बिटिया

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तू जब जीवन मैं आई खुशिया ढेरो संग लाई, तेरी हंसी रंगबिरंगी कलि, बाते मानो मिश्री की डली, तेरी प्यारी शरारते दुख मैं भी चैन देती, मीठे सवाल जिंदगी के जवाब देती, ये खुशियाँ जो तू लाई मानो मेरी जिंदगी बनके तू आई. वो मम्मी...
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शायरी-२

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रुठूंगा इस तरह, कि उनको ख़बर जब मिलेगी, मलते रहेंगे हाध, पर वो मना ना पाएंगे ॥ ‘विराज’
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शायरी

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वो छीन गया मुझे, मुझसे ही छुङाकर, आज़ाद हुआ फिरता था, जो बदनाम गलियों में ॥ ‘विराज’
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तेरी बेवफाई

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कैसे करूँ भरोसा तेरा, तुमने तो कहा था कभी साथ ना छोड़ोगे, कभी रिश्ते ना तोडोगे कभी तनहा ना छोड़ोगे, हर सुबह-ओ-शाम गुजारोगे अब क्या हुआ याद नही आती हमारी, या दिन नही ढलता शाम नही होती ……anshika rai
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मेरा पैगाम

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हवाओँ के जरिए भेजा है हमने इक पैगाम, पैगाम भेजा है हमने आपके नाम, हमने लिखा है ना हमसे हुई कोई खता ना आपसे हुई खता, फिर क्यों हैं खफा ना आप हैं बेवफा ना हम बेवफा, अंशिका राय
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अर्ज किया है,

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वो करते है याद ज़माने को देखकर, वो करते है याद ज़माने को देखकर, कि इक सनम मेरा भी है, इसी भीङ में खोया हुआ ॥ विराज
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मुक्तक

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1- बेवक्त मेघ बरस गये असहाय किसान तरस गये कैसे? भरे पेट अपना, हमारा किसान ये कर्ज मे डूब गये। 2- किसान तब कितना रोया होगा लहलाती फसल को पल मे खोया होगा कर्ज के बोझ तले जाने… कितनो ने मौत को गले लगाया होगा।...
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रिश्ते

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रिश्ते तोड़ देना हमारी फितरत नहीं हम तो बदनाम है रिश्ते निभाने के लिए – Hasmukh Saurabh
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हम-तुम

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ढूंढती हर दिशा, तुमको मेरी नज़र, खो गए तुम कहाँ, खो गए हम कहाँ, हर तरफ इक मासूम चेहरा तेरा, ढूंढे तुमको यहाँ कभी तुमको वहाँ, किस अदा से तराशा उसने तुझे, हर तरफ तु दिखे, तु दिखे हर जगह, पाने की कोशिशें, मेरी अब...
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मेरी गुडिया सो रही…

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मेरी गुडिया सो रही, उसे जगाना मत। अभी- अभी आँख लगी है, उसे रुलाना मत।। मेरी गुडिया सो रही, उसे जगाना मत। आँगन की चिडिया तुम, पंख मत फडफडाना। आकर दाना चुगना तुम, फिर धीरे से उड जाना।। मेरी गुडिया सो रही, उसे जगाना मत।...
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महसूस

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कुछ दिनों की बंदिशों से आजाद हो जाओगी, जो शायद मेरी दोस्ती में महसूस होती है तुम्हे. ना पूछूँगा मैं तेरा हाल अब चाह के भी, जो शायद मेरी आदत महसूस होती है तुम्हे. फिर फ़साने लिख लेना किसी और के साथ में, जो मेरे...
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नये रिश्ते की शुरूवात

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उन से अनायास ही मुलाकात हो गई बिन कहे ढेरो सारी बाते हो गई, कुछ सवाल मैने भी किए उसने भी, पर मेरे जवाबो से वो आहत कई बार हो गई नये रिश्ते की शुरूवात होगई. राजीव कुमार
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तुम जब सपनो मैं आती हो

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तुम जब सपनो मैं आती हो दिल चाहता है वक्त यन्हि थम जाए सपनो मैं भी चोरी से तुझे देखना, मन ही मन बाते करना, और वो तुम्हे मनाने की कोशिश करना, पर तुम्हारा अतीत की तरही फिर वो इनकार करना, तुम यह भी कहती...
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जाने कितना सारा लिखना था

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जाने कितना सारा लिखना था   जाने कितना  सारा लिखना था जीवन की इस गाथा में जो लिखता था मिट मिट जाता था जीवन की इस गाथा में   कोरे  कोरे  सारे   पन्ने बचपन में  सब बिखरे थे जीवन की माटी से पुतकर सब मटमैले...
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तुम चाहो तो

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तुम चाहो तो – -   तुम चाहो तो मंजिल मेरी दूर हटा दो मैं जाऊँ जिस ओर पथिक बन उस पथ पर तुम शू ल बिछा दो और सफर का क्लेश बढाने गर्म सुलगती रेत बिछा दो   उफ् न करूँगा, कुछ न कहूँगा...
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