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Hindi Gambhir Kavita / Re: ज़िंदगी
« Last post by chhaya dua on November 29, 2015, 06:59:42 AM »
 Sandeep ji , aap ka bahut-bahut dhanyawaad :)
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Hindi Gambhir Kavita / Re: ज़िंदगी
« Last post by sandeep sindhu on November 28, 2015, 07:52:52 PM »
wah wah kya soch k sagar may dubb kar likha hai... bahut acchi
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sir    बहुत हु सुन्दर कविता है। बहुत हु भावपूर्ण है जो मेरे भावनाओ को छु गया सर।
मैं भी इनके सदस्य बनना चाहता हु ।  मै भी कविता लिखता हु sir।    आपका कविता बहुत ही सुन्दर है।
4
Hindi Inspirational Poems / Re: प्रयास करो।
« Last post by ankit sangwan on April 07, 2015, 09:34:28 AM »
Feeling to crack the target
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Hindi Love Poems / Re: स्वप्न
« Last post by Rovin Hud on April 06, 2015, 10:29:33 AM »
I like ur poem
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Hindi Gazal / Re: बात होती तो है ......
« Last post by satyendragovind@gmail.com on April 05, 2015, 07:37:58 PM »
बहुत खुब सर
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Shero Shayari / कसक9
« Last post by shreyas apoorv on April 05, 2015, 05:49:09 PM »
कुछ रिश्ते होते ही हैं टूटने के लिए, उन्हें जोड़ कैसे सकता हूँ मैं.
तेरे दिल से सीखा है मैंने बेवफाई करना,
उसे छोड़ कैसे सकता हूँ मैं.

श्रेयस अपूर्व
भोपाल
8
Hindi Shrungarik Kavita / मिलन
« Last post by Sajan Murarka on April 05, 2015, 05:15:40 PM »
खोज रहा मिलन यह देह गंध
जैसे महक रहा चंदन
या फूलों का उपवन
या शृंगार में कस्तूरी मन
फूलों से सजकर आई
जैसे की चमेली की डालियाँ
या उड़ती बलखाती तितलियाँ
या नभ में चमकती बिजलियाँ
मेरे आंगन चांदनी छाई
जैसे आलोकित हो रही निशा
या बिन पीये छाया कोई नशा
या रंग बिरंगे फूलों का गुलदस्ता
है मिलन की आतुराई
जैसे आकाश में लहराती पतंग
या तट तोड़ती जलधारा की उमंग
या उफनती लहरों की तरंग
शीतल चांदनी मन्द मन्द मुस्कुराई
जैसे घर के आगे तुलसी हर्षाई
या भीगे आंचल में लज्जा छिपाई
ओठ में गुलाबी लाली लज्जाई
और आँखें पलाशी हो आई
जैसे काजल की कोठरी में नयन
या कोयल कंठ में हल्की सी गुंजन
या छेड़ कर रागिनी सी बजे कंगन
लौटा बसंत लेकर पुरवाई
जैसे छंद लिखे सुन्दर गीतों में
या उड़ रही है गंध पवन में
या किया सिंगार आज फूलों में
पैजनिया गुनगुनाते तुम आई
जैसे अभी भोर की लाली छाई
या चम्पा-चमेली की खुशबू आई
या सांसों की धड़कन में शहनाई
अंग अंग में बेचैन आतुराई
जैसे पुष्पित पंखुरियां ओस धुली
या चाँद-चांदनी की आंख मिचौली
या चौकड़ियाँ भरे हिरनी मतवाली
खोज रहा मिलन यह देह गंध

सजन
9
Hindi Gambhir Kavita / बिटिया का ख़त
« Last post by Sajan Murarka on April 05, 2015, 05:14:05 PM »
बिटिया के
ख़त की
हर रेखा में
दर्द का बयान
आँखों की स्याही
बेदना की
कलम से
लहू को
पानी पानी कर दें
कांटेदार टहनियां
सी चुभन
तप्ता सा सूरज
मन के अंदर,
दावानल जलाता
पीड़ा दबाये
लुकाता है भीतर
अनसुनी
यातनाओं की
कर्कश वाणी
झुरमुट
अनहोनी का
लहराने लगा
बहने लगा
नदिया के तट सा
सुखी रेती में
रेंगता कीड़ा
मर रहा प्यासा
वधू वेश में
डोलि सजाकर
जब बेटी गई,
मौन आँख
बरसी थी तब
जैसे नदियों की धारा
बीछू के डंक सा
चढ़ते उतरते
चिट्ठी के शब्द
बिटिया ने लिखा
यातना के
तट पर
रेती में लेटे
नहीं कोई अजूबा
फिर बहेगी अश्रुधारा
आँखों की स्याही
सरपट लिखे
कलम से
लाचारी
नहीं दमखम
नहीं है ताकत
हार है समाज से,
बदहवास
मेहँदी की
व्याही परत
उतर,चढ़ेगी अर्थी में
नाचेंगे अत्याचारी
रही प्यास मुह की
नदिया के तट पर
बेटी तो रह गई
पराई
न पिता के घर
न ससुराल में
जिन्दा रह पाई

सजन
10
Shero Shayari / Shero-Shayari-219
« Last post by Sajan Murarka on April 05, 2015, 05:11:42 PM »
मौन मूक आंखों की भाषा
बयां करें मन की अभिलाषा

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