इंसान की कीमत

इंसान की कीमत यहाँ  इंसान को  नहीं, पैसे को पूजा जाता है l पैसों से  ही यहाँ  इंसान  को  आक़ा जाता है ll बिन पैसों के इंसान की कीमत कुछ भी नहीं l जीता है जिंदगी पर घुट – घुट के ज़ी पाता हैll यहाँ इंसान को  नहीं पत्थर  को पूजा जाता है l भूखे को नहीं पत्थर को भोग लगाया जाता है ll जहाँ गरीब की  शादी  में देने में हाथ खिंचते है l वही पत्थर पर पैसे और जेवर चढ़ाया जाता है ll यहाँ पालतू कुत्ते को ज्यादा प्यार किया जाता है l इंसान से  ज्यादा कुत्ते  से Continue reading इंसान की कीमत

परिश्रम -सफलता की कुँजी

परिश्रम -सफलता की कुँजी सपने  तभी  पूरे हो पाते है l जब परिश्रम किये जाते है ll बिन परिश्रम कोई भी इंसा l सफल कभी नहीं हो पाते हैll एक   नन्ही  सी  चींटी  कैसे l दाना – दाना  करके  लाती  हैll थक  जाये  पर  हार  ना  माने l परिश्रम हमें करना सिखाती है ll ची – ची  करती  चिड़िया रानी l तिनके जोड़ खोसला बनाती है ll हवा में तिनके बिखर भी जाये l फिर कोशिश करना सिखाती है ll आलस  से  ना  हो  पूरे  सपने l सपने ,  सपने  ही  रह जायेंगे ll परिश्रम है सफलता की कुंजी Continue reading परिश्रम -सफलता की कुँजी

मैं सत्यम हूँ।

मैं सत्यम हूँ। मैं विश्व में सम्पूर्ण हूँ। मैं हर मनुष्य का आधार हूँ। मैं खुद में ही विस्तार हूँ। मैं निराकार हूँ। मैं सत्यम हूँ। मैं हर समस्या का समाधान हूँ। मैं असत्य का विनाश हूँ। मैं सब में सम्मानित हूँ। मैं हर देव का पहचान हूँ। मैं सत्यम हूँ। मैं हर सुख का अनुभव हूँ। मैं रवि के हर किरण में हूँ। मैं चन्द्रमा के भी साथ हूँ। और मैं ही अग्नि के तपन में भी हूँ। मैं सत्यम हूँ।

पहली नज़र

मैं बहक़ रहा हु संभालो जरा, मुझ पर ये कैसा असर हो रहा है। तुझे एक नज़र देखा भर है अभी तो, अभी से किसी पुरानी शराब सा नशा हो रहा है।।1।। आईने में देखा मैंने सूरत मेरी जाने कहाँ घूम है? चेहरा जो नज़र आया सामने उसमे तेरा ही नूर है। अभी खुमार मैं हु तुम्हे ऐतबार न होगा मेरी बातों पर, लेकिन सच कहता हूं मुझ पर तेरा ही सुरूर है।।2।। ***नि-3कलाल***

रिश्तों के मायने

रिश्तों के मायने यही है आज के बदलते युग और स्मार्ट फ़ोन की सच्चाई जिंदगी बदल सी गयी है आज, रिश्तों के मायने भी बदल रहे हैं, उँगलियों पर रिश्ते यहाँ कुछ इस तरह से निभाए जा रहे हैं, अपनों से दूर परायों को अपना बनाते जा रहे हैं, कुछ छिपा कर तो कुछ रिश्ते खुले आम निभाए जा रहे हैं, कोई दगा अपनों को दे रहा परदे में रह कर, बेपर्दगी की इन्तहां कुछ इस कदर बढ़ रही है, छिपाना था जिससे उससे ही बेपर्दा हुए जा रहे हैं, संग दिल अज़ीज़ के बैठ परायों की बातों पे मुस्कुरा Continue reading रिश्तों के मायने

नव वर्ष

नव वर्ष जीवन में सबके सुख-समृद्धि का वास हो नव वर्ष सच में सबके लिए खास हों। जन-जन के मन से अहंकार-बुराई का नाश हो, प्रेम बढ़े, द्वेष मिटे जीवन में शुभ्र प्रकाश हो। मधुमय जीवन हो सबका प्रेम से सुरभित श्वाँस हों, मिटे दूरियाँ आपस की मनुज-मनुज में विश्वास हों भयमुक्त जीवन हो सबका कोई भी न पाश हो, है प्रार्थना ईश से पूरी सबकी आस हो। डॉ. विवेक कुमार (c) सर्वाधिकार सुरक्षित।

मैं बस इक लरजता आँसू हूँ

मैं बस इक लरजता आँसू हूँ मैं बस इक लरजता आँसू हूँ जब चाहो कहीं भी लुढ़का दो। जी चाहे मिला दो मिट्टी में या पी के इसे मन बहला लो। हूँ गम का सहारा पलकों में हर दिल का सहारा सदमों में पलकों में रहूँ या सीने में गिरता हूँ सदा मैं कदमों में चाहो अगर तो निज आँचल से पोंछ अभी इसे तुम अपना लो। मैं बस इक लरजता आँसू हूँ जब चाहो कहीं भी लुढ़का दो। मेरी कहानी बस है इतनी होती है जितनी मुहब्बत की दो पल जो ठहरकर नजरों में लिख जाये दिल में मुहब्बत Continue reading मैं बस इक लरजता आँसू हूँ

सिंधु सरस्वती घाटी की सभ्यता

सिंधु सरस्वती घाटी की सभ्यता सभ्यताएं जन्म लेती हैं उत्कर्ष पर आती हैं और फिर विलुप्त हो जाती हैं कुछ सिल्ला, माया, एस्ट्राकोंस, नोक, सैंजिंगडुई की सभ्यता मानिन्द तेज गुजरती रेलगाड़ी की तरह, पर्याप्त गुंज के साथ धङधङा कर गुजर जाती हैं तो कुछ रोम, यूनान, चीन, मैसोपोटामिया, मिस्र और सिन्धु घाटी की सभ्यताओं की तरह, चुपचाप हजारों वर्षों के सफर में तराशती हैं शैल को नदी के किनारों की तरह….. अनेक सिद्धांत हैं जो अलग अलग सभ्यताओं को पुरातन सिद्ध करते हैं परन्तु प्रथम उत्सुकता तो यह है कि, सभ्यता कहा किसे जाये? क्या गुफाओं में अस्तित्व की लड़ाई Continue reading सिंधु सरस्वती घाटी की सभ्यता

साल नया

साल नया अतीत भया जो बीत गया, कल पुराना था साल, आज नया, किसी को दर्द बेपनाह, ख़ुशी को असीम दे गया, अपनों से जुदा कोई तो किसी को साथ मिला नया, खट्टी और मीठी यादों का फिर एक गुजर दूर गया, फिर सुबह सूरज एक किरण नयी संग, जग गया, भोर नयी थी रात ढले, फिर भी पुराना है सब यहाँ, एक दिन के अंतराल पर कहते हैं क्यों फिर, हो सबको मुबारक ये साल नया॥

नववर्ष 2017 की शुभकामनायें

नववर्ष 2017 की शुभकामनायें गया दिसम्बर आया जनवरी लेकर नया साल l हम वो गलती सुधारे जो हुई थी पिछले साल ll बदली तारीख,बदला महीना, फिर बदला साल l डिजिटल इंडिया अपनाये बदलेगा देश का हाल ll हर नए पल के साथ हम कुछ नया कर दिखाए l ईर्ष्या ,बैर भुलाकर सबको प्यार से गले लगाए ll नए साल की खुशियाँ हममें नई उमंग जगाती है l मेहनत व ईमानदारी से आगे बढ़ना सिखाती है ll बीते वर्ष सुखः दुःख के भवर में नैय्या डगमगाई l भूल जाओ पुरानी बातें अब नई सोच जगमगाई ll माना नोटबंदी से  आम जनता Continue reading नववर्ष 2017 की शुभकामनायें

तुझे अंबे कहू या दुर्गा

तुझे अंबे कहू या दुर्गा तुझे अंबे कहू या दुर्गा, तू काली है या महामाया l दुःख दूर करो महारानी , मैं तेरे ही दर पे आया ll तुझे अंबे कहू या दुर्गा, तू काली …………………….. मुझे दुःख ने आज है घेरा ,मेरे चारों तरफ अँधेरा l मेरी  नैय्या  पार लगा दो ,  मैं बच्चा हूँ माँ तेरा ll तू  संकट  हरने  वाली , मेरी जगदंबे  महामाया l दुःख दूर करो महारानी , मैं तेरे ही दर पे आया ll तुझे अंबे कहू या दुर्गा, तू काली ………………… तेरा भक्त्त हूँ मैं महारानी,मुझे अपनी शरण में ले लें l मेरा Continue reading तुझे अंबे कहू या दुर्गा

वो मेरी तस्वीर छुपाए रखती थी

वो मेरी तस्वीर छुपाए रखती थी जालिम ज़माने के डर से खामोश रहा करती थी, नैनों में मगर अपने अश्क़ छुपाए रखती थी। खोल कर किसी ने उसके सीने से लगी किताब को नही देखा, सुना है उस किताब में वो मेरी तस्वीर छुपाए रखती थी।।1।। हम गुजरते थे जब उसके महोल्ले से, मेरे नाम के खूब किस्से सुनाई पड़ते थे। हम जब नजर उठाकर देखते उसके झरोखे में, वो परदे की आड़ से हमे देखा करती थी।।2।। इत्र गुलाब का छिड़क कर जब वो कॉलेज पहली बारी आई थी, आज भी वो खुशबू पुरे क्लासरूम में महकती है। मुस्कुराकर Continue reading वो मेरी तस्वीर छुपाए रखती थी

मोदी जी की नोटबंदी

मोदी जी की नोटबंदी , ने सब अरमा तोड़ दिए l अब क्या होगा,कैसे होगा , सोचकर अब हम रो दिए ll मोदी जी की नोटबंदी , ने सब अरमा तोड़ दिए l गाड़ी भी होती,बंगला भी होता, नोटों भरा एक गल्ला भी होता l लेकिन यदि पहले पता होता ll तेरे लिए मैं गहने बनवाता , तुझको किसी होटल भी ले जाता l अगर मोदी नोट बंदी ना लाता ll नोटबंदी ने उन नोटों को , काग़ज मैं बदल कर रख दिए ll मोदी जी की नोटबंदी , ने सब अरमा तोड़ दिए l अब क्या होगा,कैसे होगा , सोचकर अब हम Continue reading मोदी जी की नोटबंदी

दर्द

बात ऐसी कह गए सोचा भी न कि हम पर गुजरेगी क्या , दर्द दिल में हुआ बिना आवाज था उनको पता क्या , सहें भी कितना हम ये उनसे पूछना तो चाहते है भला, सुनने वाला न कोई यहाँ हाले दिल करें जो बयां ॥ उनकी बातों ने आज दिल के टुकड़े कर दिए  हैं हजार, ढूंढेंगे भी तो भी न मिलेगा एक यहाँ और एक वहाँ क्या , चुभन को महसूस कर लिया कह न सकेंगे किसीसे , ऐसा तनहा उनकी बातों ने आज  हमको कर दिया ॥ नासूर सा दर्द दिल को दे दिया सोच भी नहीं ,       Continue reading दर्द

तुम जीत गई, मैं हार गया

तुम जीत गई, मैं हार गया हे मृत्यु ! तुम जीत गई, मैं हार गया।। मैंने तो अपने जीवन में अन्तः की घबराहट सुन ली साँसों के कोलाहल में भी तेरी मैंने आहट सुन ली तुम आयी, मेरा तो संसार गया हे मृत्यु ! तुम जीत गई, मैं हार गया।। मीठे सपने मैंने देखे गमगीन नजारे भी देखे जीवन की अंधी आँखों से हर क्षण परिवर्तन ही देखे मिला प्रकाश न अंधकार गया हे मृत्यु ! तुम जीत गई, मैं हार गया।। जो होना था, सो होना था क्या सोच करूँ सोते जगते ठोकर खाकर गिरते गिरते सम्हल सका न Continue reading तुम जीत गई, मैं हार गया