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Author Topic: दोस्ती  (Read 739 times)

Offline pcmurarka

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  • प्रेमचंद मुरारका
दोस्ती
« on: July 28, 2013, 07:34:04 PM »
जिसका मोल आंका नहीं जा सकता वह है दोस्ती
जिसमे कोई स्वार्थ का स्थान नही वह हैं दोस्ती
जिसमे मान अपमान का स्थान नहीं वह है दोस्ती
जिसमे आयाम नहीं वह हैं दोस्ती
जिसमे कोई बिराम नहीं वह हैं दोस्ती

जिसमे निराशा का स्थान नहीं वह है दोस्ती
जिसमे संतोष का अभाव नहीं वह है दोस्ती
जिसमे गम बांटे जाते है वह हैं दोस्ती
जिसमे एक दुसरे के सुख दुःख को अपना ले वह है दोस्ती 
जिसमे जीने की प्रेरणा मिलती हैं वह है दोस्ती
 
जिसमे परायापन नहीं वह है दोस्ती
जिसमे दोनो एक दुसरे के परिपूरक होते हैं वह है दोस्ती
जिसमे एक के आंसू को दुसरा समेट  लेता है वह है दोस्ती
जिसमे धन्यबाद कहने की जरुरत नहीं वह है दोस्ती
जिसमे सॉरी कहने की गुंजाइश नहीं वह है दोस्ती

यह है भारत के दोस्तों की दास्तान
जंहा हर दिन होता है दोस्ती का गुलिस्थान

जंहा रोज़ मनाया जाता हैं  FRIENDSHIP DAY
फिर क्या जरुरत FRIENDSHIP DAY मनाना अलगसे 
पाश्चात देशो में जंहा दोस्ती स्वार्थ के लिए ही होती हैं
वह मनाये FRIENDSHIP DAY अपने स्वार्थ के लिए
--------प्रेमचंद मुरारका


« Last Edit: July 28, 2013, 07:37:19 PM by pcmurarka »

Offline tripti.mishra

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Re: दोस्ती
« Reply #1 on: August 04, 2013, 01:57:51 PM »
सही कहा प्रेमचंद जी,
दोस्ती की परिभाषा एक ही है
पर दुनिया भर मे उसको जताने की तरीक़े अलग है

Offline pcmurarka

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  • प्रेमचंद मुरारका
Re: दोस्ती
« Reply #2 on: August 04, 2013, 02:20:51 PM »
तृप्तिजी आपका कंहना बिल्कुल जायज हैं रास्ते बहुत हैं तरीके भी बहुत हैं पर चौराहा पर दोस्त खड़ा हैं इंतजार मे |