!!

Welcome to Kavya Kosh

This is a retired Kavyakosh forum used as an archive. To access new Kavyakosh.Click here

Author Topic: फिर क्यो मेरा देश महान?  (Read 797 times)

Offline anshu.gupta.1614460

  • Jr. Member
  • **
  • Topic Author
  • Posts: 83
  • Karma: +0/-0
फिर क्यो मेरा देश महान?
« on: September 12, 2012, 12:34:03 PM »
'हाथी' की बेईमानी करके
करे 'सुई' का दान..............।
एक मंदिर बनवा दिया
जब छतीस बने मकान.........।
किसको सौपे डोर देश की जब सारे बेईमान.........।

धर्म की रक्षा कौन करे सब की नियत मे खोट
पोथी पत्रा पल मे बदले
जब दिखलाओ 100-100 के नोट....।
किसको सौपे डोर धर्म की जब पंडित बेच रहे भगवान
मुल्ला बेच रहे कुरान.......................।

ट्यूशन का जाल बिछाते
शिक्षक कक्षा मे नहीं पड़ाते
जाने कब  व्यापार बन गया
विध्या का सर्वोपरि था दान.................।

झूठ बोल कर बीमारों से खूब एठते पैसा
अंग निकाल के बेच रहे,
हाय  समय ये कैसा
धरती का भगवान बन गया जाने कैसे हैवान.....।

घोटालो पर घोटाले
ऊपर से नीचे तक पैसा बाट रहा
देश का नेता देश को अपने
दीमक जैसा चाट रहा
पकड़े जाने पर खरीद रहा .....कानून और संविधान....।

महगाई ने कमर तोड़ di
कुछ न मिले अब सस्ता
कैसे जिये आम आदमी,
घर की घायल अर्थव्यवस्था
भूखा सोये गरीब...सड़क पर सड़ते गेहू धान.....।

कहाँ पुरुष का जीवन सुरक्षित
कहाँ स्त्री का मान
पालक झपकते लुट जाते
मरियदा और जान
चुप रहना...सब सहना...गर प्यारे है प्राण..।

क्या पायगी देश से अपने
नई उगी ये फ़स्ले
यू ही न कोसे देश को
आने वाली नसले
हम तुम करे प्रयास अगर.....तो फिर बने देश महान....।


   




 






 
 


 
 
 
 
« Last Edit: September 13, 2012, 01:02:02 PM by anshu.gupta.1614460 »

Offline chandwani52

  • Sr. Member
  • ****
  • Posts: 329
  • Karma: +0/-0
Re: फिर क्यो मेरा देश महान?
« Reply #1 on: September 12, 2012, 02:20:20 PM »
मुझे आपकी कविता बहुत पसंद आई ।
यह कविता पढ़ कर कवि प्रदीप का गीत याद आगया ।
देख तेरे संसार की हालत क्या होगयी भगवान ,कितना बदल गया इंसान ।

मैंने उसमे एक थोड़ा शब्द-परवर्तन किया है :-

"देख तेरे संसार की हालत क्या होगयी भगवान
अपने स्वार्थ मे कितना भ्रष्ट हो गया इंसान ....कितना गिर गया इंसान ...."

Offline anshu.gupta.1614460

  • Jr. Member
  • **
  • Topic Author
  • Posts: 83
  • Karma: +0/-0
Re: फिर क्यो मेरा देश महान?
« Reply #2 on: September 12, 2012, 04:44:33 PM »
चंदवानी जी किसी कारण वश मैं अपूर्ण कविता पोस्ट कर पाई.........अब कविता पूरी कर रही हूँ !धन्यवाद

Offline kedar.mehendale

  • Moderator
  • Hero Member
  • *****
  • Posts: 803
  • Karma: +0/-0
  • Gender: Male
  • यूही .... चलते चलते
Re: फिर क्यो मेरा देश महान?
« Reply #3 on: September 13, 2012, 12:26:24 PM »
अंशु जी ना करो
देश पे क्रिटिसीजम
नहीं बचा है अब यहा
Freedom of Expression

देखा न क्या हाल हुवा
कार्टूनिस्ट त्रिवेदी जी का
आर्टिस्ट को खानी पड़े
जेल की हवा।

आपकी कविता पसंद आई। बधाई।

Offline Sajan Murarka

  • Hero Member
  • *****
  • Posts: 1834
  • Karma: +1/-1
  • Gender: Male
    • my  blog
Re: फिर क्यो मेरा देश महान?
« Reply #4 on: September 13, 2012, 11:33:21 PM »
तो फिर बने देश महान...हम तुम करे प्रयास अगर.....
मुश्किल नहीं मंजिल...साथ मिल तय करें यह सफर
सोच में बदलाव चहिये, .."अंशुजी" लेखन रहे मुखर
क्या कहें, ललित कला आपकी मन-भावन, अति सुन्दर


« Last Edit: September 13, 2012, 11:36:11 PM by Sajan Murarka »
में , मेरी तन्हाई, कुछ बीते लम्हे , कागज के कुछ टुकड़े को समेटे दो पंक्तिया . .

Offline Vishvnand

  • Hero Member
  • *****
  • Posts: 918
  • Karma: +0/-0
Re: फिर क्यो मेरा देश महान?
« Reply #5 on: September 15, 2012, 11:13:40 AM »
बहुत बहुत अर्थपूर्ण भावनिक देशभक्तिपर और सुन्दर
साथ ही मार्मिक और प्रभावी मन को झकझोरती रचना ये निरंतर
अंशु जी बहुत प्रशंसनीय है ये आपकी रचना अति  मन भायी
इस रचना के लिए हार्दिक अभिवादन और है बहुत सारी बधाई .....

Offline anshu.gupta.1614460

  • Jr. Member
  • **
  • Topic Author
  • Posts: 83
  • Karma: +0/-0
Re: फिर क्यो मेरा देश महान?
« Reply #6 on: September 15, 2012, 11:30:31 AM »
आप सभी का हार्दिक धन्यवाद!!!!