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Author Topic: मेरी दोस्त...मेरी गुरु!  (Read 544 times)

Offline kapoor.aruna

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मेरी दोस्त...मेरी गुरु!
« on: August 03, 2013, 01:04:33 PM »
मेरी दोस्त...मेरी गुरु!

दोस्त बनी जब से अनुराधा!
बदल गया है जीवन....
संचार हुआ नव-ऊर्जा का,
और खिल उठा है तन-मन!

हम दोनों की उम्र बराबर...
फिर भी वो है गुरु मेरी!
कई गुण ऐसे है उसमें...
जो देख मैं जाऊं वारी!

सबसे बड़ा गुण उसका ये है..
कि समयकी वो पाबन्द बड़ी!
हर काम करती रहती समय पर..
चाहे भले रुक जाएँ घड़ी!

दूसरा गुण सुननी औरों की..
फिर अपना मत बतलाना!
कोई पूछे तब ही बोलना..
बिन मांगे न सलाह देना!

निंदा करती नहीं किसी की...
क्लेश-कलह से वह रहती दूर!
शान्ति-प्रिय है मेरी सहेली...
इतना तो मैं कहूंगी जरुर!

अनुराधा के चेहरे पर...
कभी न देखी मैंने थकान!
क्यों कि अपनी सेहत का...
रखती है वह पूरा ध्यान!

हँसी-मजाक की बातें करती...
स्वभाव से है मिलनसार!
झूठ फरेब से करती वो घृणा..
नेकी-सच्चाई से उसे है प्यार!

आत्म-सन्मान और स्वाभिमान की...
शिक्षा मैंने उससे ही पाई!
जीवन के सुख को तब पहचाना,
जब से वह जीवन में आई!

Offline tripti.mishra

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Re: मेरी दोस्त...मेरी गुरु!
« Reply #1 on: August 04, 2013, 01:56:31 PM »
अनुराधा जी बहुत भाग्यशाली है की आपके जैसे दोस्त उनको मिली।
बहुत बड़िया कविता .। :)