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Author Topic: विश्वनान्द्जी द्वारा लिखी गई"राइटर्स ब्लाक !"- मेरी प्रतिक्रिया  (Read 921 times)

Offline Sajan Murarka

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विश्वनान्द्जी द्वारा लिखी गई "राइटर्स ब्लाक ….!" कविता पर मेरी प्रतिक्रिया:::::::
यों कहे तो "उनके" प्रति आन्तरिक निवेदन:-

काव्यकोश मंच का है यह कमाल
मुझ जैसों का आश्रय-बट-वृक्ष सा विशाल
नित्य नये-नये काव्य का होता सृजन
पढ़ कर होता चिंतन,हर्षित होता मन
सब मिल लेखन में जंहा मचाय धमाल
काव्यकोश मंच का यह ही तो है कमाल
चलते-चलते कारवां बना वेहद आसान
भेद-भाव का नहीं जंहा कोई भी स्थान
प्रतिक्रिया में सहजता, नहीं कोई मलाल
काव्यकोश मंच का है यह कमाल
यश-अपयश विधी का है विधान
लेखन उत्कर्षता पर होता गुण-गान
कुछ नया लिखूं, सोच मे सब का बुरा हाल
काव्यकोश मंच मे प्रतिद्वंदिता का कमाल
दानी हो बितरागी, कैसे हो कल्याण
लगन थी,मग्न थे,"उनसे"शुरू अभियान
स्तब्द अगर"उनका" सृजन मन मे सवाल
काव्यकोश मंच मे दिखता उनका कमाल
तृप्ती-अतृप्ती बोद का सहज नहीं ब्याखन
पथ-प्रदर्शक रुके तो,सफल कैसे हो अभियान
स्नेह-प्यार की दौलत से रहते माला-माल
काव्यकोश मंच मे यों ही चले "उनका" कमाल
विश्वनान्द्जी, केदारजी अन्य प्रेमी जन
प्रोत्सहान देते, सक्रिय रहता मेरा लेखन
"उनके" गीत-कविता का है मायाजाल
काव्यकोश मंच मे जुढ़ा रहता हर हाल

+सजन कुमार मुरारका
« Last Edit: September 16, 2012, 10:07:08 PM by Sajan Murarka »
में , मेरी तन्हाई, कुछ बीते लम्हे , कागज के कुछ टुकड़े को समेटे दो पंक्तिया . .

Offline kedar.mehendale

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  • यूही .... चलते चलते
साजन जी, विश्व नन्द जी
गोपाल जी, मधु जी
राकेश जी, अंशु जी
और ऐसे और कई
है दोस्त हम सब ऐसे
तो क्यो आएगा किसिकों
"राइटर्स ब्लाक !" कभी

प्रेम, विरह, हास्य, प्रेरणा,
विडंबन, शृंगार, गंभीर, देश भक्ति,
बाल हो या इतर रचना
हमे ना किसीसे परेज कोही।
लिखते रहेंगे कविताए नई
देते रहेंगे प्रतिक्रिया कई
 :)

Offline Vishvnand

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सजन जी और केदार जी  आपकी भावना प्रशंसा की है बात
मेरी "राइटर्स ब्लोंक" रचना का यही है भावार्थ
"राइटर्स ब्लोंक"में  out of mood होने से कोई कवि नहीं छूटा है तक आज
 जब उसे लगता  कविता  देवी उससे रूठ गयी है जाने क्या हो गयी है बात
पर काव्यकोश जैसी अब जो है साईट वहां  कविता पढ़ कमेन्ट जो  देंगे आप
पायेंगे जल्द ही कविता देवी को प्रसन्न और कल्पना सूझने लगेंगी अपनेआप
इसीलिये मै समझता हूँ  "राइटर्स ब्लोंक" का आना  वर सा है;  नहीं  है कोई श्राप ...   :)

Offline Sajan Murarka

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विश्वनंद जी

प्रतिक्रिया लिखी थी, मन तब हुवा था उदास
आपका लेखन है संजीवनी सुधा सा अहसास
मन में इच्छा थी जल्द ही कविता देवी हो प्रसन्न
कल्पना सूझने लगें आपको, होने लगे नया सृजन
आपका प्रतिउत्तर फिर जगाता मन मे विश्वास
आपका आना वर सा है; नहीं होंगे अब हताश
 :D
XXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXX

केदारजी

सच कहता हूँ, आप सब है प्रेरणा के स्रोत
प्रेम,प्यार,हंसी-मजाक प्रतिक्रिया मे ओत-प्रोत
लिखने का दिल चाहता, मिलता है प्यार इतना
अब "राइटर्स ब्लाक !" काहे को ब्लाक होना
 ;D
XXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXX

विश्व नन्द जी
गोपाल जी, मधु जी
राकेश जी, अंशु जी
और सभी सुधी कवी जी
दोस्त हम सब, हैं हमराही
शुक्रिया !, करते रहें होशला अफजाई
भूल-चुक माफ़ करें, आश मन मे जगाई

 :)
में , मेरी तन्हाई, कुछ बीते लम्हे , कागज के कुछ टुकड़े को समेटे दो पंक्तिया . .

Offline chandwani52

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