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Topic Summary

Posted by: admin
« on: March 31, 2015, 09:42:01 AM »

Dhanyavaad amardeep
Posted by: Amardeep kumar
« on: March 30, 2015, 05:27:00 PM »

शुभ संध्या दोस्तों।
     मैं अमरदीप कुमार,बी ए प्रथम वर्ष का छात्र हूँ।बी एच यू के चरणों में जगह मिली है।और कविता लिखना तो पसंद है, कविता पढ़ना और भी ज्यादा।
    और अंत में अडमिन को बहुत बहुत धन्यवाद।
Posted by: Amardeep kumar
« on: January 17, 2015, 09:18:36 AM »

नमस्कार दोस्तों,
      मैं अमरदीप कुमार
बी एच यू का बी ए प्रथम वर्ष का विद्यार्थी हूँ।
Posted by: admin
« on: November 14, 2014, 03:46:12 PM »

आपका काव्यकोश मे आपका हार्दिक स्वागत। :)
Posted by: Suyash Shukla
« on: November 13, 2014, 07:04:51 PM »

सुयश शुक्ल
गाज़ियाबाद उत्तर प्रदेश
बारहवीं कक्षा विद्यार्थी मॉडर्न अकादमी स्कूल
मैंने कविताएँ लिखना कक्षा दसवीं से आरम्भ किया
मेरे विचार हैं कि एक मानव के जीवन का सर्वश्रेष्ठ विशलेषण कविताओं के माध्यम से हो सकता है

"आत्मा के सौंदर्य का शब्द रूप है काव्य , मानव होना भाग्य है कवी होना सौभाग्य "
Posted by: sanjay.negi.902604
« on: November 08, 2014, 02:27:29 PM »

मैं  संजय नेगी
रुद्रप्रयाग उत्तराखण्ड
महिन्द्रा एण्ड महिन्द्रा लि० हरिद्वार आटोमोटिव सेक्टर मे जाब. करता हूं।
मुझे  बच्चों से कविता का शोक है।
मैंने कविताएं लिखना कक्षा  9वीं से शुरू  की।
मेरे लिए कविताएं उतनी ही जरूरी हैं  जितना कि जीने के लिए सांसों  की जरूरत होती है।
Posted by: Manvendra
« on: November 07, 2014, 02:26:41 PM »

मेरा नाम मानवेन्द्र प्रताप सिंह
मै एक   NGO में MIS officer  के पद पर काम करता हूँ
कविता कहने का शौक मुझे सन २००० से है जब मै हाई स्कूल में था 
Posted by: hemlata
« on: November 07, 2014, 02:07:51 PM »

अपना परिचय यहाँ दीजिये.. आप क्या करते हो? आपकी पसंद क्या हे, और आपको कविता करने की आदत कब लगी. ;)

सर ,
मेरा नाम हेम लता है और मैं एक गृहणी हूँ ,मैं लखनऊ में जन्मी और दिल्ली में रहती हूँ ॥
कविता लिखने का शौक थोड़ा बहुत था बचपन मैं मेरी एक -दो कवितायेँ लोकल न्यूज़ पेपर में भी छपी. और शायद इसी वजह से आज भी कविता लिखने का शौक बरक़रार है ॥ मुझे धीमा और पुराना  संगीत पसंद है
Posted by: Prieyranjan_Priyam
« on: November 07, 2014, 11:44:18 AM »


अपना परिचय यहाँ दीजिये.. आप क्या करते हो? आपकी पसंद क्या हे, और आपको कविता करने की आदत कब लगी..

मै क्लीनिकल रिसर्च में पारा-स्नातक कर रहा हूँ.मै पिछले ४ सालों से बैंगलोर में रहता हूँ.मुझे कविता लिखना और छोटे मोटे आर्टिकल्स लिखना बहुत पसंद है .जब मै ११ साल का था तब मैंने रिकेट पर कविता लिखना शुरू किया था जो की सचिन पर था.धीरे धीरे मैंने कुछ सालों तक क्रिकेट पर ही लिखता गया पर उसके बाद मैं अपने बड़े भाई से प्रेरि होके क्रिकेट के अलावा भी कविता लिखना शुरू किया .
Posted by: Bipul Sijapati
« on: November 07, 2014, 11:04:06 AM »

मैं, विपुल सिजापति । मैं काठमाण्डुका रहनेवाला हूँ और यहीँके एक संस्था में कार्यरत हूँ ।

मेरा साहित्यमे रुझान है और नेपाली साहित्यका बिद्यार्थी हूँ । मेरा कास्कोल नामसे एक कथासंग्रह प्रकाशित होचुका है । मेरा हिंदी काव्यमे भी आशक्ति है और मै अपना नेपाली रचनाओंको हिन्दिमे रुपान्तरण करके आप सभी का मनोरंजनके लिए प्रेषित करता हूँ ।

सम्मान सहित ,

विपुल सिजापति
काठमाण्डौं, नेपाल ।
७ नोभेम्बर, २०१४ 
Posted by: admin
« on: November 06, 2014, 11:14:35 AM »

दिनेश चरणजी,
आपका काव्यकोश मे आपका हार्दिक स्वागत।
Posted by: dineshcharan
« on: November 06, 2014, 12:36:15 AM »

नमस्कार राहुलजी
मै पेशे से एक बैंकर हु
और दिल से एक साहित्य प्रेमी और रचनाकार
ऐसा याद आता है की कक्षा 5 से लिख रहा हु
सेकड़ो कविताये कुछ कहानिया और अब 2 उपन्यास पर
कार्य कर रहा हु  ।
ऐसा शानदार मंच प्रदान करने के लिए आप बधाई के हक़दार है ।

Posted by: admin
« on: July 20, 2013, 11:17:02 PM »

अभय कुमार गुप्ता और अनिल शर्मा जी,
आपका काव्यकोश मे आपका हार्दिक स्वागत। :)
Posted by: अनिल चिंतित
« on: July 20, 2013, 08:50:00 AM »

अनिल शर्मा
Posted by: Abhay Kumar Gupta
« on: April 02, 2013, 02:24:43 PM »

प्रणाम
हिंदी को गौरवशाली आयाम मिले उसके लिए काव्य कोष एक सराहनीय प्रयास है, पेशे से अभियंता हूँ, जीवन के विभिन्न सोपानों ने कविता या गद्य लेखन की और बरबस मोड़ दिया, कब कैसे हुआ ये सब पता नहीं, प्रेम और भक्ति पे लिखते लिखते , विद्रूप हो चुके नेत्रत्व ने अब व्यंग पर ला पटका है, माँ सरस्वती का आशीर्वाद कैसे संभाल पाउँगा ,कह नहीं सकता .
--जय हो सट्टे के महा-समर----
महा समर सट्टे का शुरू हो गया, अप्रेल में देश मशरूफ हो गया ,
एक नंबर में दो नंबर का धंधा , गली गली मशहूर हो गया,
प्यास लगे न भूख लगे , हर माँ के सर का दर्द हो गया,
इसे तो अफीम भली थी ? शान्ति तो घर में रहती थी,
बाप बेटे के बीच में भैय्या , शर्त लगाना शुरू हो गया,
भाभी थाली पटक गई हैं , बाप बेटे को होश नहीं है ,
सट्टा समीकरण फ़ैल हुआ यूँ , बाप हार बेटे से गए हैं,
ठंडी रोटी चबा रहे हैं , आंख ही आँखों में अब बेटे को चबा रहे हैं,
बेटे ने कारण पूछा तो , तेरी माँ को मनाऊं कैसे ,
फटी जेब अब दिखा रहे हैं ,
--जय हो सट्टे के महा-समर----