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Author Topic: दोस्त बिना जीवन  (Read 519 times)

Offline Sajan Murarka

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दोस्त बिना जीवन
« on: July 25, 2013, 07:01:51 PM »
दोस्त बिना जीवन

ए दोस्त
खुदगर्जियों की कालीख
से लिखे दोस्ती का
फ़रमान ओढ़ सो गए
जब मेरे अरमान
छोड़ चुके अस्थाएँ
और फैलाते
अविश्वास, तभी
मन  की खीज
खोजती है
वह बन्धन
जैसे कि काली रात मे
दो जुगनू जगमगाये हो
करने रोशन
पूरा का पूरा आसमान
इसके पीछे जो कारण
वे मेरे हृदय मे बसते
दोस्त ! 
है कितना कठिन
दोस्त बिना जीवन
जैसे कि बीते
पर रुठे हो हर क्षण

सजन कुमार मुरारका


में , मेरी तन्हाई, कुछ बीते लम्हे , कागज के कुछ टुकड़े को समेटे दो पंक्तिया . .

Offline tripti.mishra

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Re: दोस्त बिना जीवन
« Reply #1 on: August 04, 2013, 01:55:44 PM »
ये कविता पढ़ कर गाना याद आ गया

"यार बिना चैन कहा रे..।
प्यार बिना चैन कहा रे।
सोना नहीं चाँदी नहीं प्यार तो मिला ..अरे प्यार करले.। "