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Author Topic: आ गयी दिवाली  (Read 219 times)

Offline rajkamdar

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आ गयी दिवाली
« on: October 30, 2014, 06:02:07 PM »
चेहरो  पे छाई हरयाली
लो आ गयी दिवाली

कपड़े नये है सबके पास,
बम की आवाज़ चुराती सास

चेहरो पे छाई हरयाली
लो आ गयी दिवाली

आंगण में है रंग भरे,
लाल पीले और कही हरे,

चेहरो पे छाई हरयाली
लो आ गयी दिवाली

दीप जले घी भर कर,
पटाखें  फूटे जी भर कर

रोशनी भरी है जहाँ में,
खिल उठे है चेहरे..
नज़र गयी मेरी वहां पे,
जहाँ है गम के पेहरे..

चेहरो पे छाई हरयाली
लो आ गयी दिवाली

कपड़े नहीं है उसके पास,
बेठा वो देखे कोई आस..

नहीं छाई यहाँ हरयाली,
क्यू फिर आई दिवाली

आंगण है आंसू से भरे,
कोई वहां भूखा मरे..

नहीं छाई यहाँ हरयाली,
क्यू फिर आई दिवाली

खाने को यहाँ तेल नहीं,
त्योहार यहाँ खेल नहीं..

होगी रोशनी जहाँ में,
खिले होंगे चेहरे..
मे निर्धन यहा हु खड़ा,
मैं और बच्चे मेरे..

नहीं छाई यहाँ हरयाली,
क्यू फिर आई दिवाली

Offline rajkamdar

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Re: आ गयी दिवाली
« Reply #1 on: October 31, 2014, 06:48:42 PM »
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