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Author Topic: तुम उठो धरा के वीर ये धरा तुमाहरी|  (Read 2806 times)

Offline veer singh

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तुम उठो धरा के वीर ये धरा तुमाहरी
तुम उठो धरा के वीर ये धरा तुमाहरी
अन्याय का घना अँधेरा अच्छाई को निगल रहा है,
इस जग की सारी की सारी सच्चाई को निगल रहा है
डर की महिमा तो देखो समाज सारा शिखंडी बना है
पल पल आंहे भरती ये धरती प्यारी
तुम उठो धरा के वीर ये धरा तुमाहरी |

आतंक का बढता जाये साया,
खून से लथपथ पडी है काया
हेवानियत की हद तो देखो,मासूमों को भी निशाना बनाया
हेवानो के वध हेतु धरती करे पुकार भारी,
तुम उठो धरा के वीर ये धरा तुमाहरी|

लुटती इज़्जत चोराहों पर
शीश कटते सीमाओ पर,
तेजाबी हमले तन मन को भेद रहे हैं
करुणा के भाव आज बिखर गये हैं
निर्भया की घुटती साँसे पुकार करे तुमाहरी,
तुम उठो धरा के वीर ये धरा तुमाहरी|

अब उठ जाओ देर ना लगाओ
लेके भगत सिंह की गोली ,होठो पर गुरु गोबिंद सिंह की बोली
डट जाओ माँ को आतंक से बचाओ
माँ भारती देखे राह तुमाहरी
तुम उठो धरा के वीर ये धरा तुमाहरी|