Kavyakosh- Complete collection of Hindi Poems

Kavya Kosh - Hindi Poems => Hindi Vidamban Kavita => Topic started by: Sajan Murarka on April 05, 2015, 02:15:19 PM

Title: जिन्दगी
Post by: Sajan Murarka on April 05, 2015, 02:15:19 PM
जिन्दगी
जी रहा
किसी तरह
हरदिन
मरकर
जीवन
क्या है
सवाल
उलझन
भरा, पर
झेल रहे
जैसे खोजें
सागर में
प्यास मिटाने
पीने के लिये
मीठा पानी
शामिल करना
होता तभी
शीतल
नदी तट
जिस के पीछे
प्रयास निरंतर
नहीं विरत
नदी है गंदी,
क्या किया जाय
प्यासे रहे
और सहे
होकर अधिर
या ले पंगा
जीने के लिये
जहर ही पिया,
पर जीता हूँ
मर मर
शुद्धीकरण के
आचरण से
छानकर
उबालकर
ठन्डा करता
गंदा पानी
सिर्फ सागर
किनारे बैठ
सोच के तूफान
जीवन को
तृप्त नहीं करे
साधन हो
साधना चले
उपाय निकले
जिन्दगी को
गति मिले
सवाल पर
बवाल कर
कुछ नहीं
हासिल
जीवन में
प्रयास ही
अटल
बाक़ी निष्फल

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