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Author Topic: सफर बचपन से.………  (Read 190 times)

Offline pcmurarka

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  • प्रेमचंद मुरारका
सफर बचपन से.………
« on: November 25, 2014, 11:43:11 PM »
 

कोमल सी काया
कोमल सा बचपन
टूटी फूटी बातो ने
सब का मन लुभाया
माँ ने ह्रदय से लगाया
बापू का मन काम में
न लग पाया
भागकर घर आया
बच्चे को रोते हुए पाया
गोदी में लिया
माँ ने तुरंत दूध पिलाया
फिर बचपन घूम आया
अपना स्वरुप दिखलाया
दादा दादी को हर्षाया
सोने का समय आ गया
माँ की कोख में सो गया
बचपन की मोहमाया
माँ को सपना आया
सपनेमे बिश्वरूप का
दर्शन पाया
जीवन धन्य हो गया
देखते देखते बड़ा हो गया
शरारत से वाज न आया
पाठशाला से स्कूल चला गया
स्कूल से कॉलेज चला गया
परिवार का नाम रोशन
कर दिया
माँ का सपना साकार हो गया
और सपना टूट गया
माँ ने सपना को सच
कर दिखाया
मेरा बचपन जवान हो गया
माँ को अपने कंधे से
बिदा करकर आया
फुटफुट कर रोया
पत्नी ने ढाढस बंधाया
बचपन से बुढ़ापा आया
माँ को भूल न पाया
बेटे में अपने बचपन को
पोते में अपने बचपन को
देख पाया
अपने बचपन को भूल
नहीं पाया
बुढ़ापा में सपना आया
माँ का बुलाया आया
नए जीवन नए रूप में
यह थी बिधाता की माया I
-----प्रेमचंद मुरारका