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Author Topic: तुम थी तो  (Read 592 times)

Offline dineshcharan

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तुम थी तो
« on: November 04, 2014, 11:23:36 PM »
       तुम थी तो

तुम थी तो महफ़िल खुशनुमा थी ।
सांझ हसी थी रात जवा थी  ।
हवा लेती थी  अंगडाइया ।
बतियाती थी परछाइया ।
तुम थी जिंदगी रंगी थी ।
हर तरफ खुशिया बिछी थी ।
आँखों में सपने थे ।
सारे सपने जैसे अपने थे ।
बसंत की बहार सुहाती थी ।
कोकिल भी मीठा गाना गाती थी ।
तुम थी चैन भी खोता था ।
नींद भी उड़ जाती थी ।
       ****
               दिनेश चारण

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« Last Edit: January 27, 2015, 06:31:07 PM by dineshcharan »
दिनेश चारण

Offline nareshcharan

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Re: तुम थी तो
« Reply #1 on: November 12, 2014, 04:06:11 PM »
बहुत बढिया हैं । अति उत्तम

Offline kedar.mehendale

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Re: तुम थी तो
« Reply #2 on: November 25, 2014, 04:46:56 PM »
वाह वाह

Offline dineshcharan

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  • दिनेश चारण
Re: तुम थी तो
« Reply #3 on: March 29, 2015, 09:31:41 PM »
धन्यवाद
दिनेश चारण