Kavyakosh- Complete collection of Hindi Poems

Kavya Kosh - Hindi Poems => Hindi Love Poems => Topic started by: Vindhya on April 01, 2015, 04:45:32 AM

Title: स्वप्न
Post by: Vindhya on April 01, 2015, 04:45:32 AM
अापस को समझकर साथ साथ आगे बढ़ने की प्रारंभिक कवायद और इसी के साथ बढ़ती नई जिम्मेदारियों की अपनी व्यस्तायें होती हैं | लेकिन इन गुजरते लम्हों के साथ कब दो अलग सांसें एकदूसरे की जरूरत बन जाती हैं पता ही नहीं चलता| निसंदेह इन दोनों के बीच बातों व् विचारों का अपना ही पिटारा होता है पर इस पिटारे में वो एक सुन्दर और नाजुक सी जरूरी बात नीचे की ओर खिसकती चली जाती है, फिर कभी, बाद में बाहर निकलने ले लिए | क्या करें, विवाह संस्था ही ऐसी है हमारे इस समाज की|
आज मन ने फुसलाया कि क्यूूँ प्रतीक्षा करूँ मैं उम्र के पकने की|  मैं इस प्यारी सी फुसलाहट में आकर बाहर निकाल लाई उस पिटारे से वो दिल की बात |
आज आप सभी की साक्षी में, अपने जीवनसाथी को  सप्रेम समर्पित कर रही हूँ  कुछ नई और कुछ पुरानी, उन्ही के लिए लिखी हुई अपनी यह पंक्तियाँ .....


नन्हे मुन्ने स्वप्न बुने हैं, हमने सांझी आँखों में ...
सांझी राह पर बढ़ चले, हाथ लिए हम हाथों में...

चहूँ ओर से सुरभित पुरवा, सफर अपना महका रही...
धवल किरणों की तेजस देख, पथ को उजला बना रही...

हमराह हर निखर चले, तेरे संग के अहसास से..
राह डगमग भी न खले, हमसफ़र तेरे साथ से..

सुन युवा न वो होने पाये, हृदय में तेरे बसा जो बचपन...
मैं भी तुझसे पा जाऊँ, तुझसा संयम ओऱ संवेदन ...

जीवन का हर रंग रुपहला , रुचिर बना हर साँझ सवेरा...
तुझ संग नव गीत बने हैं, और बना संगीत सुनहला...

मन में अब एक आस सरस, पलछिन में गुजरे उम्र ऐसे...
जैसे झपकी पलक और गुजर लिए, हँसते खेलते ये चौदह बरस
Title: Re: स्वप्न
Post by: Rovin Hud on April 06, 2015, 10:29:33 AM
I like ur poem