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Author Topic: रोटी और राजनीति!!  (Read 2330 times)

Offline himanshu.sharma.9275

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रोटी और राजनीति!!
« on: October 19, 2014, 01:29:54 PM »
सुबह जब निकला मैं
गंतव्य को जाने के लिए!
एक श्वान परिवार लगा रहा था,
कचरे के ढेर के आसपास चक्कर,
ताकि मिल जाए कुछ खाने के लिए!

देखा कुछ देर बाद तो,
माता के मुंह में था,
रोटी का एक टुकड़ा!
पिल्लों के मुंह पर आ गयी,
थी रौनक और प्रफुल्लित था,
उन सबका मुखड़ा!

चारों पिल्लों ने शुरू कर दिए थे,
लगाना माता के चारों और चक्कर!
माता भी देख रही थी उनको अब,
थोडा सा शक से और थोडा घबराकर!

एक पिल्ले ने माता के मुख से चाहा,
लेना अपने हक का थोडा सा अन्न!
विफल कर दिया गया उसका प्रयास,
क्यूंकि बाकि दो भी थे भूख से संपन्न!

एक रोटी के टुकडे के लिए,
तीनों थे बहुत ही लड़ रहे!
चौथे पिल्ले जी बैठकर मानो,
उनके मनोभाव थे पढ़ रहे!

जब देख लिया था कि मिलेगी,
नहीं रोटी अपनी माता से छीनकर!
क्यूंकि उनकी माता की शक्ति,
भारी पड़ती दिख रही थी उन तीन पर!

इतने में चौथा उठा और जाकर,
अपनी माता के सामने पूँछ हिला दी!
उसकी इस प्रतिक्रिया ने माता के,
उर में मानो ममता की आंच जगा दी!

खुद को रखकर भूखा माता ने,
रोटी चौथे पिल्ले को खाने को दे दी!
ये घटना मेरे मनो मस्तिष्क से,
एक बात मानो हो ये कह गयी!

कि वो रोटी कुछ और नहीं,
एक राजनैतिक सत्ता थी!
और वो माता कोई और नहीं,
भोली मतदाता जनता थी!

तीनों पिल्ले थे अलग-अलग,
प्रत्याशी जो हक छीनना चाहते थे!
बैठकर सत्ता की रोटी पर बस,
उसकी बोटियाँ गिनना चाहते थे!

चौथा असल में निकला असल राजनेता,
जिसने जनता के सामने अपनी पूंछ हिला दी!
इसका नतीजा तो देखिये साहब लोगों कि,
जनता ने उसको सत्ता की रोटी खिला दी!