दर्द

बात ऐसी कह गए सोचा भी न कि हम पर गुजरेगी क्या , दर्द दिल में हुआ बिना आवाज था उनको पता क्या , सहें भी कितना हम ये उनसे पूछना तो चाहते है भला, सुनने वाला न कोई यहाँ हाले दिल करें जो बयां ॥ उनकी बातों ने आज दिल के टुकड़े कर दिए  हैं हजार, ढूंढेंगे भी तो भी न मिलेगा एक यहाँ और एक वहाँ क्या , चुभन को महसूस कर लिया कह न सकेंगे किसीसे , ऐसा तनहा उनकी बातों ने आज  हमको कर दिया ॥ नासूर सा दर्द दिल को दे दिया सोच भी नहीं ,       Continue reading दर्द

तुम जीत गई, मैं हार गया

तुम जीत गई, मैं हार गया हे मृत्यु ! तुम जीत गई, मैं हार गया।। मैंने तो अपने जीवन में अन्तः की घबराहट सुन ली साँसों के कोलाहल में भी तेरी मैंने आहट सुन ली तुम आयी, मेरा तो संसार गया हे मृत्यु ! तुम जीत गई, मैं हार गया।। मीठे सपने मैंने देखे गमगीन नजारे भी देखे जीवन की अंधी आँखों से हर क्षण परिवर्तन ही देखे मिला प्रकाश न अंधकार गया हे मृत्यु ! तुम जीत गई, मैं हार गया।। जो होना था, सो होना था क्या सोच करूँ सोते जगते ठोकर खाकर गिरते गिरते सम्हल सका न Continue reading तुम जीत गई, मैं हार गया

बेटी की विदाई

बेटी की विदाई बेटियां  होती है पराई l छोड़ हमें चली जाएगी l जाते-जाते आँखों में वो l आंसू फिर दे जाएगी ll लाड़ो मेरी हुई पराई l छोड़ हमें चली जाएगी l जाते-जाते उसकी यादें l याद हमें फिर आएँगी ll बेटिया होती है पराई l छोड़ हमें चली जाएगी l बेटियां, बाबुल के घर में l सदा नहीं रह पाएगी l एक दिन वो भी ….. हमको छोड़कर पिया संग चली जाएगी ll लाड़ो मेरी हुई पराई l छोड़ हमें चली जाएगी l जाते-जाते आँखों में वो l आंसू फिर दे जाएगी ll बेटिया होती है पराई l Continue reading बेटी की विदाई

कैसी जिन्दगी जी रहे हैं हम नहीं हमें कोई एहसास है।

कैसी जिन्दगी जी रहे हैं हम नहीं हमें कोई एहसास है। ना प्यार है ना इन्तजार है… ना भरोसा है ना विश्वास है… आखों में नहीं बचा किसी के लिए भी सम्मान है… फिर क्यों सम्मान के लिए लडा ये संसार हैं… कैसी जिन्दगी जी रहे हैं हम नहीं हमें कोई एहसास है। अपनो से लड बैठे हैं… गैरों के साथ जा बैठे हैं… कैसे हम सब कुछ भूल गए हैं… अपनो से ही तो ये संसार बने हैं… कैसी जिन्दगी जी रहे हैं हम नहीं हमें कोई एहसास है। हाथों में आविष्कार है… रहते हर किसी के पास है… Continue reading कैसी जिन्दगी जी रहे हैं हम नहीं हमें कोई एहसास है।

तेरी बगिया में मेरा क्या काम

तेरी बगिया में मेरा क्या काम इसमें है सुन्दर फूलों की शान।   ओस कहे मैं फूलों की हूँ कलियों पर ही मैं इठलाऊँ मेरे  आँसू तप्त  कणों से इनको यहाँ कहाँ बरसाऊँ।   तेरी बगिया है इक सुख की खान इसे  कहाँ मेरे दुःख  की पहचान तेरी बगिया  में  मेरा  क्या काम इसमें है  सुन्दर  फूलों  की शान।   खुशबू है बस  तेरी महिमा पवन संग मधु गीत सुनाती मेरी  आहें  और  निराशा पीड़ा का दुःख दर्द सुनाती।   तेरी  बगिया का सुन्दर परिधान और कफन यह मेरा क्षूद्र समान तेरी  बगिया में  मेरा क्या काम इसमें है  सुन्दर Continue reading तेरी बगिया में मेरा क्या काम

काँच के कुछ टुकड़े मेरे दामन में बाकी रह गए

काँच के कुछ टुकड़े मेरे दामन में बाकी रह गए। तोड़ दिए थे जिन्हें अपनी सुरत देख के। कसूर उसका नहीं था वो तो अपने वजूद को बयां कर रहा था कसूर अपना ही था जो खुद को उनके वजूद में देख नहीं पाये। इस दुनिया के सितम सहते सहते हम खुद ही जालिम बन गए। खूद को देखने का वक्त आया तो हम तन्हा ही इस दुनिया में रह गए। निकल कर आये थे जिस महफिल से हम। उस महफिल का रास्ता आज भूल गए। छिन ले आज कोई ये शोहरत मुझसे बस लोटा दे मेरे बचपन के कुछ Continue reading काँच के कुछ टुकड़े मेरे दामन में बाकी रह गए

हे माझी ! मेरे कर्णधार !

हे  माझी !  मेरे कर्णधार ! मुझे ना छोड़ बीच मझधार।   जिसको कहते जीवन नैय्या वह मैंने  तुमसे  पायी  है तेरे  ही  कहने  पर  मैंने लहरों  से  होड़ लगायी है   माना किश्ती पर है मेरी पूर्वजन्म  का  भार अपार हे  माझी !  मेरे कर्णधार ! मुझे ना छोड़ बीच मझधार।   चहुँ ओर फेनिल सागर है जीवन जिसमें बूँद जरा-सा इसके  अंदर  घूम रहा है कुंठित होकर जीव मरा-सा   फूट पड़ा  तो मिट जावेगा इसका  यह सुन्दर आकार हे  माझी !  मेरे कर्णधार ! मुझे ना छोड़ बीच मझधार।   सोच  रहा था  तेरे रहते थम जावेगी Continue reading हे माझी ! मेरे कर्णधार !

तेरा रसमय गीत निमंत्रण

तेरा रसमय गीत निमंत्रण मेरे प्राणों ने जब पाया प्राण पखेरू बन पीड़ा के यह कोमल गीत चुरा लाया। ‘तुझसे मिलकर भेंट चढ़ाने अर्पित कर दूँ अनुपम माला’ यही सोचकर गूँथी मैने आँसू से गीतों की माला बनी ना जब पंक्ति नूतन-सी कुछ भक्ति गुच्छ चुरा लाया तेरा रसमय गीत निमंत्रण मेरे प्राणों ने जब पाया। प्राण पखेरू बन पीड़ा के यह कोमल गीत चुरा लाया। तेरे गीतों का स्वर पाने घुँघरू मिथ्या के सब तोड़े और अहं की जंजीरें सारी माया के बंधन भी छोड़े नवपल्लव की झांझर ध्वनि को मैं पवनदेव बन ले आया तेरा रसमय गीत निमंत्रण Continue reading तेरा रसमय गीत निमंत्रण

मिलो दूर जाना है।

मिलो दूर जाना है। निराशा भरी काली रातों को, उम्मीद की रौशनी से रोशन करते जाना है। ये तो शुरुवात भर है मेरे सफर की, मुझे तो मीलो दूर जाना है।।1।। मैं दिया हूँ रोशन ही सही, मेरे हर तरफ उजियाला ही सही। मुझे अपने तल का अँधियारा मिटाना है, आखरी बून्द जब तक बची है जलते जाना है।। ये तो शुरुवात भर है मेरे सफर की, मुझे तो मीलो दूर जाना है।।2।। सादगी मेरे अंदर साँसों सी बसी है, आखरी सांस तक दुश्मन के भी गले मिलते जाना है। याद करे कोई मुझे बाद मेरे, मैं इतना भी महान Continue reading मिलो दूर जाना है।

500,1000 रुपए के नोट

500,1000 रुपए के नोट मोदी जी ने टीवी पर ये फरमान सुनाया l 500,1000 रुपए का नोट बंद करवाया ll छुपाया था कभी पत्नी ने पति से जो पैसा l वो भी निकल कर पति के सामने आया ll खबर सुनकर पत्नी, पति पर यू चिल्लाई l कहा था क्यों नहीं पहले अंगूठी दिलाई ll अब अपने इन नोटों की माला बनाना l म्यूजियम में रखकर धुप-बत्ती दिखाना ll भिखारी को 500 रु का नोट सरकाया l मेरा हाथ पकड़, वो मुझ पर चिल्लाया ll साहब! वो नोट दे जो कही चल तो पाए l नहीं है,तो मेरे साथ ही Continue reading 500,1000 रुपए के नोट

हम तो हौसला रख के आए थे जिंदगी गंवाने का

हम तो हौसला रख के आए थे जिंदगी गंवाने का ज्यादा जुनून नहीं था मुहब्बत में कुछ पाने का , हम तो हौसला रख के आए थे जिंदगी गंवाने का। करोगे तो जानोगे कि इश्क़ बला क्या है, इश्क़ कोई अल्फाज़ नहीं है समझाने का। मैं जिसकी आँखों में नमी नहीं देख सकता, उसी को मजा आ रहा है मुझे रुलाने का। जिसे बचाने की खातिर हम इस दरिया में कूदे थे, उसे कभी ख़्याल नहीं आया हमें बचाने का। तुम समझे हम कोई पागल है या जोकर है, हम कोई मौका नहीं छोड़ते थे तुम्हें हंसाने का। हम उस Continue reading हम तो हौसला रख के आए थे जिंदगी गंवाने का

शून्य सा अस्तित्व

शून्य सा अस्तित्व हाँ माना शून्य की खोज आर्यभट्ट ने की थी, पर शून्य के बिना धरा पर क्या किसी का है अस्तित्व यहाँ, धरती भी तो एक शून्य के आकार की तरह ही है गोल, ज़ीरो की कहानी कुछ इस तरह लिखती हूँ मैं अपनी जुबानी, नज़रों में था नगण्य (शून्य) सा अस्तित्व  मेरा, बस सबकी खातिर जिंदगी जिए जा रही थी एक शून्य  की तरह, सबकी नज़रों में थी खटकती सी मैं, फिर भी खुद की आँखों से न टपकने दिया एक मोती मैंने, मोती भी तो आकार में होता है एक शून्य की तरह, अचानक एक रोज़ एक हवा Continue reading शून्य सा अस्तित्व

पटाखों को ना कहें

पटाखों को ना कहें दिवाली पर वो बड़े-बड़े बम छुड़ा रहे थे l बम छुड़ाते समय देख बहुत इतरा रहे थे ll हमने कहा ………………………………. आप में बहुत हिम्मत है हम ये जान गए l आप खतरों से खेलते है हम पहचान गए ll आप अपनी शक्ति को यूँ व्यर्थ ना गवाये l सरहद पे जाकर दुश्मन के छक्के छुड़ाए ll ऐसे तो आप अपने पैसो में आग लगाएंगे l दुश्मन को ढेर करो तो मैडल मिल जायेगे ll आप पटाखे छुड़ाकर जो धुंआ फैला रहे है l अनजाने में आप स्वयं बीमारी बुला रहे है ll हम तभी खुशियो Continue reading पटाखों को ना कहें

संवेदना

संवेदना सखी ओ सखी देख मुझ से नहीं देखी जाती तेरी आँखों में ये नमी दर्द अपना कभी मुझसे अगर तू  साँझा करे तो समझूं इसको मैं भी मैं नहीं  कहता की तू मेरा भरोसा रख ले,  अगर समझे फिर भी मुझे इस काबिल तो हर कोण से तू मेरा एक परीक्षण कर ले न जाने क्या वजेह है और किस बात का खौफ है तेरे दिल में चलो जाने दे, कुछ देर बैठ, मेरे पास आ कुछ तो मशविरा कर ले मैं जानता  हूँ कि तू  जानती है इस बेमुरब्बत जिंदगी का फल्सफा लेकिन यकींन कर खुदा का और Continue reading संवेदना

दास्ताँ

दास्ताँ कुछ थे सहमे से, कुछ था सहमे से हमारे कदम, रखा था जिस रोज हमने आपके आँगन में अपने कदम । कांपता सा बदन, डरा हुआ सा था दिल हमारा , रखा था जिस रोज हमने आपके आँगन में अपने कदम । अनजान थे वो रास्ते,अनजान सभी थे रिश्ते, रखा था जिस रोज हमने आपके आँगन में अपने कदम । हाथ थाम आपका चल पड़े आपके साथ विश्वास दिल में था भरा, अर्पण किया जिन्हें सब वो सम्हालेंगे मेरे कदम मुश्किलों भरे इस सफर में,अनजान डर दिल में लिए पर विश्वास आप पर कर, रखा आपके आँगन में कदम Continue reading दास्ताँ