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Author Topic: मेृत्यु पर संवेदना  (Read 303 times)

Offline sadhakummed

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मेृत्यु पर संवेदना
« on: September 16, 2014, 04:28:27 PM »
घर में बड़े का जाना, एकबार घर को खाली कर देता है
मन के तलपर उनके साथ बनी अनगिनत स्मृतियां उमड़ती-घुमड़ती हैं।
पोते-पोतियों और जीवनसाथी को अधिक दुःख होता है।
सबके प्रति हार्दिक संवेदनाएं।

71 वर्ष की उम्र तक आते-आते
जीवन रस सूखने लगता है
कार्य-व्यवहार और विचारों में नयापन ना आए
 तो बदलते समय की धारा में वे उपेक्षा महसूस ने लगते हैं,
अपने भीतर ही भीतर होता संघर्ष शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को
गलाने दूषित करने लगता है।
सुदर्शन जी को किडनी और हार्ट की तकलीफ थी,
चिकित्सार्थ अस्पताल में ही रहे, वहीं शरीर छूट गया!
अतीव दुखदाई संवाद है भाई!
जाने वाले को तो अतीव वेदना होती ही है,
परिजनों को भी न मिटने वाला अफसोस रह जाता है।
दोनों तरफ का यह दुःख अनेक प्रश्न खड़े करता है;
संवेदना के इन नाजुक क्षणों में
हम परस्पर इस दुख को बाँट सकें,
तो भविष्य में हमारे अन्य परिजनों को इस संकट से बचाया जा सकता है।
यही सामाजिक उत्तरदायित्व भी है, कर्तव्य भी।