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Author Topic: जिंदगी तेरा सच सपनों से जुदा क्यो है...?  (Read 501 times)

Offline anshu.gupta.1614460

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ज़िंदगी तेरा सच सपनों से जुदा क्यो है?
जीते है हम तेरे इशारो पर....।
फिर तू हम से खफा खफा क्यो है?
उम्र भर साथ चाहते है तेरा ..
फिर भी मौत के वक़्त तू बेवफा क्यो है?
हमे शक है तेरी वफा पे सदा..।
फिर भी तेरे कदमो मे सजदा क्यो है?
किसी को बहुत,किसी को कुछ नहीं देती है तू..।
तेरी नियत मे इतना दगा क्यो है?
बुरों का साथ देती है,भलों को मात देती है.।
तेरी महफिल का ये फलसफा क्यो है?
बड़ी मुश्किल और दर्द है रास्ते मे तेरे.।
फिर इस दर्द मे इतना मज़ा क्यो है?
हर दिन ले जाती है तू मौत के अंधेरे मे.।
फिर तेरा नाम 'रोशन शमा ' क्यो है?
जिंदगी तेरा सच........................


Offline kedar.mehendale

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  • यूही .... चलते चलते
सुंदर रचना।

Offline Sajan Murarka

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हर दिन ले जाती है तू मौत के अंधेरे मे.।
फिर तेरा नाम 'रोशन शमा ' क्यो है?.....बहूत खूब..क्या अंदाज़ है
                    सुन्दर-मनभावन, बधाई
में , मेरी तन्हाई, कुछ बीते लम्हे , कागज के कुछ टुकड़े को समेटे दो पंक्तिया . .