!!

Welcome to Kavya Kosh

This is a retired Kavyakosh forum used as an archive. To access new Kavyakosh.Click here

Author Topic: मै भी बदल जाता....  (Read 458 times)

Offline kamalbhansali

  • Newbie
  • *
  • Topic Author
  • Posts: 24
  • Karma: +0/-0
  • Gender: Male
  • कमल भंसाली
मै भी बदल जाता....
« on: August 23, 2014, 01:35:18 PM »
अन्दांज,जिन्दगी ने बदला
मैने नही,आज भी हूं,मै
कल की तरह, बीते सवेरे की तरह
तुम कहती हो,युग बदल रहा
मुझे तो ऐसा कुछ नही दिख रहा
हाँ,आडम्बर और  हिंसा का अँधेरा
काली घटा बन कर जरुर छा रहा
नवीन कर्ण के चन्द्रमा में
झूठ का दाग भी बढ़ता जा रहा
हिंसा की चांदनी से जग को नहा रहा
संयम की अकेली दीवार पर
देखो लोभ कितने हथोडों से
बिना सोचे वार ही करते जा रहा
मुझे तो अब यही लग रहा
इन्सान दानव बनता जा रहा
मेरा बदलाव ऐसा हो तो
सच कहना, स्वीकार करोगी
तुम धरा की चांदनी
स्वच्छ धवल, मन वीतरागिनी
मै, धरा की धूप
कभी कम कम ज्यादा
अपना ही, अस्तित्व मेरा आधा
मर्यादित हूं, तभी मर्द कहलाता
वरना,नपुसंकता में ही रह जाता
पत्थरों से,पाषाण युग बन जाता
इतिहास में,अत्याचारी भी नाम कर जाता
बदलाव, तो मुझे भी अच्छा लगता
अगर सरंक्षित तुम्हे न कर पाता
जिस बदलाव से किसी का न भला
बताओं क्या मेरा बदलना
तुम्हे अच्छा लगता, सच कहना
हाँ,इंसानियत का जज्बा अगर
तुम्हारी तरह धवल और साफ़ होता
कसम से, मै भी बदल जाता....

●●●कमल भंसाली●●●






कवि नहीं हूँ , पर भावनायें रखता हूँ. आप का अनुभव मेरा मार्गदर्शन कर सकता है.