!!

Welcome to Kavya Kosh

This is a retired Kavyakosh forum used as an archive. To access new Kavyakosh.Click here

Author Topic: प्रकृति का विछोभ  (Read 729 times)

Offline abhay.saxena.750

  • Jr. Member
  • **
  • Topic Author
  • Posts: 96
  • Karma: +0/-0
  • Gender: Male
  • डॉ अभय सक्सेना
प्रकृति का विछोभ
« on: June 19, 2013, 11:55:30 PM »
ईश्वर की मर्जी कहे या प्रकृति का है प्रकोप
हर और मचा तांडव फेला सिर्फ शोक ही शोक

वह टूटते बिखरते सपने वोह छुटती आस
हर और तबाही का मंजर, यह कैसा परिहास

क्या सैलाब आया था तस्वीरे देती है गवाही
बस छुकर निकली मौत , बरबस होते राही

कुछ खुशकिस्मत थे या बस मुकदर के धनी
हर परिस्थिती से लड़कर , भरसक राह बनी

कुछ काल के गाल में समाये, बेबस और बेचारे
तकदीर का इसे खोट कहे या फिर किस्मत के मारे

अपने आज भी ढूंड रहे, दर बदर भटकते बेचारे
जब तक साँस है तो आस, बस सुनी राह निहारे

कौन जानता था होगी तबाही, यह बनेगा आलम
पत्नी, प्रेयसी, बेटा - बेटी या  कौन खोता बालम

अब सिर्फ एक आस है, सिर्फ इश्वर का है सहारा
हर मन्नत- दुआ करेंगे बस लौटा दो आँख का तारा

सच है मालिक तेरे न्याय के, आगे हम सब मजबूर
कभी ख़ुशी तो कभी गम, यही है जीवन का  दस्तूर
                                                 - डॉ अभय सक्सेना

Offline milind.kumbhare.37

  • Newbie
  • *
  • Posts: 33
  • Karma: +0/-0
  • Gender: Male
  • जिंदगी का सफर है ये कैसा सफर… कोई समझा नहीं ....
Re: प्रकृति का विछोभ
« Reply #1 on: June 20, 2013, 03:58:18 PM »
कभी ख़ुशी तो कभी गम, यही है जीवन का  दस्तूर

 :) :) :)
जीवन से भरी तेरी आँखे मजबूर करे है जीने के लिए ....
http://britmilind.blogspot.com