Kavyakosh- Complete collection of Hindi Poems

Kavya Kosh - Hindi Poems => Poems by Kazim Jarwali => Topic started by: kazimjarwali on July 19, 2013, 05:25:23 PM

Title: खिचड़ी - मिड डे मील
Post by: kazimjarwali on July 19, 2013, 05:25:23 PM
अच्छा है यही तुम मुझे भूखा ही सुलाना,
अच्छी मेरी अम्मा कभी खिचड़ी न पकाना।

स्कूल मे खिचड़ी ही तो खायी थी सभी ने,
हंस खेल के मिलजुल के पकाई थी सभी ने,
किस चाव से थाली मे सजाई थी सभी ने,
इफ़्लास को सरकार के खाने से बचाना;

अच्छा है यही तुम मुझे भूखा ही सुलाना,
अच्छी मेरी अम्मा कभी खिचड़ी न पकाना।

आफत थी मुसीबत थी हलाकत थी वो खिचड़ी,
बच्चों के लिए जाम-ए-शहादत थी वो खिचड़ी,
कुछ मांए ये कहती हैं क़यामत थी वो खिचड़ी,
सच ये है हुकूमत की ज़रुरत थी वो खिचड़ी,
हर दिल को रुलाता है यह खिचड़ी का फ़साना;

अच्छा है यही तुम मुझे भूखा ही सुलाना,
अच्छी मेरी अम्मा कभी खिचड़ी न पकाना।। काज़िम जरवली
Title: Re: खिचड़ी - मिड डे मील
Post by: chandwani52 on July 23, 2013, 07:51:09 PM
सामयिक और गंभीर विषय पर कविता पसंद आई ,
प्रस्तुत है :
उस कातिल खिचड़ी पर पक रही हैं राजनैतिक खिचड़ियाँ 
परंतु आज की ज़रूरत है कि दोबारा न हो ऐसी गड़बड़ियाँ 


(चंदवानी)