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Author Topic: बेटी!मुबारक  (Read 497 times)

Offline anshu.gupta.1614460

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बेटी!मुबारक
« on: August 18, 2012, 10:44:54 PM »
मुबारक हो तुमको ! हो तुम को बधाई
नन्ही परी तेरी गोदी मे आई
इस कली की हिफाजत करना जतन से
सम्हाल कर रखना ये अमानत पराई
तिनका तिनका अब से जोड़ना होगा
अपनी चाहतो  से मुह मोड़ना होगा
उसे देने के लिए बहुत कुछ
रोज अपना दिल तोड़ना होगा
जीवन भर की पूंजी का दान
बेटी की बिदाइ.............।
सब का मन भरमाएगी
वो इतना प्यार लुटाएगी
पापा का हर पल खयाल रखेगी
माँ का हाथ बटआएगी
दिल पर पत्थर रख कर सहना
दिल के टुकड़े की जुदाई...........।
घर घर ,दर दर
ढूँढना होगा सुयोग्य वर
ब्याह  मे पीने होंगे कई अपमान के घूट भी
हंस कर सर झुका कर
पगड़ी का झुकना है डोली बैठाई.........।
शिक्षा दोगे ,संस्कार दोगे
चरित्र दोगे ,सुविचार दोगे
दोगे जेवर ,कपड़े
पर क्या बेच कर कीमती कार दोगे
तेरी लाड़ली कैसे बचेगी जब उसकी बेटी गई है जलायी..........।
ये बेटे का नहीं बिटिया का जनम है
कुछ पल खुशी उम्र भर का गम है
दर्द,अपमान,विछोह है बेटियाँ
फिर उनके आने से खुश कैसे हम है?
कैसे मुबारक!कैसे बधाई ?
नन्ही परी तेरी गोदी मे आई
 
« Last Edit: September 17, 2012, 01:40:35 PM by anshu.gupta.1614460 »

Offline kedar.mehendale

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Re: बेटी!मुबारक
« Reply #1 on: August 21, 2012, 10:22:38 AM »
सच मे कहूँ तो मुझे "घर घर ,दर दर"  से लेकर आगेके विचार बिल्कुल अच्छे नहीं लगे।
बेटी कोई बोज नहीं होती। और नाही बार बार अपमान के घुट पीने पड़ते है हर बाप को।
मै तो कहूँगा बेटी का बाप होना अपने आप मे एक विशेष आनंद है। मै खुद एक बेटी का बाप हूँ। और मुजे ऐसा कोई डर नहीं है। 

मगर आपकी रचना अच्छी है। इसलिए कविता के लिए आपका अभिनंदन।


Offline Vishvnand

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Re: बेटी!मुबारक
« Reply #2 on: August 21, 2012, 08:20:58 PM »
वाह वाह क्या बात  है .
बहुत बढिया अंदाज़े बयाँ  है , बड़ी सुन्दर अर्थपूर्ण भावनिक प्रभावी रचना है
पहले बेटी के जन्म और उभरने पर मन को बहुत आनंद दिया है
फिर दिल पर पारिवारिक सत्य बयाँ कर गहरा प्रभावी वार किया है

पर आजकल ऐसा तब ही हो सकता  है गर माँ बाप अनपढ़ है
नया क्या क्या हो रहा है उससे अनजान है
लडकिया आजकल पढी लिखी है independent है दूसरों पर निर्भर नही हैं
पारवारिक  सम्पत्ति पर उनका बराबर का हक़ है जितना  लड़कों का
इसीलिये पढ़े लिखे परिवार में बेटी को तो बहुत प्यार और सन्मान है...
सब जल्दी जल्दी बदल रहा है l  क्या ऐसा नही है?

Offline chandwani52

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Re: बेटी!मुबारक
« Reply #3 on: August 24, 2012, 08:24:51 PM »
अंशु जी ,

आपकी नकारात्मक कविता पढ़ कर मन दुखी  हुआ। मेरे मन मे जो विचार उत्पन्न हुए ,वो प्रस्तुत हैं:-

ये है आपके अपने मत
मैं नही हूँ आपसे सहमत
आप मत हो निराश
और  मत हो हताश
बीत गया  वो ज़माना
गलत है ऐसे विचारो का आना
अब तो नई है सोच
बेटी अब नही है बोझ
अपने पैरों पर खड़ा होकर
आज बेटी दिखाती है कुछ बनकर
इसलिये बेटी को पढ़ाओ लिखाओ
उसे किसी काबिल बनाओ
भटकना न पड़ता आज दर-दर
अच्छे प्रस्ताव है आज नेट पर
अब बेटी खोखले सपने नही बुनती है
आज अपना वर वो स्वयं चुनती है
दहेज प्रथा का करो सब विरोध
क्योकि दहेज है एक सामाजिक रोग
बेटी है घर  की आन-बान-शान
जहां बेटी जन्मे वो परिवार है महान

बस इतना ही.....

..गोपाल चंदवानी
« Last Edit: August 24, 2012, 08:28:03 PM by chandwani52 »