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Author Topic: भारत देश महान बुद्धू तीरन्दाज़  (Read 2226 times)

Offline somsharma

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मूरख शिष्य अरू मूरख गुरु फिरभी भारत देश महान

बुद्धू तीरन्दाज़ युवा

माँ बोली मूरख है छोरा
गुरु कहे है केवल नादान !
यूँ ज़िद करे खेल खेलन की
में सीखूं चलना तीर कमान!!1!!

बुद्धू रोयो नहीं मानयो
अरू ज़िद करली है भारी !
बापू बोल्योल कहे रुलावे
दिलादे तीर कमान पिटारी !!2!!

लेकर तीर कमान ख़ुसी ख़ुसी
पहुँचा गुरु घर आन   !
पैर नही छोड़े गुरुअन के
जब लग दियो शिक्षा वरदान !!3!

अछो समय आ गयो मेरो
में समझायो बड़ेगी शान !
जब ही गुरु डियो मोहे होका
उठा लियो लपक के तीर कमान !!4!!

दोनों हाथन में थाम धनुस को
तीर चडाए जब ली खेंच कमान !
ज्यों ही छोड़ियो बाण हाथ से
गयो तीर संग मेरो कान !!5!!

उछल परो पीड़ा संग भारी
लहू बहे कान जस पानी !
गिर गयो धनुष हाथ से जब ही
आ गयी याद हमारी नानी !!6!!

गुरु दोरियो कहे जाओ घर
खेल नही तेरे बस कहना मान !
हम रोते ज़िद पर अड़े रहे
नही सीखेंगे तीर कमान !!7!!

दया कर गुरु ने हाथ दे अपनो
पकड़ धनुष खेंचयो बान !
ज्यों ही छोरियो तीर जो हमने
गयो गुरु अंगूठा संग बान !!8!!

उछाल गुरु तभे दूर खड़े भए
दियो बाँया हाथ दबाए !
मूरख बुद्धू को जो सिखावे
अंगूठा दान दक्ष्णा दे जाए !!9!!

गुरु चिल्ला मोहे बोले उठा अंगूठा
देओ संग बाँये हाथ मिलाए !
हम ना सुनी एक उहू बाता
केवल अपनी रहो गाये !!10!!

जब ही हम गुरु कस के पकड़े
तभे कुत्तो एक आयो !
ले गयो अंगूठा मुँह दाबे
गुरु बहुत चिल्लायो !!11!!

पीट माथा अब गुरु रोवत है
मूरख शिष्या से होवे हान !
अंगूठा खोयो है गुरु ने अपनो
अरू शिष्य खोयो है कान !!12!!

ज़िद कर कर फिरभी बुद्धू रोवत है
हम सीखें गे तीर कमान  !
बापू मारयो अम्मा मारयो
अरू मारयो सारा जहान !! 13!!

आइसो मूर्ख शिष्य जो होवे
करें सभन की हान !!
मूरख शिष्य अरू मूरख गुरु संग
नही बनता देश महान !
यही है भारत माँ की दुर्दशा
लो कहना सोम का मान !!13!!

Offline tripti.mishra

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बहुत बढ़िया somji