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यह कौनसा साल है? (अंक मे उत्तर दे):

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Topic Summary

Posted by: Sajan Murarka
« on: April 05, 2015, 05:14:05 PM »

बिटिया के
ख़त की
हर रेखा में
दर्द का बयान
आँखों की स्याही
बेदना की
कलम से
लहू को
पानी पानी कर दें
कांटेदार टहनियां
सी चुभन
तप्ता सा सूरज
मन के अंदर,
दावानल जलाता
पीड़ा दबाये
लुकाता है भीतर
अनसुनी
यातनाओं की
कर्कश वाणी
झुरमुट
अनहोनी का
लहराने लगा
बहने लगा
नदिया के तट सा
सुखी रेती में
रेंगता कीड़ा
मर रहा प्यासा
वधू वेश में
डोलि सजाकर
जब बेटी गई,
मौन आँख
बरसी थी तब
जैसे नदियों की धारा
बीछू के डंक सा
चढ़ते उतरते
चिट्ठी के शब्द
बिटिया ने लिखा
यातना के
तट पर
रेती में लेटे
नहीं कोई अजूबा
फिर बहेगी अश्रुधारा
आँखों की स्याही
सरपट लिखे
कलम से
लाचारी
नहीं दमखम
नहीं है ताकत
हार है समाज से,
बदहवास
मेहँदी की
व्याही परत
उतर,चढ़ेगी अर्थी में
नाचेंगे अत्याचारी
रही प्यास मुह की
नदिया के तट पर
बेटी तो रह गई
पराई
न पिता के घर
न ससुराल में
जिन्दा रह पाई

सजन