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Author Topic: बिटिया!तेरा सच.....  (Read 1046 times)

Offline anshu.gupta.1614460

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बिटिया!तेरा सच.....
« on: September 20, 2012, 01:54:27 PM »
मै पराई ,वो तुम्हारा.....।
मै भवर..... वो किनारा.....।
जन्मा है मुझे भी तूने माँ
फिर क्यो?
मै बोझ ....वो सहारा.............।
माँ ने प्यार से पास बुलाया
और बेटी होने का सच बतलाया!!!!
बेटी!बचपन हो या जवानी की दहलीज़.....।
डरे  तेरे लिए मन
की हो न जाए कोई उंच ....नीच.......।
शाम ढले तू न आई तो
दिल घबराइएगा..।
वो आधी रात मे भी अकेला चलाजाएगा .....।
तू बड़ेगी......तो चिंता  बड़ाएगी.।
वो बड़ेगा......तो बाबा की ताकत बड़ जाएगी....।
तू भी पड़ेगी उस की तरह
मगर दूसरा कोई तुझे ले जाएगा....।
वो अगर कमाएगा
तो चार पैसे घर मे लाएगा......।
तेरे जाने से जो सूना होगा आँगन
बहू और बच्चो से
वो बगिया महकाइएगा.....।
उम्र भर साथ रहेगा हर दायित्व निभाएगा....।
तू तब ही आएगी लाड़ली
जब तेरा पति चाहेगा......।
फिर बुडापे मे लकड़ी बनकर
हमे  सहारा देगा....।
तू छोड़ जाएगी मजधार मे ,
वो हमे किनारा देगा......।
अंत समय जब प्राण तजूगी मै
वो चिता को आग लगाए गा
और तेरा छु लेना भी
नर्क द्वार पाहुचाएगा...।
इतना ही नहीं......मुझे पूरा है यकी
मेरे न होने पर भी
वो तुझे बुलाएगा....।
तेरी ससुराल पाहुच कर
मायके का मन बड़ाइएगा......।
बेटी तू भी प्यारी
उसके जितनी
वो गौरव .....तो तू मान है हमारा
पर क्या करू
की रीत यही है
तू पराई......वो हमारा!!!!!!!!!!!!!
 


   
 

 


 
« Last Edit: September 20, 2012, 10:33:43 PM by anshu.gupta.1614460 »

Offline chandwani52

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Re: बिटिया!तेरा सच.....
« Reply #1 on: September 21, 2012, 01:16:38 AM »
ज्यादातर लोगो की सोच बदली है ,कुछ लोग अभी भी यह अन्याय करते हैं।

Offline kedar.mehendale

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Re: बिटिया!तेरा सच.....
« Reply #2 on: September 21, 2012, 11:34:12 AM »
बिटिया रानी तेरी कमी
हमेशा ही रहेगी
पूरा करने उस कमी को
बहू को ही बिटिया मनुंगी।

मगर तू जा ससुराल
छोड़के मायके को, क्योंकि
देना है माइका तुमने भी
तेरी होने वाली बिटिया को।

अंशु जी
सुंदर रचना के लिए धन्यवाद।
मै भी एक बेटी का पिता हु
और बिटिया ब्याहाके चली जाएगी ये सोच
अभिसे दुखी होता हु।
मगर एक बात तो निश्चित है
बेटी बेटी होती है।
माँ बाप की वो
ज्यादा प्यारी होती है।
 

Offline anshu.gupta.1614460

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Re: बिटिया!तेरा सच.....
« Reply #3 on: September 21, 2012, 11:56:57 AM »
चंदवानी जी,
इस प्रतिक्रिया के लिए करिए माफ,
बहुत उचाई से देख रहे आप...............
थोड़ा नीचे आइये,दिखेगा साफ .............
छोटे शहरो ,गांवो, कस्बो मे जाइए,
बेटियो का 'सच' वही  है!
जो मैंने लिखा है......
कोरी कल्पना ये नहीं,ये सब
मुझे दिखा है.......।
वरना न मारी जाती आज भी अजन्मी बेटियाँ
सोच बदलती गर
तो न होता ये पाप.......................

Offline anshu.gupta.1614460

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Re: बिटिया!तेरा सच.....
« Reply #4 on: September 21, 2012, 12:04:32 PM »
केदार जी ,बधाई!
कि आप एक बेटी के पिता है!
बेटियाँ सच मे बहुत प्यारी होती है लेकिन मुझे अपने पिता के घर से विदा होते समय इतनी तकलीफ हुई......कि मुझे लगता है ये हर बेटी और उसके पिता दोनों के लिए बहुत कष्टप्रद है!

Offline madhu.saanchi

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Re: बिटिया!तेरा सच.....
« Reply #5 on: September 21, 2012, 03:21:43 PM »
मै पराई ,वो तुम्हारा.....।
मै भवर..... वो किनारा.....।
जन्मा है मुझे भी तूने माँ
फिर क्यो?
मै बोझ ....वो सहारा.............।

वाह ....आपकी इस व्यथा को वर्णित करने की शैली पर ...। और आह ! नारी ह्रदय की इस व्यथा पर...।

माँ ने प्यार से पास बुलाया
और बेटी होने का सच बतलाया!!!!
बेटी!बचपन हो या जवानी की दहलीज़.....।
डरे  तेरे लिए मन
की हो न जाए कोई उंच ....नीच.......।
शाम ढले तू न आई तो
दिल घबराइएगा..।
वो आधी रात मे भी अकेला चलाजाएगा .....।

बहुत खूब ! कितना सच कहा आपने ......उनकी सोच भी अपनी जगह जायज़ है.....। नारी आज भी स्वतंत्र नहीं हुई है शायद .....।

अंत समय जब प्राण तजूगी मै
वो चिता को आग लगाए गा
और तेरा छु लेना भी
नर्क द्वार पाहुचाएगा...।


ये तो बड़ी विचित्र सी बात है .....नारी इतनी तुच्छ ......और फिर अंत में ...... तू पराई वो हमारा ..........नारी ह्रदय के लिए कितना कष्टकर ..।  आपकी  पूरी कविता बहुत अच्छी लगी और इसमें जो सच कहा गया उससे इंकार नही ....। कहीं कहीं परिवर्तन तो हुआ है ......। लेकिन पूर्णतः नहीं.....।

Offline anshu.gupta.1614460

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Re: बिटिया!तेरा सच.....
« Reply #6 on: September 21, 2012, 04:42:39 PM »
मधु जी,
कविता की सराहना एवं उसके सत्य को समझने के लिए हार्दिक आभार..............

Offline Vishvnand

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Re: बिटिया!तेरा सच.....
« Reply #7 on: September 21, 2012, 10:22:35 PM »
वाह वाह क्या बात है  "बिटिया! तेरा सच....." Anshu Ji
उत्क्रष्ट रचना है ये आपकी; मेरा हार्दिक अभिवादन  स्वीकारिये
विषय पर इतनी प्यारी सच्ची रचना हम तो सच आज तक नहीं पढ़ पाए

रचना ने दिल चीर दिया है जवाब और हल इसका क्या है दिल सोच कर हार गया है
पढ़े लिखे माँ बाप ही जानते है बेटी का ख्याल और प्यार उन्हें हरदम बेटे से ज्यादा रहता है
आज की system में बेटी को इतना चाह कर भी बिदा ही करना होता है बेटा तो अपना ही रहता है
शायद इसका हल आज की "Patriarchal system " में  नहीं, "Matriarchal system " के  द्वारा हो  सकता है

रचना की जितनी प्रशंसा करें कम है

Offline anshu.gupta.1614460

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Re: बिटिया!तेरा सच.....
« Reply #8 on: September 21, 2012, 10:37:14 PM »
आपकी प्रसंशा ने कविता मे नई जान फूक दी.....।
कोई बड़ी रचनाकार नहीं हूँ......न ही आयु व अनुभव मे आप लोगो के तुल्य हू....ज़िंदगी पर जैसा बीता बस लिख दिया।
आप जैसे पिता तुल्य व्यक्ति का आशीर्वाद रहे .....तो और प्रयास करती रहुगी।
धन्यवाद!
 
 

Offline chandwani52

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Re: बिटिया!तेरा सच.....
« Reply #9 on: September 21, 2012, 11:07:32 PM »
अंशु जी ,

(मेरी प्रतिक्रिया पर आपकी टिप्पणी के संदर्भ में)

गर सोच नही बदली है तो अवश्य बदलाव चाहिए..........
बेटी और बेटे के लिए अवश्य  समभाव चाहिए.............

हम कवियों को इस दिशा में अपनी
कविताओं के जरिये काम करना चाहिए.......
जन-जागृति लाना चाहिए ...............................