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Author Topic: श्राद्ध  (Read 601 times)

Offline anshu.gupta.1614460

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श्राद्ध
« on: October 08, 2012, 03:18:10 PM »
रोज वक़्त ,बेवक्त मिलती रोटी
की आस मे........।
तरसती ,तड़पती ..अपनों से
प्यार और सम्मान की प्यास मे.....।
वो माँ जो अतृप्त थी .....।
हर धड़कन हर स्वास  मे.....
आज उसकी आत्मिक मुक्ति के लिए
जीवन की अधूरी ....तृप्ति के लिए
बेटा करा रहा माँ का
भव्य श्राद्ध.........।
खिला रहा है जी भर के 'माँ' को
लेकिन मरने के बाद......।
आखिर क्यो?
जीते जी रखते है हम
उन्हे उनके अधिकारो से वंचित.....।
वो माली ही सूख जाते है
तिरस्कार की धूप मे
जिनहोने किया हमे  संचित......।
क्या कुछ दिनो का पित्र पक्ष
श्राद्ध या
सौ -सौ ब्राह्मणो का भोज...।
धो सकता है उन पापो को
जो किए हमने रोज......।
सच तो है ये!
हम उनकी नहीं अपनी
आत्मिक शांति का प्रयास कर रहे है..।
अपने ही पूर्व कर्मो के प्रतिफल
से डर रहे है........।
वरना जितनों ने एक दिन मे खाया है
माँ एक बरस मे न खा पाती
तू रोज कुछ पल उसे भी देता तो
तेरी माँ सच मे 'तृप्त'
होकर जाती..........।
 
 

   

« Last Edit: October 08, 2012, 03:26:04 PM by anshu.gupta.1614460 »

Offline Sajan Murarka

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Re: श्राद्ध
« Reply #1 on: October 08, 2012, 08:17:21 PM »
एक अनकहा सच : सुंदर :भव्य श्राद्ध..आखिर क्यो?जीते जी रखते है हम...उन्हे उनके अधिकारो से वंचित.....बिचारणीय बिषय !
में , मेरी तन्हाई, कुछ बीते लम्हे , कागज के कुछ टुकड़े को समेटे दो पंक्तिया . .

Offline Gopal Paul

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Re: श्राद्ध
« Reply #2 on: October 08, 2012, 08:37:47 PM »
गहरी बात ! आज का सच | कविता के लिये बधाई



Offline Vishvnand

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Re: श्राद्ध
« Reply #3 on: October 09, 2012, 06:28:39 PM »
 anshu जी
अति सुन्दर रचना और काफी तौर पर सत्य  स्थिति
श्राद्ध पर अतिसुन्दर प्रभावी अभिव्यक्ति
मातपिता को जीवन में सुखी रखा हो तो श्रद्धादि करने से पाते रहते है सुपुत्र मातपिता से आशीर्वाद और जीवन में सुख समाधान और शांति
कुपुत्र जिन्होंने जीते जी मातपिता को दुःख और कष्ट ही दिया है वो अगर श्राद्ध का दिखावा करें या प्रायश्चित के तौर पर करें
वो सब व्यर्थ है इससे नहीं मिल सकती उनके अंतर्मन को शान्ति  उनकी तो और बढ़ती जाती है  अशांति
यह इक pshychological  सत्य है और प्रभु की नीति भी   

Offline anshu.gupta.1614460

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Re: श्राद्ध
« Reply #4 on: October 09, 2012, 10:18:03 PM »
धन्यवाद  मुरारका जी.....

Offline nidhi

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Re: श्राद्ध
« Reply #5 on: October 10, 2012, 11:31:48 AM »
        अंशु जी,सत्य है कि आजकल पितृ  पक्ष का कोई महत्त्व नहीं रह गया है|

                             पुराने समय में पूर्वजों की सुख एवं शांति के लिए प्रार्थना करके श्रद्धा पूर्वक भोजन कराया जाता था |

                                आज यह एक आडम्बर मात्र रह गया है और लोग श्राद्ध को समय एवं धन का अपव्यय ही मानते हैं |

                            समयोचित एवं सत्य दर्शाती रचना |