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Author Topic: यह मुंबई है मेरी जान  (Read 2632 times)

Offline pcmurarka

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  • प्रेमचंद मुरारका
यह मुंबई है मेरी जान
« on: May 29, 2014, 05:22:35 PM »
पत्नी सुबह से भुनभुना रही थी
आज जो बाई नहीं आई थी
वैसे भी महीने में ४/५ दिन नहीं आती थी 
सुबह से बाई से बात करने की कोशिश की थी
बात करे तो कैसे करे मोबाइल स्विच ऑफ है
काम करने की आदत छूट गई थी
मुझे तो चिंता हो रही थी
अब हमारा क्या होगा नास्ता तो मिला नहीं था 
टिफ़िन भी कौन बनाएगा
सारा घर बिखरा बिखरा दिख रहा था
पत्नी को यह सब बातो से मतलब नहीं था
वह सोच रही थी बच्चे स्कूल कैसे जायेगे
कौन उनको दूध पिलाएगा नास्ता करायेगा
टिफ़िन बनाकर टिफ़िन बॉक्स देयेगा
आजकल की बाई क्या महारानी हो गई
कुछ कहने पर महारानीजी का पारा गर्म हो जाता है
काम छोड़कर जाने की धमकी देती है
इतने में दरवाजे की घंटी बजी
पत्नी ने दरवाजा खोला सामने बाई खडी थी
पत्नी कुछ कहती उसके आगे उसने फरमाया
आज का काम पूरा करकर चली जाऊँगी
कल से काम पर नहीं आउंगी
आप दूसरी बाई देख लीजियेगा
सामने फ्लैट वाले रोज़ बुलाते है
पति और पत्नी दो ही जने है
दोनों ही नौकरी करते है काम कुछ है नहीं
पत्नी को किट्टी पार्टी में जाना था
ठीक है आज का काम तो निपटाओ
में तो नास्ता करकर टिफ़िन लेकर चला गया
बाई बच्चो को नास्ता करा रही थी
मेरे जाते ही पत्नी अपना रूप बदल लिया
पगार बढ़ाने की हामी भर दी
महीने की ४ छुट्टी भी मंजूर कर ली
बाई ने कंहा मेरा मोह तो बच्चो के लिए है
पगार की कोई बड़ी बात नही थी
में ऑफिस से आया तो पत्नी खुश नज़र आ रही थी
मेरे दिमाग की बत्ती जल गई
कोल्ड वॉर खत्म हो गया है
मुंबई में फ्लैट ज्यादा बाई गिनती की है
यहाँ रोज़ाना समझोता करना पड़ता है I
---------प्रेमचंद मुरारका

Offline Vishvnand

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Re: यह मुंबई है मेरी जान
« Reply #1 on: May 31, 2014, 11:30:37 AM »
Achchii Rachanaa aur vivran
Asalii aur Sachchii baat to yahii hai aaj ke din,
Beevi ko bhii sabse jyaadaa ghar me kaamvaali kaa hi hai importance.....!  :)


« Last Edit: May 31, 2014, 04:10:45 PM by Vishvnand »