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Author Topic: वो रात  (Read 203 times)

Offline rajkamdar

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वो रात
« on: October 29, 2014, 06:44:12 PM »
तेरे साथ देखे वो सपने
और मीठी सी वो बात
जाने कब होंगे अपने,
कब आयेगी वो रात

सोचता था प्यार से तुझे पाउंगा,
तेरा हाथ पकड़ जहाँ से मिलाउंगा

होंगे कुछ धमाके
खुश होगा दिल तुझे पाके

आतिशें होगी हर जगह,
खिलेगा सारा समाः

रोशनी भरा वो रास्ता,
देखेगा  हमारी दास्तान

शोर होगा हर जगाह,
शोर के बीच हम तुम
दिवाली मनायेगा जहाँ
हम होंगे तुझमे गुम

तेरे साथ देखे वो सपने
और मीठी सी वो बात
जाने कब होंगे अपने,
कब आयेगी वो रात

आई उजालों भरी रात,
मेरे आंगण मे क्यू है अंधेरा?
इज़हार करनी थी कोई बात,
पर साथी कहा है मेरा?

हालातों से मजबूर हुआ,
सपना चकनाचूर हुआ,
खुदा अब तू ही बता
किस मंदिर मे मांगू दुआ?

पटाखे जलते है आंगण मे,
घर भीतर दिल जले..
यादें अब भी है ज़ेहेन मे,
नज़रो मे जलती फुलझडें

रंग भरी रंगोली है,
यार मेरा खो गया..
सपनो मे अब भी तेरी डोली है,
खुशी के माहोल मे दिल रो गया


रोशनी भरा वो रास्ता,
अधूरी हमारी दास्तान..

शोर है हर जगह,
शोर के बीच मैं गुम,
दिवाली मनाये जहाँ
कहा गये तुम?

तेरे साथ देखे वो सपने
और मीठी सी वो बात
ना हो पाये अपने,
मना ली दिवाली की रात



Offline rajkamdar

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Re: वो रात
« Reply #1 on: October 31, 2014, 06:46:58 PM »
कृपया पढ़ कर अपनी राय दे