!!

Welcome to Kavya Kosh

This is a retired Kavyakosh forum used as an archive. To access new Kavyakosh.Click here

Author Topic: आजादी के मायने  (Read 4123 times)

Offline hemlata

  • Newbie
  • *
  • Topic Author
  • Posts: 23
  • Karma: +0/-0
आजादी के मायने
« on: August 05, 2014, 06:37:39 PM »

हर शख्स कहता है इस जहाँ से जाने वाले चमकते हैं,

 उस जहाँ में सितारे बनकर ,

जो शहीद हुए हैं हिन्दोस्तान के वास्ते ,

क्या वो भी चमकते होंगे  तारे बनकर ,

गर ऐसा है तो उनकी आँखों से बरसते होंगे ,

आसूं इस धरा पर शबनम की बूँद बनकर ,

देख कर दुर्दसा इस आजाद देश की

मुश्किलों का सामना कर के दिलवा गए जो आज़ादी ,
गुमनामियों में खो कर नाम हमको दिखा गए हसीं सपने ,

है कोई आज ऐसा जो बन सके सुभाष चन्द्र ,

है किसी में दम इतना जो बन सके बापू महात्मा

यहाँ तो हर किसी को पड़ी है अपनी -अपनी

कैसी आजादी और  कैसी गुलामी ,

हर शख्श करने में लगा है जेब अपनी भारी ,

न याद करते हैं नेता उनकी कुर्बानियों को ,

एक -दुसरे पर छींटा -कसी करने से फुर्सत कहाँ किसी को ,

एक दिन के लिए बस याद कर लिया करते हैं उनको ,

बहाया जिन सैंकड़ों ने इस धरा पर लहू था ,

दिन आता है जब स्वतंत्रता दिवस  का ,

याद आ ही जाती है उन बेशुमार शहीदों की ,

चमचामते कपड़ों में झंडा लहराना तो याद  रहता है

पर क्या याद एक भी शहीद के नाम उनको होंगे ,

तिरंगा फहराने की परम्परा को यूँ ही साल दर साल ,निभाए जा रहे हैं ,
कैसी है ये आजादी ,जिस देश में हर नौजवान ,
नशे की बेड़ियों में यूँ जकड़ता जा रहा है ,
कैसी है ये आजादी, जो आज भी पश्चिमी सभ्यता में जकड़ा हुआ है ,
अब तो आजादी के असली मायने समझने होंगे ,

एक बार उनकी कुर्बानियों फिर से याद दिलाना होगा ,

इस देश के हर नौजवान को जागना ही होगा ,

नशे से दूर रहकर कुछ कर गुजरना होगा ,

तड़पती धरा की सिसकियों को फिर महसूस करना होगा ,

अन्यथा नहीं है दूर वो बदनसीब दिन।,

ये देश एक बार फिर से गुलामी की जंजीरों में जकड़ा होगा ॥