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Author Topic: काश!कभी न होता बचपन.......  (Read 508 times)

Offline anshu.gupta.1614460

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काश!कभी न होता बचपन.......
« on: September 07, 2012, 10:49:24 PM »
हमने देखा,तुमने देखा.............।
सड़क किनारे के ढाबे पर झूठे बर्तन धोता बचपन
पढ़ने लिखने की उम्र सही
पर ईटे,पत्थर ढोता बचपन......।

न खेल खिलौनो की चाहत
न कुछ बनने की अभिलाषा
बस दो वक़्त की रोटी को
जूतो मे सुई चुभोता बचपन.............।

चौराहो पर फूल बेचता
कभी गाड़िया चमकाता
बस मे आइसक्रीम बेचने
दूर तलक दौड़ा जाता
कोने मे थक कर बैठा ,अपनी किस्मत पर रोता बचपन..............।

बबलू, घर-घर अखबार बांटता
राजू ,चाय बनाता
मुन्नी झाड़ू पोछा करती
गुड्डू मालिक के पाव दबाता
फिर भी रोज गालिया खाता,आसू से नैन भिगोता बचपन.......।

बहुत बने कानून
पर भूख  न रोकी जाए
कुछ पैसो की खातिर
बचपन बूढा होता जाए
ऐसी हालत देख के लगता,काश!कभी न होता बचपन.......।

हमने देखा,तुमने देखा.............।
सड़क किनारे के ढाबे पर झूठे बर्तन धोता बचपन
पढ़ने लिखने  उम्र सही
पर ईटे,पत्थर ढोता बचपन......।

   
 
 
« Last Edit: September 08, 2012, 07:26:01 PM by anshu.gupta.1614460 »

Offline Sajan Murarka

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Re: काश!कभी न होता बचपन.......
« Reply #1 on: September 07, 2012, 11:25:57 PM »
हमने देखा,तुमने देखा.............।
भूख से मजबूर बचपन
मजबूरियों से दबा बचपन
सिसकता ,रोता बचपन
तुमने बताया गरीब का बचपन
हर हाल में उलझन जगाता बचपन
सोच में गहरा दखल डालता लेखन
ऐसी हालत देख के लगता,
काश! मानवता से बच जाता बचपन.......।
में , मेरी तन्हाई, कुछ बीते लम्हे , कागज के कुछ टुकड़े को समेटे दो पंक्तिया . .

Offline chandwani52

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Re: काश!कभी न होता बचपन.......
« Reply #2 on: September 08, 2012, 12:59:05 PM »
अंशु जी

किया है आपने विषय  का सुंदर सटीक वर्णन
सचमुच कितना बेबस है, लाचार है ये बचपन
भ्रष्टाचार गरीबी और महंगाई है इसके मुख्य कारण
समाज को ही करना होगा इस समस्या का निवारण 

...गोपाल चंदवानी




Offline Vishvnand

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Re: काश!कभी न होता बचपन.......
« Reply #3 on: September 08, 2012, 09:51:01 PM »
विषय पर बहुत संवेदनशील ह्रदय को झकझोरती अर्थपूर्ण रचना
सन्दर्भ  जान और देख लगता अफ़सोस है अपना यूं जीना
समाज की ये अधोगति कि ऐसे बिगाड़ें कई बेचारे बच्चों का बचपना
भगवान का मानव को बचपन ये इतना बड़ा वर जिसकी समाज करें ऐसी निर्भत्सना
और हमें ये सब देखते रहना


Commends

Offline kedar.mehendale

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  • यूही .... चलते चलते
Re: काश!कभी न होता बचपन.......
« Reply #4 on: September 10, 2012, 11:10:38 AM »
सवेदनशील विषय पर
संवदेनशील लेखन।