!!

Welcome to Kavya Kosh

This is a retired Kavyakosh forum used as an archive. To access new Kavyakosh.Click here

Author Topic: नन्हा दीपक  (Read 323 times)

Offline dineshcharan

  • Newbie
  • *
  • Topic Author
  • Posts: 16
  • Karma: +0/-0
  • Gender: Male
  • दिनेश चारण
नन्हा दीपक
« on: October 29, 2014, 11:23:06 PM »
            नन्हा दीपक

वो नन्हा दीपक दुनिया के अँधेरे को
मिटाने का कर रहा है प्रयास ।
अँधेरे से पथराई आँखे भी बैठ गई
दम साधे और लगा दी आश ।
अभी काली रात बाकी है
अँधेरा भी है घनगौर ।
पर वो नन्हा दीपक जलते हुए
आशा की किरण फ़ैला रहा हँ चाहुऔर ।
भयंकर और विशाल अन्धेरा
उस नन्हे दीपक पर है झपटता
पर उस नन्हे दीपक की
हिम्मत देख पीछे है हटता ।
उस अँधेरे का साथ देने को
हवा का तेज जोका आया ।
वो नन्हा दीपक मद्धम हुआ
या यु कहु थोड़ा हड़बड़ाया  ।
लेकिन वो नन्हा दीपक दम लगाकर
फिर पहले की तरह जल गया ।
उसे पुनर्जीवित होते देख
अँधेरा दो कदम पीछे चला गया ।
रात भर हर मुसीबत से लड़कर
वो नन्हा दीपक उजाला फेलाता रहा ।
कभी मद्धम तो कभी तेज होकर
रातभर अँधेरे को छकाता रहा ।
अँधेरे से लड़ने का जज्बा अभी भी है
पर तेल ख़त्म होने लगा ।
इस पर भी जारी है उसकी कोशिश
वो अपना पूरी बाती जलाने लगा ।
अंतिम प्रहर में नन्हे दीपक ने
अपनी कोशिश को चरम पर पहुचाया ।
नन्हे दीपक के आखिरी वक़्त में
इतना उजाला देख अँधेरा घबराया ।
उस दीपक ने अंतिम सांस ली
अँधेरे की विजय देख धरती घबराई ।
लेकिन विजय हुआ नन्हा दीपक
उसी वक़्त प्रथम सूर्य किरण ज़मी पर आई ।
          दिनेश चारण

समुर्ण पुस्तक के लिए


ebooks.newshunt.com/Ebooks/default/Meri-Kavitayen/b-58439
« Last Edit: January 14, 2015, 05:01:18 PM by dineshcharan »
दिनेश चारण

Offline nareshcharan

  • Newbie
  • *
  • Posts: 3
  • Karma: +0/-0
Re: नन्हा दीपक
« Reply #1 on: November 07, 2014, 09:56:07 PM »
Wah kya bat hai .