!!

Welcome to Kavya Kosh

This is a retired Kavyakosh forum used as an archive. To access new Kavyakosh.Click here

Author Topic: चलो इस बार की होली ………… खेलें "सजन" के साथ  (Read 398 times)

Offline praveen.gola.56

  • Jr. Member
  • **
  • Topic Author
  • Posts: 88
  • Karma: +0/-1
 ;) ;) ;) ;)
चलो इस बार की होली ………… खेलें "सजन" के साथ ,
बहुत ईर्ष्या है मन में  …………देख उनके रंग से सने हाथ ,
एक तरफ वो लिखते-लिखते  .......... बन बैठे लेखक महान ,
दूजी और हम पा ना सकें ……… उनके जैसा सम्मान ।


हर साल वो होली पर  .......... अपनी धाक जमाएँ ,
रंग-बिरंगे रंगों से  .......... अपने लेखों को सजाएँ ,
इस बार उनके रंगों को  ……… देखें कैसे मिले गुलाल ?
चलो इस बार की होली ………… खेलें सजन के साथ ।


लाल रंग हमने भी लिया  ……… सोचा कुछ तो मेल बनेगा ,
नीले रंग को लेने पर  .......... उनकी भाँति विचार सजेगा ,
हरे रंग को लेने पर  .......... साफ़ दिखी नक़ल की छाप ,
चलो इस बार की होली ………… खेलें सजन के साथ ।


भर-भर कर मटकी हम लाए  ……… उनके लेखों को बिगाड़ा ,
अपने कलम की स्याही से  .......... फिर हर अपना शब्द सँवारा ,
कुछ देर मनोरंजन करके  ............. हम करने लगे विचार ,
कि क्यूँ हम इस बार की होली ………… खेलने लगे सजन के साथ ?


होली वो त्यौहार नहीं है  .......... जिसमे ईर्ष्या लगे सताने ,
अपने ही सहपाठी को  .......... करने लगे हम चारों चित खाने ,
होली है वो त्यौहार  ………जिसमे रंगों का रंगो से हो मिलन तब तक ,
जब तक खुद रँगने वाला ना खुद से ये कह दे  ………कि "होली है  .......... भागो अब सरपट ।"
« Last Edit: March 14, 2014, 02:57:47 AM by praveen.gola.56 »