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Author Topic: इस उम्र में कैसे ………खेलें होली ?  (Read 245 times)

Offline praveen.gola.56

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इस उम्र में कैसे  ………खेलें होली ?
ना अँगिया है ना तन पर चोली ,
कोई मतवाला बुड्ढा आकर ,
करने लगा जो हमसे ठिठोली ,
तो कैसे भीगी चोली को हम ?
ढाँप कहेंगे ………… आई है होली ।

इस उम्र में कैसे  ………खेलें होली ?
जब पिचके मुँह से निकले गाली की गोली  ,
किसी मनचले युवक ने आकर ,
पकड़ ली गर बाँह जो थी कभी गोरी ,
तो कैसे अपनी बाँह छुड़ाकर ?
कंगन खनका कहेंगे ………… आई है होली ।

इस उम्र में कैसे  ………खेलें होली ?
अब ना खींचेगा कोई लहंगे की डोरी ,
मन में उठती हैं आज भी तरंगे हज़ारों ,
याद करके वो जवानी की होली ,
जब भाग दूर थक गिर जाते थे ,
और पीछे होती थी  ………मस्तों की टोली ।

इस उम्र में कैसे  ………खेलें होली ?
पके बालों में है सफेदी की बोली ,
लाल,पीले,नीले रंगो से अब ,
कैसे भर लें खुद की माँग निगोड़ी ?
खटिया पर बैठे डाँट रहे बच्चों को ,
मत भिगायो अपना  ............. लहंगा और चोली ।

इस उम्र में भी  ..........दिल ये क्यूँ करता है ?
कि खेलें हम भी फिर से अब होली ,
अपने मदभरे नैनों से फिर ,
खिला दें उनको भाँग की कोई गोली ,
वो पकड़-पकड़ हमारी चोली पर रंग डालें ,
हम लाठी फेंक कहें  .......... यही तो होती है देखो होली ॥




« Last Edit: March 14, 2014, 01:54:35 AM by praveen.gola.56 »