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Author Topic: 'मोल'  (Read 887 times)

Offline anshu.gupta.1614460

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'मोल'
« on: October 18, 2012, 12:26:47 PM »
तज  हीरे की चमक
कोयले पे ललचाये  पिया...।
हीरा रहे अनंत..।
ये कोयला पल भर मे जल जाय पिया......।
सब जग मांगे सोना,हीरा
तुम 'मोल' समझ न पाये पिया......।

भर कोयले की खान मे मिलता
ज्यो रत्ती भर 'हीरा'
लाख गोपिया हो लेकिन
बनती एक ही 'मीरा'
पी कर जो विश का प्याला
तुम संग प्रीत निभाए पिया...।
हीरा रहे अनंत..।
ये कोयला पल भर मे जल जाय पिया......।

'चातक' को होती
'स्वाति' संग जैसी प्रीत...।
तुम बन न पाये क्यो?
ऐसे मेरे मीत.....
न पाये 'स्वाति' तो 'चातक'
प्यासा ही मर जाए पिया......।
हीरा रहे अनंत..।
ये कोयला पल भर मे जल जाय पिया......।

पूर्ण समर्पण मे ज्यो
बंधे 'पतंग' और 'ज्योति'
हम तुम क्यो न बांध  पाये
ज्यो 'सीपी' और 'मोती'
मिट कर भी वो अमर 'पतंगा'
जो ज्योति पे मंडराय पिया.............।
हीरा रहे अनंत..।
ये कोयला पल भर मे जल जाय पिया......।
 


 
 
« Last Edit: October 18, 2012, 01:12:08 PM by anshu.gupta.1614460 »

Offline kedar.mehendale

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Re: 'मोल'
« Reply #1 on: October 18, 2012, 04:30:47 PM »
अंशु जी
बहुत ही सुंदर रचना है।
बधाई।

इस रचना से मुझे भी कुछ सुझा है। कोशिश करूंगा उसे कल पोस्ट करू।
............................और उस पे  आपका अभिप्राय चाहूँगा।

Offline chandwani52

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Re: 'मोल'
« Reply #2 on: October 18, 2012, 10:14:17 PM »
कविता अच्छी लगी । सुंदर लेखन हेतु बधाई ।

Offline Sajan Murarka

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Re: 'मोल'
« Reply #3 on: October 19, 2012, 06:45:37 PM »
मिलन तब होता पूर्ण
समर्पण मे कोई शर्त न रह जाये
अंशुजी की कविता का यह गुण
हमें बात वही देता बार-बार समझाये
सुन्दर बिषय,भाव परिपूर्ण
बधाई देने को मन अपने आप ललचाये
में , मेरी तन्हाई, कुछ बीते लम्हे , कागज के कुछ टुकड़े को समेटे दो पंक्तिया . .

Offline anshu.gupta.1614460

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Re: 'मोल'
« Reply #4 on: October 19, 2012, 07:12:48 PM »
केदार जी हार्दिक धन्यवाद!आपकी कविता की प्रतीक्षा hai ..............

Offline anshu.gupta.1614460

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Re: 'मोल'
« Reply #5 on: October 19, 2012, 07:29:03 PM »
murarka ji pratikriya ke liye hardik aabhar...............

Offline anshu.gupta.1614460

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Re: 'मोल'
« Reply #6 on: October 19, 2012, 07:40:13 PM »
chandwani ji .............bahut आभार!!!!

Offline kedar.mehendale

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Re: 'मोल'
« Reply #7 on: October 20, 2012, 08:54:15 AM »
अंशु जी,

मैंने बिरह कविता मे मेरी कविता पोस्ट करी है। 'हीरा' आशा है आपको पसंद आएगी।