सागर पर किश्ती होती ऊँची  ऊँची  लहरें  उठती और  दूर से  आँधी आकर उसे निगलने  खूब मचलती   बैठ किनारे बाट जोहता वह मैं हूँ या हो मेरा अपना कोई तब तुमको याद किया करता हूँ।।   जब जर-जर कुटिया के अंदर प्यारा  नन्हा  सोया  हो  तो बाहर  भीड़ लगी हो  जिसके भीतर  सब  कुछ  जलता हो   लौट रहा हो उस कुटिया में वह मैं हूँ या हो मेरा अपना कोई तब तुमको याद किया करता हूँ।।   लाशें लाखों  सड़कों  पर हों चहूँ ओर  बस  सन्नाटा  हो उन चिथड़ों को Continue reading मैं तुमको याद किया करता हूँ

शायद मैं भी गा पाऊँगा

शायद मैं भी गा पाऊँगा शायद मैं भी गा पाऊँगा तेरे सुर में, अपनी धुन में   पंखहीन बुलबुल के खातिर बिखरे तिनके नीड़ बनावें सारे काँटे डाल डाल के जब फूलों की महक उड़ावें   आँधी भी आने के पहले नाविक को तट पर ले जावें   शायद तब ही गा पाऊँगा तेरे सुर में, अपनी धुन में   जब जब आँसू ओस बूंद से उषा किरण में मुस्कायेंगे और वेदना जीवन भर की कुछ आँसू ही पी जावेंगे   और लहर की गोदी पाकर हौले से हम तर जावेंगे   शायद तब ही गा पाऊँगा तेरे सुर में, Continue reading शायद मैं भी गा पाऊँगा

जंगल की स्कूल

जंगल की स्कूल — बाल गीत किसी शहर से बंदर पढ़कर जब जंगल में आया तब  उसने आँगन में अपने एक स्कूल खुलवाया   सारे  पक्षी]  सारे  बच्चे दौड़ दौड़ कर आये पीपल के पत्तों पर लिखने पेन साथ  भी लाये   भरी क्लास में तब बंदर ने अपनी पोथी खोली शोर मचाया  सब बच्चों ने बोली अपनी बोली   मुर्गे के  पंखों को गिनकर गणित समझ में आयी तोते से नित रटना सीखा भाषा   सुन्दर  पायी   जग भर का इतिहास बताने टिड्डीदल उड़ आया भूगोल  पढ़ाने   हाथी  भी पृथ्वी  बनकर आया   विज्ञान की बातें करने तब चिम्पेंजी Continue reading जंगल की स्कूल

देश हमारा वतन हमारा (बालगीत)

देश हमारा वतन हमारा (बालगीत) देश हमारा, वतन हमारा सारे  जग  में अच्छा है बाग हमारा, चमन हमारा सारे  जग  में महका है।   ऊँची   ऊँची  पर्वतमाला कलकल बहती  नदियाँ हैं सागर की लहरों से उठती मस्त हवा की  खुशियाँ हैं पेड़ों की  शाखों पर गाती तरह तरह  की चिड़ियाँ हैं प्रकृति ही खुद बता रही है वतन  हमारा  न्यारा   है देश हमारा,  वतन  हमारा   सारे  जग  में  अच्छा  है बाग हमारा,  चमन हमारा सारे  जग  में  महका है।     गंगा जमुना  की यह धरती स्वर्ग   सरीखी  लगती  है नर्मदा  की   धारा  सुन्दर सरल  सलोनी  लगती  है हर Continue reading देश हमारा वतन हमारा (बालगीत)

मत बनो ज्वालामुखी, लावा न उगलो शान से

मत बनो ज्वालामुखी, लावा न उगलो शान से बन हिमालय-सा अडिग  गंगा बहावो शान से।   मत कहो आकाश से कुहरा घना करता चले हर सुबह  सूरज हमारा  ऊगने दो शान से।   मत गिनो दरख्त  जो  ठूँठ से अकड़े खड़े हैं इक हरा दिखे परिंदों उसको सजावो शान से।   मत चुनो  अल्फाज जो शर्मसार सबको करें बोल जो प्यारे लगें, उन्हीं को बोलो शान से।   मत बनो गूँगे  इस बहरे  जगत के सामने यह वक्त की आवाज है गूँजने दो शान से। (भूपेन्द्र कुमार दवे)   00000

पंख खोले उड़ान तो ऊँची भरनी चाहिये

पंख  खोले  उड़ान तो  ऊँची  भरनी चाहिये पर धरा पर नीड़ की भी लाज रखनी चाहिये।   बोल के लब अब आजाद हैं  अपने देश में हर जुबां से हर वक्त गंगा निकलनी चाहिये।   जहर उगलने लगे, सुलगाने आग नफरत की जब चले ऐसी जुबां तो  वह कतरनी चाहिये।   पाक हो मकसद पर कोषिश यह करनी चाहिये पाक हो  जो राह  वही राह  पकड़नी चाहिये।   कुछ नहीं बस उड़ती चिन्गारियाँ दिखती बहुत हैं अब तो किसी दीप से  रोशनी निकलनी चाहिये। (भूपेन्द्र कुमार दवे) 00000

लिखता हूँ उसका होकर

दिल के टूटन की बात सुनो,वो खुश तो हैं तनहा होकर, मिलते हैं जो मुस्का कर वो,कुछ हँस कर कुछ रो कर। यहाँ नींद भी आती है तो,सपनो में आ जाते हैं वो, यही तो हमने पाया है अब,प्यार में उनके खुद खोकर। चन्द कमाई मेरे दिल की,जो अब शायद आज लुटाता हूँ, वाह कमाता हूँ हरदम,जब लिखता हूँ उसका होकर। बाजारों में मोल नहीं अब,कल महफ़िल में ये पाया हमने, खरीद हमें वो ले जाए और,मिट जाएँ हम खुद बिककर। एक यही आस है आज हमारी,वो सोया करेंगे चांदनी में, चाँद निहारेगा वहाँ दूर से,और देखेंगे हम पास में Continue reading लिखता हूँ उसका होकर